संतोषी माता पूजा का विशेष महत्व संतोष की देवी के रूप में है। माता संतोषी को भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है और इनकी पूजा विशेषकर शुक्रवार को की जाती है। इस लेख में संतोषी माता पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, कथा और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।
संतोषी माता का महत्व
परंपरा के अनुसार संतोषी माता का जन्म माता पार्वती की कन्या के रूप में माना गया है और इन्हें भगवान गणेश की पुत्री कहा जाता है। "संतोष" का अर्थ ही है संतुष्टि — माना जाता है कि माता संतोषी की पूजा से मन में संतोष आता है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। शुक्रवार को विधिवत पूजा और व्रत करने से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है।
संतोषी माता की पूजा कब करें?
- शुक्रवार: संतोषी माता का प्रमुख व्रत एवं पूजन दिवस।
- व्रत-पूजन: सोलह शुक्रवार का व्रत पूर्ण करने का प्रचलन है।
- किसी भी शुभ दिन: श्रद्धा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
संतोषी माता पूजा की सामग्री
- संतोषी माता की मूर्ति/चित्र, आसन,
- लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी,
- अक्षत, चंदन, पुष्प, गुड़-चना,
- नैवेद्य — बेसन के लड्डू (व्रत में), फल, मिश्री,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, शुद्ध जल।
संतोषी माता पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
शुक्रवार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर माता की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। व्रत-पूजन का संकल्प करें:
संतोषीमातापूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
माता संतोषी भगवान गणेश की पुत्री मानी जाती हैं, इसलिए पूजन के आरंभ में गणेश जी का स्मरण आवश्यक माना गया है:
चरण 3 — संतोषी माता का ध्यान-पूजन
माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 4 — गुड़-चना अर्पण
माता संतोषी को गुड़ और चना का नैवेद्य अर्पण करना विशेष प्रचलित है। साथ ही लाल पुष्प और सिंदूर चढ़ाएँ।
चरण 5 — देवी का मंत्र जप
चरण 6 — कथा पाठ एवं आरती
व्रत कथा (संतोषी माता व्रत कथा) का पाठ करें। संतोषी माता चालीसा का पाठ और माता की आरती — जय संतोषी माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
संतोषी माता व्रत के नियम
- शुक्रवार व्रत में दिन में एक समय सात्विक भोजन किया जाता है।
- व्रत के दिन माता को गुड़-चना अर्पण करना प्रचलित है।
- संकल्प के अनुसार सोलह शुक्रवार तक नियमित पूजा करें।
- व्रत पूर्ण होने पर उद्यापन (संपूर्णता की पूजा) करें।
- किसी पर अत्यधिक क्रोध या दुख का कारण न बनें — संतोष का पालन करें।