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ज्वालेश्वर शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Jvaleshwar Shakti Peeth — वाम नेत्र से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश राज्य के मंडी जिले में स्थित एक अत्यंत प्राचीन शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, जब देवी सती की बाईं आँख इस पवित्र स्थान पर गिरी, तब यहाँ नंदा देवी का प्राकट्य हुआ। वक्रतुंड भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं।

परिचय

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में व्यास नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार यहाँ देवी सती की बाईं आँख गिरी थी, जिससे नंदा देवी का प्राकट्य हुआ। ज्वालेश्वर का अर्थ है ज्वाला के स्वामी, जो भगवान शिव का एक रूप है।

मंडी को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहाँ 300 से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित हैं। ज्वालेश्वर मंदिर इनमें से एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह पीठ हिमाचली शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में देवी सती ने अग्नि में स्वयं को समर्पित किया, तब भगवान शिव अत्यंत व्याकुल हो गए। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंगों को काटा और वे पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे।

पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, देवी सती की बाईं आँख मंडी के इस स्थान पर गिरी। आँख देखने की शक्ति का प्रतीक है। नंदा देवी को सम्पूर्ण सृष्टि को देखने और उसकी रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। हिमाचली लोककथाओं में नंदा देवी की अनेक कथाएँ प्रचलित हैं।

शिवपुराण में हिमालय क्षेत्र के शक्तिपीठों का वर्णन है। कहा जाता है कि हिमालय देवी पार्वती का निवास स्थान है और यहाँ शक्ति उपासना का विशेष महत्व है।

भौगोलिक स्थिति

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है। मंडी व्यास और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित है। मंडी समुद्र तल से लगभग 760 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। मंडी को देवभूमि के नाम से जाना जाता है।

भुंतर हवाई अड्डा मंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। मंडी रेलवे स्टेशन शिमला-कालका रेल मार्ग पर स्थित है। दिल्ली से मंडी की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 450 किलोमीटर है।

ऐतिहासिक महत्व

मंडी का इतिहास प्राचीन मंडव राज्य से जुड़ा है। मंडव वंश के राजाओं ने इस क्षेत्र में अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया। मंडी को 300 से अधिक प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है।

सेन वंश और शास्त्री वंश के शासनकाल में भी इस क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ फली-फूलीं। ब्रिटिश काल में मंडी एक प्रमुख रियासत थी। ज्वालेश्वर मंदिर का वर्तमान स्वरूप इसी प्राचीन परंपरा का प्रतिबिंब है।

धार्मिक परंपरा

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ में मां नंदा देवी की पूजा होती है। वक्रतुंड भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं। हिमाचली शक्ति उपासना परंपरा में यह मंदिर अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमाचली संस्कृति में नंदा देवी की विशेष पूजा की परंपरा है। नंदा जात्रा मंडी का सबसे प्रसिद्ध उत्सव है।

वार्षिक उत्सव

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ में नंदा जात्रा सबसे प्रमुख उत्सव है। यह उत्सव हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मनाया जाता है। नंदा देवी की मूर्ति को शोभा यात्रा में नगर में घुमाया जाता है।

आश्विन नवरात्रि, महाशिवरात्रि और दीपावली भी यहाँ प्रमुख उत्सव हैं। हिमाचली संस्कृति के अनेक लोक उत्सव भी मंदिर परिसर में मनाए जाते हैं।

यात्रा मार्गदर्शन

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ पहुँचने के लिए मंडी निकटतम शहर है। भुंतर हवाई अड्डा लगभग 50 किलोमीटर दूर है। मंडी रेलवे स्टेशन शिमला-कालका रेल मार्ग पर स्थित है। दिल्ली से सीधी बसें उपलब्ध हैं।

मंडी में ठहरने के लिए अनेक होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। हिमाचल प्रदेश की अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा भी मंडी से आसान है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर के नियमों का पालन करें।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

Body_part

बाईं आँख

— Pithanirnaya
Devi_name

नंदा देवी

— Pithanirnaya
Bhairava_name

वक्रतुंड

— Pithanirnaya
Location

मंडी, हिमाचल प्रदेश

— Pithanirnaya
Significance

देवभूमि, 300+ प्राचीन मंदिर

— Historical
Name_meaning

ज्वालेश्वर = ज्वाला के स्वामी (शिव)

— Pithanirnaya

मतभेद और टिप्पणी

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ के संबंध में कुछ ग्रंथों में बाईं आँख के स्थान पर दाईं आँख का वर्णन भी मिलता है। मंडी क्षेत्र में अन्य शक्तिपीठों के साथ इसकी पहचान को लेकर भी कुछ भिन्नताएँ हैं।

संपादकीय टिप्पणी:

यह लेख पीठनिर्णय स्थानमाला, शिवपुराण और हिमाचली लोककथाओं पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्वालेश्वर शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में व्यास नदी के तट पर स्थित है।

ज्वालेश्वर का अर्थ है ज्वाला के स्वामी, जो भगवान शिव का एक रूप है।

पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार यहाँ देवी सती की बाईं आँख गिरी थी।

मंडी में 300 से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है।

भुंतर हवाई अड्डा लगभग 50 किलोमीटर दूर है। मंडी रेलवे स्टेशन शिमला-कालका मार्ग पर है। दिल्ली से सीधी बसें उपलब्ध हैं।

नंदा जात्रा मंडी का सबसे प्रसिद्ध उत्सव है जो चैत्र नवरात्रि में मनाया जाता है। इसमें नंदा देवी की शोभा यात्रा निकाली जाती है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • मंडी: देवभूमि के मंदिर , हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय
  • मंडव वंश के अभिलेख , भारतीय पुरातत्व विभाग
  • पीठनिर्णय स्थानमाला — अत्रि
  • शिवपुराण — वेद व्यास
  • हिमाचल प्रदेश पर्यटन
  • देवी भागवत पुराण — वेद व्यास
  • मार्कण्डेय पुराण