दीप प्रज्वलन किसी भी पूजा, आरती या शुभ कार्य के आरंभ में दीपक जलाने की सरल परंतु महत्वपूर्ण वैदिक विधि है। हिंदू धर्म में दीपक को ज्ञान, प्रकाश और परब्रह्म का स्वरूप माना गया है। इस लेख में दीप प्रज्वलन की विधि, मंत्र, महत्व और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

दीप प्रज्वलन का महत्व

दीपक को अग्नि देव का रूप और ज्ञान-प्रकाश का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि पूजा में दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अंधकार (अज्ञान) का नाश होता है। प्रातः और संध्या दोनों समय दीप प्रज्वलन करने का विशेष महत्व बताया गया है। संध्या के समय घर में दीपक जलाने से घर के वातावरण में शांति और शुभता आती है — ऐसी मान्यता है। दीप को साक्षात परब्रह्म और भगवान जनार्दन का रूप माना गया है।

दीप प्रज्वलन कब करें?

  • प्रातः काल — पूजा-पाठ के आरंभ में।
  • संध्या काल — सूर्यास्त के समय घर में।
  • पूजा, आरती और हवन के आरंभ में।
  • शुभ कार्यों और त्योहारों पर।
  • दीपावली जैसे पर्वों पर विशेष रूप से।

दीप प्रज्वलन की सामग्री

  • दीपक (मिट्टी, पीतल या तांबे का),
  • घी या तेल (सरसों का तेल),
  • बाती (कपास की),
  • कपूर (आरती के लिए),
  • रोली, अक्षत (पूजन के लिए)।

दीप प्रज्वलन विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — दीपक की तैयारी

दीपक को स्वच्छ करें। उसमें घी या तेल भरें और बाती (कपास की सलाई) रखें। दीपक की बाती की ओर पूर्व दिशा करें।

चरण 2 — दीप प्रज्वलन मंत्र

दीपक को देवता के सम्मुख प्रज्वलित करते हुए दीप मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते॥
दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोस्तुते॥

इस मंत्र का अर्थ है — जो शुभ करता है, कल्याण करता है, रोगों का नाश कर आरोग्य और धन-संपत्ति प्रदान करता है तथा शत्रुओं की बुरी बुद्धि का विनाश करता है, ऐसे दीप की ज्योति को नमस्कार है। दीप ज्योति परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है, जो पापों का नाश करती है।

चरण 3 — आरती एवं कपूर

दीपक को देवता के सम्मुख तीन बार या उससे अधिक बार घुमाकर आरती करें। फिर दीपक में कपूर रखकर जलाएं और कपूर की आरती करें। घंटी बजाते हुए मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ अग्नये नमः दीपं समर्पयामि।

चरण 4 — दीपक की स्थापना

दीपक को पूजा स्थल, मंदिर या घर के मुख्य द्वार के सम्मुख रखें। घर के मुखिया द्वारा दीप प्रज्वलन करना शुभ माना गया है। दीपक सदा पूर्व या पूजा स्थल की ओर मुख करके जलाएं।

चरण 5 — दर्शन

दीप प्रज्वलन के बाद देवता के दर्शन करें और श्रद्धा से प्रणाम करें। दीपक जलता रहने तक पूजा स्थल को पवित्र बनाए रखें।

दीप प्रज्वलन के नियम

  • दीपक सदा स्वच्छ स्थान पर जलाएं।
  • प्रातः और संध्या दोनों समय दीप प्रज्वलन का विशेष महत्व है।
  • दीपक घी या तेल में कम से कम दो बातियों वाला रखें — कुछ परंपराओं में सात या ग्यारह बातियों वाला दीपक शुभ माना गया है।
  • दीपक बुझ जाए तो पुनः स्वच्छ करके जलाएं।
  • दीपक को देवता के सम्मुख या दाईं ओर रखें।
  • दीप प्रज्वलन के बाद देवता के दर्शन करें।
  • दीपक का तेल कभी खाली न होने दें — प्रतिदिन भरते रहें।

दीप प्रज्वलन प्रत्येक पूजा का आरंभिक अंग है। संपूर्ण पूजा-आरंभ विधि के लिए कलश स्थापना विधि और पूजा की समग्र सामग्री के लिए पूजा सामग्री की सूची भी देखें।