भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पी और ब्रह्मांड के निर्माता-वास्तुकार माना गया है। इन्हें देव शिल्पी या प्रजापति भी कहा जाता है। इस लेख में भगवान विश्वकर्मा पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, विश्वकर्मा पूजा (संक्रांति) और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

भगवान विश्वकर्मा का महत्व

परंपरा के अनुसार विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पकार हैं — इन्होंने देवों के भवन, रथ, शस्त्र और नगर बनाए। इन्हें सृष्टि का रचयिता और शिल्पकला का अधिदेव माना गया है। विश्वकर्मा पूजा प्रतिवर्ष कन्या संक्रांति (17 सितंबर, भाद्रपद मास) के दिन की जाती है, जब श्रमिक, कारीगर और उद्यमी अपने औजारों/यंत्रों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा से कार्य-क्षेत्र में सुख, समृद्धि और उन्नति मिलती है।

भगवान विश्वकर्मा पूजा कब करें?

  • कन्या संक्रांति: प्रतिवर्ष 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती/विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है।
  • कार्यशाला/उद्योग में: इस दिन कारखानों, कार्यशालाओं और घरों में औजारों व मशीनों की पूजा होती है।
  • अन्य शुभ दिन: नए कार्य या उद्यम के शुभारंभ पर भी विश्वकर्मा पूजन किया जा सकता है।

भगवान विश्वकर्मा पूजा की सामग्री

  • विश्वकर्मा जी की प्रतिमा/चित्र, लाल या पीला वस्त्र,
  • कलश, गंगाजल, आम के पत्ते, नारियल,
  • कुमकुम, रोली, गुलाल, अक्षत, चंदन,
  • फूल, पुष्पमाला, औजार/यंत्र (पूजन हेतु),
  • घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती, कपूर,
  • नैवेद्य: मिठाई, फल, लड्डू।

भगवान विश्वकर्मा पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

विश्वकर्मा पूजा के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कार्यस्थल/घर के पूजा स्थल को साफ करें और विश्वकर्मा जी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:

ॐ विश्वकर्मणे नमः पूजनं करिष्ये। ॐ गणं गणपतये नमः।

चरण 2 — कलश स्थापना एवं पूजन

कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल सहित स्थापित करें। विश्वकर्मा जी पर चंदन-कुमकुम का तिलक लगाएँ, गुलाल-अक्षत और पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ विश्वकर्मणे नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 3 — औजारों/यंत्रों की पूजा

विश्वकर्मा पूजा की मुख्य क्रिया — औजारों, मशीनों और कार्य-सामग्री की पूजा है। अपने कार्य के औजार/यंत्र साफ करके उन पर कुमकुम/गुलाल का तिलक लगाएँ, अक्षत-पुष्प चढ़ाएँ और धूप दिखाएँ:

ॐ श्री सृष्टनाय सर्वसिद्धाय विश्वकर्माय नमो नमः।

चरण 4 — विश्वकर्मा मंत्र का जाप

पूजन के बाद विश्वकर्मा मंत्र का जाप करें:

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

चरण 5 — आरती एवं प्रसाद

विश्वकर्मा जी की आरती करें और मिठाई का प्रसाद वितरण करें। कार्यक्षेत्र के सभी श्रमिक/कर्मचारियों को प्रसाद दें। श्रद्धा अनुसार विश्वकर्मा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य और श्रमिकों के सम्मान से उन्नति मिलती है।

भगवान विश्वकर्मा पूजा के नियम

  • औजारों/यंत्रों की पूजा करने से पहले उन्हें साफ करना आवश्यक माना गया है।
  • पूजा के दिन कार्य-स्थल की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • सात्विक नैवेद्य ही चढ़ाएँ; मांस-मदिरा वर्जित है।
  • मशीन/औजार पूजन के बाद उनका उपयोग शुभ माना गया है।
  • श्रमिकों, कारीगरों और मजदूरों का सम्मान एवं दान करें।
  • पूजा श्रद्धा और पूर्ण विधि-विधान से ही करें।