गया शक्तिपीठ बिहार राज्य के प्रसिद्ध तीर्थ नगर गया में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, जब देवी सती का दायाँ टखना इस पवित्र भूमि पर गिरा, तब यहाँ सर्वशैला देवी का प्राकट्य हुआ। सर्वानंद भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं।
परिचय
गया शक्तिपीठ बिहार के प्रसिद्ध तीर्थ नगर गया में स्थित है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार यहाँ देवी सती का दायाँ टखना गिरा था, जिससे सर्वशैला देवी का प्राकट्य हुआ। गया नगर को पिंडदान और श्राद्ध के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह पीठ शक्ति उपासना के साथ-साथ वैष्णव परंपरा का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
गया शहर फल्गु नदी के तट पर स्थित है और यह हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के लिए पवित्र स्थान है। महाभिनिष्क्रमण कांड में गया के पवित्र स्थानों का विस्तृत वर्णन है। यहाँ विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर और अनेक अन्य धार्मिक स्थल स्थित हैं।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित होकर सती के शव को लेकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंगों को काटकर पृथ्वी पर गिराया।
पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, देवी सती का दायाँ टखना गया की इस पवित्र भूमि पर गिरा। जब दायाँ टखना यहाँ गिरा, तो उससे सर्वशैला देवी का प्राकट्य हुआ। सर्वशैला का अर्थ है सभी पर्वतों की स्वामिनी। यह नाम दर्शाता है कि देवी सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षक हैं।
गया महात्म्य में गया क्षेत्र की महिमा का विस्तृत वर्णन है। इस ग्रंथ के अनुसार गया में गिरे प्रत्येक अंग का अपना विशेष माहात्म्य है। देवी भागवत पुराण में भी शक्तिपीठों की महिमा का वर्णन मिलता है। गया क्षेत्र को पितृों की मुक्ति का स्थान भी माना जाता है।
भौगोलिक स्थिति
गया शक्तिपीठ बिहार राज्य के गया जिले में स्थित है। गया शहर फल्गु नदी के तट पर बसा है और यह पटना से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। गया समुद्र तल से लगभग 110 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
गया जंक्शन रेलवे स्टेशन भारत के अनेक प्रमुख नगरों से जुड़ा है। पटना का लोक नायक जयप्रकाश हवाई अड्डा गया से लगभग 110 किलोमीटर दूर है। गया में भी एक छोटा हवाई अड्डा है। दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से गया के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
ऐतिहासिक महत्व
गया शहर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। बुद्ध ने इस स्थान पर ज्ञान प्राप्त किया था और महाबोधि वृक्ष आज भी यहाँ स्थित है। पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि गया में मानव बस्ती अत्यंत प्राचीन काल से विद्यमान है। महाभिनिष्क्रमण कांड में गया का उल्लेख पवित्र तीर्थ के रूप में किया गया है।
गुप्तकाल और पालकाल में गया में अनेक मंदिरों और विहारों का निर्माण हुआ। मुगल काल में भी गया अपने धार्मिक महत्व को बनाए रखने में सफल रहा। ब्रिटिश काल में गया एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हुआ।
धार्मिक परंपरा
गया शक्तिपीठ में मां सर्वशैला देवी की पूजा होती है। सर्वानंद भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं। गया क्षेत्र में पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। महाभिनिष्क्रमण कांड में वर्णित विधि-विधान के अनुसार यहाँ श्राद्ध किया जाता है।
गया में वैष्णव और शाक्त दोनों परंपराओं का समन्वय दिखाई देता है। नवरात्रि, दीपावली और पितृ पक्ष यहाँ प्रमुख उत्सव हैं। विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिह्न की पूजा की जाती है।
वार्षिक उत्सव
गया में पितृ पक्ष सबसे प्रमुख उत्सव है जो भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक चलता है। इस अवधि में लाखों श्रद्धालु गया आकर पिंडदान करते हैं। गया को पिंडदान का सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता है।
नवरात्रि, दीपावली, महाशिवरात्रि और विष्णुपद मेला भी गया के प्रमुख उत्सव हैं। पूर्णिमा के दिन फल्गु नदी में स्नान का विशेष महत्व है। गया महात्म्य के अनुसार गया में श्राद्ध करने से पितृ मुक्त होते हैं।
यात्रा मार्गदर्शन
गया पहुँचने के लिए गया जंक्शन प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो भारत के अनेक नगरों से जुड़ा है। पटना का लोक नायक जयप्रकाश हवाई अड्डा निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा है। गया में भी एक छोटा हवाई अड्डा है जहाँ सीमित उड़ानें संचालित होती हैं।
गया शहर के भीतर ऑटो रिक्शा और टैक्सी के माध्यम से विभिन्न तीर्थ स्थलों तक पहुँचा जा सकता है। ठहरने के लिए अनेक धर्मशालाएँ, होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें।
विभिन्न परंपराओं में मतभेद
दायाँ टखना
— Pithanirnayaसर्वशैला
— Pithanirnayaसर्वानंद
— Pithanirnayaगया, बिहार
— Pithanirnayaपिंडदान और श्राद्ध का प्रमुख केंद्र
— Gaya Mahatmyaशाक्त और वैष्णव संयुक्त परंपरा
— Pithanirnayaमतभेद और टिप्पणी
गया शक्तिपीठ के संबंध में कुछ ग्रंथों में भिन्नता पाई जाती है। कुछ स्थानमालाओं में गया में अन्य शक्तिपीठों का भी उल्लेख है। शरीर अंग के संबंध में अधिकांश ग्रंथों में दायाँ टखना ही बताया गया है।
यह लेख पीठनिर्णय स्थानमाला, गया महात्म्य, देवी भागवत पुराण और महाभिनिष्क्रमण कांड पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गया शक्तिपीठ बिहार राज्य के गया शहर में फल्गु नदी के तट पर स्थित है।
गया महात्म्य के अनुसार गया में पिंडदान करने से पितृ मुक्त होते हैं। गया को पितृों की मुक्ति का सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता है।
इस पीठ पर मां सर्वशैला देवी की पूजा होती है जो सभी पर्वतों की स्वामिनी मानी जाती हैं।
पितृ पक्ष, नवरात्रि, दीपावली और महाशिवरात्रि गया के प्रमुख उत्सव हैं। पितृ पक्ष में लाखों श्रद्धालु पिंडदान के लिए आते हैं।
गया जंक्शन रेलवे स्टेशन प्रमुख है। पटना का लोक नायक जयप्रकाश हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। दिल्ली और कोलकाता से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
विष्णुपद मंदिर गया का एक प्रसिद्ध मंदिर है जहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न की पूजा की जाती है। यह गया के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
संबंधित शक्तिपीठ
स्रोत और संदर्भ
- गया: तीर्थ नगर का इतिहास , पटना विश्वविद्यालय
- गया के प्राचीन अभिलेख , भारतीय पुरातत्व विभाग
- पीठनिर्णय स्थानमाला — अत्रि
- गया महात्म्य
- बिहार पर्यटन
- देवी भागवत पुराण — वेद व्यास
- महाभिनिष्क्रमण कांड
- शिवपुराण — वेद व्यास