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रामेश्वर शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Rameshwar Shakti Peeth — सती का अंस से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

Ramanathaswamy Temple Corridor
Ramanathaswamy Temple, Rameswaram, Tamil Nadu — Wikimedia Commons (CC BY-SA)

रामेश्वर शक्ति पीठ तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति एवं ज्योतिर्लिंग दोनों का संगम स्थल है। यहाँ सती के कंधे का खण्ड गिरा था। पिठानिर्णय में इसे प्रमुख शक्ति पीठों में स्थान दिया गया है।

परिचय

रामेश्वर शक्ति पीठ तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र तीर्थस्थल है। यह पीठ भारत के पचासी शक्ति पीठों में पच्चीसवाँ स्थान रखता है। यह स्थान इसलिए अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यह शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के रूप में पूजनीय है। यहाँ सती के कंधे का खण्ड गिरा था, जिसके कारण यहाँ पार्वतीदेवी के रूप में पूजा होती है। भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग यहाँ विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विद्यमान है।

पौराणिक कथा

रामेश्वर की पौराणिक कथा दो प्रमुख कथाओं से जुड़ी है। पहली कथा शक्ति पीठ से संबंधित है — पिठानिर्णय और शिवपुराण के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के खण्ड किए, तब उनके कंधे का खण्ड इस पवित्र भूमि पर गिरा। दूसरी कथा रामायण से संबंधित है — भगवान राम ने लंका विजय के पूर्व इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर शिव की आराधना की थी।

रामायण के अनुसार, जब भगवान राम को समुद्र पार करके लंका जाना था, तब उन्होंने हनुमान को शिवलिंग लाने के लिए काशी भेजा। परंतु हनुमान समय पर नहीं लौट सके। अंत में, माँ सीता ने स्वयं रेत से शिवलिंग बनाकर स्थापित किया। भगवान राम ने इस शिवलिंग की पूजा की। इस शिवलिंग को रामनाथस्वामी कहा जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, जहाँ सती का कंधा गिरा, वहाँ पार्वतीदेवी का मंदिर स्थापित है।

भौगोलिक स्थिति

रामेश्वर मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में पम्बन द्वीप पर स्थित है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी छोर के निकट एक प्रायद्वीपीय स्थान है। रामेश्वर एक द्वीप है, जो पम्बन पुल द्वारा मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। यहाँ से श्रीलंका का उत्तरी तट दिखाई देता है। रामेश्वर मंदिर भारत के चार धामों में से एक है।

ऐतिहासिक महत्व

रामेश्वर मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, मंदिर का निर्माण पाँचवीं शताब्दी के आसपास आरंभ हुआ। वर्तमान मंदिर संरचना का अधिकांश भाग बारहवीं शताब्दी में पांड्य वंश के शासकों द्वारा निर्मित किया गया। चोल वंश और नायक वंश के शासकों ने भी मंदिर के विकास में योगदान दिया।

धार्मिक परंपरा एवं पूजा विधि

रामेश्वर मंदिर में प्रतिदिन छह पूजाएँ होती हैं। सबसे महत्वपूर्ण पूजा उषःकाल पूजा है। यहाँ की विशेष पूजा में रुद्राभिषेक, लघुरुद्रम् और शिव पुराण का पाठ शामिल है। मंदिर परिसर में अनेक पवित्र कुण्ड हैं — अग्नि तीर्थ, राम तीर्थ, गन्धमाधन तीर्थ और सीता कुण्ड प्रमुख हैं।

वार्षिक उत्सव एवं मेले

रामेश्वर मंदिर में सबसे प्रमुख उत्सव महाशिवरात्रि है। थाईपुसम, पङ्गुनी उत्सव और आरुद्रा दर्शन भी प्रमुख उत्सव हैं। अप्रैल-मई में ब्रह्मोत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है।

यात्रा मार्गदर्शन

रामेश्वरम रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर है। चेन्नई और मदुरई से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा मदुरई है। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च है।

निष्कर्ष

रामेश्वर शक्ति पीठ भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों के रूप में पूजनीय यह स्थान चार धामों में से एक है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

Body_part

सती का कंधा

— Pithanirnaya
Devi

पार्वतीदेवी

— Pithanirnaya
Bhairava

विश्वेश्वर

— Pithanirnaya
Location

रामनाथपुरम, तमिलनाडु

— Pithanirnaya
Dual_status

शक्ति पीठ एवं ज्योतिर्लिंग दोनों

— Hindu tradition
Ramayana_connection

भगवान राम द्वारा शिवलिंग स्थापना

— Ramayana
Char_dham

भारत के चार धामों में से एक

— Vaishnava tradition

मतभेद और टिप्पणी

रामेश्वर में सती के शरीर के अंग को लेकर कुछ मतभेद हैं। पिठानिर्णय में कंधा बताया गया है, जबकि कुछ परंपराओं में इसे दाहिना कंधा माना जाता है।

संपादकीय टिप्पणी:

यह सामग्री पिठानिर्णय ग्रंथ, शिवपुराण, रामायण और तमिलनाडु के ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर संकलित की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में पम्बन द्वीप पर, मदुरई से लगभग एक सौ सत्तर किलोमीटर दक्षिण में।

पिठानिर्णय ग्रंथ के अनुसार, सती के कंधे का खण्ड गिरा था।

भगवान राम ने लंका विजय के पूर्व यहाँ रेत से शिवलिंग बनाकर स्थापित किया था।

रुद्राभिषेक, लघुरुद्रम् और शिव पुराण का पाठ। पवित्र कुण्डों में स्नान का विशेष महत्व है।

अग्नि तीर्थ, राम तीर्थ, गन्धमाधन तीर्थ और सीता कुण्ड प्रमुख कुण्ड हैं।

रामेश्वरम रेलवे स्टेशन मंदिर से एक किलोमीटर दूर है। मदुरई में निकटतम हवाई अड्डा है।

रामेश्वर भारत के चार धामों में से एक है, बद्रीनाथ, द्वारका और पुरी के साथ।

स्रोत और संदर्भ

  • रामेश्वरम: धार्मिक अध्ययन — डॉ. एस. राधाकृष्णन , मदुरई विश्वविद्यालय
  • पांड्य वंश का इतिहास — न. सुब्बा राव , मद्रास विश्वविद्यालय
  • पिठानिर्णय ग्रंथ — अत्रि ऋषि , शैव परंपरा
  • शिवपुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
  • भारत के चार धाम — रामनाथ शर्मा , राष्ट्रीय साहित्य प्रकाशन
  • तमिलनाडु पर्यटन विभाग — तमिलनाडु सरकार , आधिकारिक पोर्टल [link]
  • वाल्मीकि रामायण — ऋषि वाल्मीकि , वैदिक साहित्य
  • देवी भागवत पुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य