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हिंदू व्रत सूची — सभी व्रत और उपवास

हिंदू धर्म में प्रचलित सभी प्रमुख व्रतों और उपवासों की विस्तृत सूची। प्रत्येक व्रत के बारे में तिथि, विधि, महत्व और संबंधित देवता की जानकारी।

मासिक व्रत

ये व्रत प्रत्येक हिंदू माह में आते हैं और नियमित रूप से किए जाते हैं।

मासिक

एकादशी व्रत

कब: प्रत्येक माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी (दो बार)
कुल: वर्ष में 24 एकादशियाँ
देवता: भगवान विष्णु

एकादशी व्रत विष्णु भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और उपवास किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार एकादशी का व्रत हजारों अश्वमेध यज्ञों के फल के बराबर है।

विशेष: प्रत्येक एकादशी का अलग नाम और महत्व है — जैसे मोक्षदा एकादशी, निर्जला एकादशी, पापमोचनी एकादशी आदि।

मासिक

प्रदोष व्रत

कब: प्रत्येक माह त्रयोदशी (13वें दिन) — शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष में
देवता: भगवान शिव

प्रदोष काल में शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और भाँग अर्पित की जाती है। प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। सोमवार को पड़ने वाली प्रदोष को सोम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष कहते हैं।

मासिक

संकष्टी चतुर्थी (गणेश चतुर्थी)

कब: प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष चतुर्थी (चौथा दिन)
देवता: भगवान गणेश

इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। उपवास रखकर दुर्वा की माला, दूर्वा, लड्डू और मोदक अर्पित किए जाते हैं। गणेश उपनिषद के अनुसार यह व्रत सभी बाधाओं को दूर करता है।

विशेष: शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

मासिक

मासिक पूर्णिमा व्रत

कब: प्रत्येक माह पूर्णिमा (15वाँ दिन, शुक्ल पक्ष)
देवता: ब्रह्मा, विष्णु, महेश — सभी देवता

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की उपासना की जाती है। स्नान, दान, व्रत और चंद्र देवता की पूजा का विशेष महत्व है। पौर्णिमा व्रत करने वाले को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

विशेष: श्रावण, कार्तिक, माघ और फाल्गुन पूर्णिमा का अलग महत्व है।

मासिक

मासिक अमावस्या व्रत

कब: प्रत्येक माह अमावस्या (अंतिम दिन, कृष्ण पक्ष)
देवता: पितर / पूर्वज

अमावस्या को पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। इस दिन तिल, जल और गाय को चारा दान का विशेष महत्व है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

विशेष: महालया (पितृ पक्ष) की अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण है।

एकादशी व्रत — प्रमुख एकादशियाँ

वर्ष में आने वाली प्रमुख एकादशियों की सूची और उनका महत्व।

शैषिरी एकादशी (कामदा)

चैत्र शुक्ल एकादशी — वर्ष की पहली एकादशी। सभी पापों से मुक्ति दिलाती है। चंद्रमा से संबंधित नक्षत्र श्रवण में पड़ती है।

वरुथिनी एकादशी

वैशाख शुक्ल एकादशी — वरुथिनी का अर्थ है रक्षा कवच प्रदान करने वाली। इस दिन भगवान विष्णु का विशेष ध्यान किया जाता है।

मोहिनी एकादशी

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी — मोहिनी रूप में भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को समान रूप से अमृत वितरित किया। सांसारिक मोह से मुक्ति का व्रत।

निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी — ग्रीष्म ऋतु में बिना जल पिए किया जाने वाला कठोर व्रत। भीष्म पितामह ने इसका विधान बताया।

शयनी एकादशी (पद्मा)

आषाढ़ शुक्ल एकादशी — भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। चातुर्मास व्रत की शुरुआत इसी दिन होती है।

कामिका एकादशी

श्रावण कृष्ण एकादशी — शिव और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है। ब्राह्मण भोज और दान का विशेष महत्व है।

अमलकी (आमला) एकादशी

श्रावण शुक्ल एकादशी — आमले के वृक्ष की पूजा की जाती है। इस दिन आमले का सेवन और दान करना शुभ माना जाता है।

परमा एकादशी (जया)

भाद्रपद शुक्ल एकादशी — इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की संयुक्त पूजा की जाती है।

वामन एकादशी

भाद्रपद कृष्ण एकादशी — भगवान वामन अवतार की स्मृति में। वामन भगवान की मूर्ति या चित्र की पूजा की जाती है।

इंदिरा एकादशी

आश्विन कृष्ण एकादशी — पितृ विसर्जन के दिन। पितरों की मुक्ति के लिए विशेष व्रत और श्राद्ध।

पापमोचनी एकादशी

आश्विन शुक्ल एकादशी — सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाने वाली। भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक किया जाता है।

रमा एकादशी

कार्तिक शुक्ल एकादशी — मार्गशीर्ष मास में। भगवान राम और सीता की पूजा। इस दिन पवित्र स्नान का विशेष महत्व है।

देवोत्थानी (प्रबोधिनी) एकादशी

कार्तिक शुक्ल एकादशी — भगवान विष्णु चातुर्मास की निद्रा से जागते हैं। तुलसी विवाह का आयोजन। शादी-विवाह की शुरुआत इसी दिन से होती है।

उत्पन्ना एकादशी

कार्तिक कृष्ण एकादशी — भगवान विष्णु के प्रबोधिनी एकादशी के अगले दिन। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी।

सफला एकादशी

पौष कृष्ण एकादशी — इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करने से सभी कार्य सफल होते हैं।

षट्तिला एकादशी

माघ कृष्ण एकादशी — छह प्रकार के तिलों का दान। इस दिन तिल से स्नान, तिल का भोजन और तिल का दान किया जाता है।

जया एकादशी

माघ शुक्ल एकादशी — विजय प्राप्ति का प्रतीक। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

विजया एकादशी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी — विजय प्राप्ति का पर्व। होली से पहले आने वाली यह एकादशी विशेष मानी जाती है।

आमलकी एकादशी

फाल्गुन शुक्ल एकादशी — होलाष्टक के बाद। आमले के वृक्ष की पूजा। गुरुवार को पड़ने पर गुरुवार एकादशी कहलाती है।

प्रदोष व्रत

हर माह त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला शिव भक्ति का व्रत।

सोम प्रदोष

सोमवार को पड़ने वाली प्रदोष — शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा। चंद्रमा और शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। शिवलिंग पर दूध और जल का अभिषेक विशेष फलदायी है।

शनि प्रदोष

शनिवार को पड़ने वाली प्रदोष — शनि दोष से मुक्ति का व्रत। शिव की पूजा के साथ-साथ शनि देव को तेल भी चढ़ाया जाता है।

बैल प्रदोष (नृत्य प्रदोष)

बुधवार को पड़ने वाली प्रदोष — शिव के नृत्य रूप की पूजा। बुध ग्रह की शांति के लिए विशेष।

गुरु प्रदोष

गुरुवार को पड़ने वाली प्रदोष — गुरु ग्रह की शांति और शिव कृपा का प्रतीक।

शुक्र प्रदोष

शुक्रवार को पड़ने वाली प्रदोष — शुक्र ग्रह की शांति और दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए।

मास शिवरात्रि

कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि। पूरी रात जागरण कर शिव की पूजा की जाती है। बिल्वपत्र, भाँग, धतूरा और जल से अभिषेक।

चतुर्थी व्रत

प्रत्येक माह चतुर्थी तिथि को पड़ने वाले गणेश व्रत।

संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष)

हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकट निवारण का व्रत। गणेश जी की विशेष पूजा, उपवास और दूर्वा अर्पण। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष)

हर माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी — विनायक (गणेश) की पूजा। नए कार्यों की शुरुआत और बाधा निवारण के लिए शुभ।

गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल)

भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी — गणेश जन्मोत्सव। 10 दिन का गणेश उत्सव। मूर्ति स्थापना, विशेष पूजा और विसर्जन।

पूर्णिमा और अमावस्या व्रत

प्रत्येक माह पड़ने वाले पूर्णिमा और अमावस्या के विशेष व्रत।

श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन)

श्रावण मास की पूर्णिमा — रक्षाबंधन का पर्व। बहन भाई के हाथ पर राखी बांधती है। इस दिन दान, स्नान और व्रत का विशेष महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली)

कार्तिक मास की पूर्णिमा — देव दीपावली। गंगा स्नान, दीपदान और विशेष पूजा। वाराणसी में देव दीपावली अत्यंत भव्य होती है।

माघ पूर्णिमा (माघी)

माघ मास की पूर्णिमा — स्नान, दान और उपवास। प्रयागराज में माघ मेले का आयोजन।

शिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी)

फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी — महाशिवरात्रि। साल में एक बार आने वाला सबसे बड़ा शिव व्रत। पूरी रात जागरण, 108 बार जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण।

हनुमान जयंती (चैत्र कृष्ण चतुर्दशी)

चैत्र मास की कृष्ण चतुर्दशी — हनुमान जन्मोत्सव। हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड और विशेष पूजा।

शिव व्रत

भगवान शिव को समर्पित प्रमुख व्रत।

वार्षिक

महाशिवरात्रि

कब: फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, चतुर्दशी (फरवरी/मार्च)
देवता: भगवान शिव

शिव भक्ति का सबसे बड़ा पर्व। 108 बार जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भाँग अर्पण। रात्रि जागरण, शिव पुराण का पाठ। महाशिवरात्रि पर उपवास से हजारों अश्वमेध यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है।

श्रावण सोमवार व्रत

श्रावण मास (जुलाई/अगस्त) में प्रत्येक सोमवार — शिव भक्ति का पर्व। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक। सोमवार व्रत कथा का पाठ।

सावन शिवरात्रि

श्रावण मास की कृष्ण चतुर्दशी — साल की सबसे महत्वपूर्ण मासिक शिवरात्रि। विशेष उपवास और जागरण।

त्रयोदशी श्राद्ध (श्रावण)

श्रावण मास की त्रयोदशी — शिव की पूजा और पितृ श्राद्ध।

विष्णु और कृष्ण व्रत

भगवान विष्णु के अवतारों को समर्पित व्रत।

वार्षिक

राम नवमी

कब: चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी (मार्च/अप्रैल)
देवता: भगवान राम

भगवान राम के जन्मोत्सव का पर्व। रामायण का पाठ, राम नाम कीर्तन, हनुमान चालीसा। अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में विशेष उत्सव।

वार्षिक

कृष्ण जन्माष्टमी

कब: भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष, अष्टमी (अगस्त/सितंबर)
देवता: भगवान कृष्ण

भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व। मथुरा, वृंदावन और द्वारका में अत्यंत भव्य उत्सव। दही हंडी, गोविंदा आला, रासलीला और महाआरती।

देवशयनी एकादशी (चतुर्मास व्रत)

आषाढ़ शुक्ल एकादशी — भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। चातुर्मास (4 माह) का व्रत शुरू। इस अवधि में विवाह, मुंडन और नए कार्य वर्जित।

देवोत्थानी एकादशी (प्रबोधिनी)

कार्तिक शुक्ल एकादशी — भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं। चातुर्मास का समापन। तुलसी विवाह, शादी-विवाह का मुहूर्त।

गोपाष्टमी

कार्तिक शुक्ल अष्टमी — गौ माता की पूजा। गाय को चारा, गोबर से दीपक बनाना और कृष्ण-बलराम की पूजा।

देवी और शक्ति व्रत

माँ दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती और अन्य देवियों को समर्पित व्रत।

वार्षिक

दुर्गा पूजा / दशहरा

कब: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी से विजयादशमी
देवता: माँ दुर्गा

शारदीय नवरात्रि का परिणाम — माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। 10 दिन पूजा, विशेष उपवास, सिंदूर खेला, दुर्गा सप्तशती पाठ। विजयादशमी पर शस्त्र पूजा।

वार्षिक

दीपावली / लक्ष्मी पूजन

कब: कार्तिक मास, अमावस्या (अक्टूबर/नवंबर)
देवता: माँ लक्ष्मी, गणेश, कुबेर

दीपों का पर्व — अंधकार पर प्रकाश की विजय। लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान, पटाखे, मिठाइयाँ। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक पाँच दिन का उत्सव।

तेजस्वी पूर्णिमा (सरस्वती पूजा)

अश्विन शुक्ल पंचमी — विद्या की देवी सरस्वती की पूजा। विद्यार्थी, संगीतकार और कलाकार विशेष पूजा करते हैं।

अष्टमी व्रत (मासिक)

प्रत्येक माह कृष्ण अष्टमी — दुर्गा अष्टमी या मंगला गौरी व्रत। महिलाओं द्वारा पुत्र प्राप्ति और सौभाग्य के लिए किया जाता है।

सरस्वती पूजन (वसंत पंचमी)

माघ शुक्ल पंचमी — वसंत पंचमी। पीले वस्त्र, पीला भोजन, वीणा और पुस्तकों की पूजा। नए शिक्षा कार्य की शुरुआत।

काली पूजन (काली चतुर्दशी)

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी — दीपावली के अगले दिन। माँ काली की विशेष पूजा, तांत्रिक साधना।

सूर्य व्रत

भगवान सूर्य को समर्पित व्रत — रविवार और विशेष तिथि पर किए जाते हैं।

वार्षिक

छठ पूजा (सूर्य षष्ठी)

कब: कार्तिक शुक्ल षष्ठी (दीपावली के छठे दिन, अक्टूबर/नवंबर)
देवता: भगवान सूर्य और छठी मैया

बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल का महापर्व। 36 घंटे का निर्जला उपवास, सूर्य को अर्घ्य (उगते और डूबते सूर्य को जल), सप्ताहिक अर्घ्य।

सूर्याष्टक व्रत

वैशाख मास में सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से शुरू — 12 सोमवार (12 दिन) सूर्य की उपासना। सूर्य नमस्कार, जल में कुमकुम और चावल डालकर अर्घ्य।

रविवार व्रत

हर रविवार — सूर्योपासना का विशेष दिन। पीले वस्त्र, तिल का दान, सूर्य मंत्रों का जाप, सूर्य को जल अर्घ्य। सूर्यास्त से पहले भोजन।

मकर संक्रांति व्रत

पौष मास, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (14 जनवरी) — सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश। तिल, गुड़, खिचड़ी का दान। स्नान, दान और सूर्य पूजा।

गया सूर्य स्थान पूजा

विशेष सूर्य उपासना — गया में सूर्य स्थान मंदिर में। पितृ श्राद्ध और सूर्य पूजा का संयोजन।

ऋतु और मास व्रत

वर्ष के विभिन्न माहों और ऋतुओं में पड़ने वाले विशेष व्रत।

लोहड़ी

माघ मास, शुक्ल पंचमी (13 जनवरी) — मकर संक्रांति से एक दिन पहले। अग्नि देवता की पूजा, तिल, गुड़, मूंगफली का दान। शीत ऋतु का सम्मान।

बसंत पंचमी

माघ शुक्ल पंचमी (जनवरी/फरवरी) — वसंत ऋतु का आगमन। सरस्वती पूजा, ज्ञान और कला का उत्सव। पीले वस्त्र और पीला भोजन।

शिवरात्रि (फाल्गुन)

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — वर्ष की सबसे बड़ी शिवरात्रि। पूरी रात जागरण, 108 बार जलाभिषेक, बेलपत्र, भाँग, धतूरा।

होली (फाल्गुन पूर्णिमा)

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (मार्च) — रंगों का पर्व। होलिका दहन, रंग खेलना। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक।

हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया)

श्रावण मास, शुक्ल तृतीया — महिलाओं का प्रमुख व्रत। सोलह श्रृंगार, हरे वस्त्र, मेहंदी लगाना। पार्वती और शिव की पूजा। सुहाग की रक्षा के लिए व्रत।

कजरी तीज (भाद्रपद कृष्ण तृतीया)

भाद्रपद मास, कृष्ण तृतीया — महिलाओं द्वारा सुहाग की रक्षा के लिए किया जाने वाला व्रत। कजरी (कच्चा आम) का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी)

श्रावण मास, शुक्ल पंचमी — नाग देवता की पूजा। नाग मंदिरों में विशेष पूजा, दूध चढ़ाना, नाग मंत्रों का जाप।

पौष मास कृष्ण एकादशी (सफला)

पौष मास की कृष्ण एकादशी — सभी कार्यों में सफलता प्रदान करने वाली।

मकर संक्रांति

पौष मास, शुक्ल पंचमी (14 जनवरी) — सूर्य का मकर राशि में प्रवेश। उत्तरायण की शुरुआत। तिल, गुड़, खिचड़ी का दान।

नारी व्रत

महिलाओं द्वारा सुहाग, पुत्र और परिवार की कल्याण के लिए किए जाने वाले विशेष व्रत।

वार्षिक

करवा चौथ

कब: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर/नवंबर)
देवता: शिव-पार्वती, गणेश, करवा माता

सुहागिन महिलाओं का सबसे प्रसिद्ध व्रत। पूरे दिन निर्जला उपवास, चंद्रमा को अर्घ्य, करवा कथा सुनना। पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना।

वार्षिक

हरतालिका तीज

कब: भाद्रपद शुक्ल तृतीया (अगस्त/सितंबर)
देवता: पार्वती और शिव

हरतालिका का अर्थ है "हरे वन में ले जाना"। 36 घंटे का निर्जला उपवास। महिलाएँ हरे वन (वन) में जाकर पूजा करती हैं। पार्वती ने इस व्रत से शिव को पति के रूप में प्राप्त किया।

अहोई अष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी — पुत्र की सुख-समृद्धि के लिए माताओं द्वारा किया जाने वाला व्रत। अहोई माता की पूजा, स्याहू (सिंदूर) से अहोई बनाना।

मंगला गौरी व्रत

श्रावण मास में मंगलवार — मंगला गौरी (पार्वती) की पूजा। सोलह श्रृंगार, हरे वस्त्र, दूध से अभिषेक। सुहाग की रक्षा और दीर्घायु की कामना।

गौरी व्रत (तीन मंगलवार)

श्रावण मास में लगातार तीन मंगलवार — गौरी माता की विशेष पूजा। बेटियों के सुहाग की कामना।

सत्यनारायण व्रत (पूर्णिमा)

प्रत्येक पूर्णिमा — सत्यनारायण भगवान की पूजा, व्रत कथा पाठ, प्रसाद। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए।

गोमती एकादशी

गोमती नदी (या किसी पवित्र नदी) के तट पर की जाने वाली एकादशी। स्नान, दान और विष्णु पूजा।

विशेष व्रत

अन्य प्रमुख व्रत और उपवास जो विशेष अवसरों पर किए जाते हैं।

महावरुण व्रत (सामुद्रिक मंत्र)

ज्येष्ठ मास — वरुण देवता की पूजा। जल से संबंधित रोगों की शांति और वर्षा की कामना।

अक्षय तृतीया

वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल/मई) — स्मृति तिथि। इस दिन किया गया पुण्य अक्षय (नाश रहित) रहता है। सोने की खरीददारी, विवाह, नई शुरुआत।

गंगा दशहरा

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी — गंगा नदी के प्रकट होने का उत्सव। गंगा स्नान, दान, व्रत।

शीतला सातम

चैत्र कृष्ष्ण सप्तमी — शीतला माता की पूजा। ठंडा भोजन (बासी खाना) खाकर व्रत। चेचक और सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए।

पीपल प्रदोष व्रत

पीपल वृक्ष की पूजा प्रदोष काल में — पितृ दोष निवारण, संतान प्राप्ति और रोग मुक्ति के लिए।

सूर्य ग्रहण व्रत

सूर्य ग्रहण के समय — ग्रहण से पहले स्नान, उपवास, मंत्र जाप। ग्रहण काल में भोजन नहीं किया जाता। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान।

चंद्र ग्रहण व्रत

चंद्र ग्रहण के समय — उपवास, मंत्र जाप, शिवलिंग पर जल अर्पण। ग्रहण के दौरान भोजन वर्जित।

गणेश विसर्जन व्रत

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — 10 दिन के गणेशोत्सव का समापन। विसर्जन के दिन विशेष पूजा, आरती और गणपति बप्पा मोरया कीर्तन।

अनंत चतुर्दशी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — गणेश विसर्जन के साथ। अनंत भगवान (शेषनाग) की पूजा, अनंत सूत्र बांधना।

पितृ पक्ष श्राद्ध

भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या (16 दिन) — पितरों का श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान। महालया पर विशेष श्राद्ध।

आदित्य पूजा (सूर्य नमस्कार)

प्रत्येक सूर्योदय काल — 108 बार सूर्य नमस्कार, गायत्री मंत्र, सूर्य अष्टाध्यायी।

📌 व्रत और उपवास के सामान्य नियम

1. संकल्प: व्रत से पहले संकल्प करें — किस व्रत को कर रहे हैं, किस देवता के लिए, किस कामना से।
2. स्नान: व्रत के दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पवित्र स्थान पर बैठकर पूजा करें।
3. आहार: सात्विक आहार (फल, मेवा, दूध, शहद) या निर्जला उपवास — अपनी क्षमतानुसार।
4. पूजा: संबंधित देवता की मूर्ति या चित्र की पूजा, मंत्र जाप, कथा पाठ।
5. दान: व्रत के पश्चात दान अवश्य करें — अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा।
6. पारण: व्रत समाप्ति पर पारण (भोजन) — विशेष नियम व्रत के अनुसार।