भगवान कुबेर को धन, वैभव और संपदा का देवता माना गया है। इन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष और उत्तर दिशा का दिक्पाल कहा जाता है। इस लेख में कुबेर देव पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, धनतेरस/दीपावली पर कुबेर पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

भगवान कुबेर का महत्व

परंपरा के अनुसार कुबेर अलकापुरी के स्वामी और धन के अधिपति माने जाते हैं। इन्हें यक्षराज तथा उत्तर दिशा का रक्षक (दिक्पाल) कहा गया है। धनतेरस और दीपावली के अवसर पर कुबेर पूजन का विशेष प्रचलन है — धन-समृद्धि की कामना से। मान्यता है कि विधिपूर्वक कुबेर पूजा से धन की प्राप्ति, धन की रक्षा और व्यापार में वृद्धि होती है। कुबेर जी का धन देवी लक्ष्मी के साथ मिलकर समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

भगवान कुबेर पूजा कब करें?

  • धनतेरस: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को कुबेर पूजन का विशेष विधान है।
  • दीपावली: लक्ष्मी पूजन के साथ कुबेर पूजन भी शुभ माना गया है।
  • धनतेरस सायंकाल: प्रदोष काल में कुबेर-लक्ष्मी पूजन किया जाता है।
  • गुरुवार/शुक्रवार: इन दिनों कुबेर पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।

भगवान कुबेर पूजा की सामग्री

  • कुबेर जी की प्रतिमा/चित्र, पीला वस्त्र,
  • चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत,
  • हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, दूर्वा,
  • पुष्प, जल, गंगाजल,
  • घी/तेल का दीपक, धूप, कपूर,
  • नैवेद्य: मिठाई, फल, खीर।

भगवान कुबेर पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

धनतेरस/दीपावली के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुबेर प्रतिमा/चित्र स्थापित करें — उत्तर दिशा कुबेर जी की दिशा मानी गई है। पूजा का संकल्प लें:

ॐ कुबेराय नमः पूजनं करिष्ये। ॐ गणं गणपतये नमः।

चरण 2 — पूजन एवं तिलक

कुबेर प्रतिमा पर चंदन का तिलक लगाएँ, अक्षत-पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ कुबेराय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 3 — कुबेर मंत्र का जाप

पूजन के बाद कुबेर मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें:

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।

चरण 4 — तिजोरी/धन स्थान का पूजन

धन-समृद्धि के स्थान (तिजोरी) का पूजन करें। तिजोरी पर कुमकुम का तिलक लगाएँ और हल्दी, धनिया, कमलगट्टा तथा दूर्वा रखें — मान्यता है कि इससे धन की प्राप्ति और रक्षा होती है। इसके बाद नैवेद्य अर्पित कर आरती करें:

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः।

चरण 5 — प्रसाद एवं दान

आरती के बाद प्रसाद वितरण करें। धनतेरस के दिन जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करना शुभ माना गया है — मान्यता है कि दान से धन की प्राप्ति में बाधा नहीं आती।

भगवान कुबेर पूजा के नियम

  • कुबेर प्रतिमा/चित्र उत्तर दिशा की ओर रखें।
  • पूजा में सात्विक नैवेद्य ही चढ़ाएँ; मांस-मदिरा वर्जित है।
  • धनतेरस/दीपावली के दिन किसी को खाली हाथ न लौटाएँ।
  • तिजोरी हमेशा साफ-सुथरी रखें और उत्तर/ईशान दिशा में रखें।
  • कुबेर मंत्र का जप चंदन की माला या कमलगट्टे की माला से करना शुभ माना गया है।
  • धन की प्राप्ति के साथ सदाचार और दान-पुण्य का भाव बनाए रखें।