कन्या पूजन का विशेष महत्व नवरात्रि के दौरान नौ कन्याओं के रूप में देवी के पूजन के रूप में है। माना जाता है कि नौ देवी रूपों — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — के प्रतीक स्वरूप कन्याओं की पूजा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं। इस लेख में कन्या पूजन की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, नियम और लाभ सरल भाषा में दिए गए हैं।

कन्या पूजन का महत्व

परंपरा में कन्या पूजन (कन्यादान-पूजन) को देवी की प्रत्यक्ष उपासना माना गया है। नवरात्रि में नौ कन्याओं का पूजन — जिन्हें नवदुर्गा का रूप माना जाता है — करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा होती है। पुरुष भी कन्याओं को देवी रूप मानकर पूजन कर सकते हैं। कन्या पूजन से धन, समृद्धि, आयु और मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है। नवरात्रि में अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है।

कन्या पूजन कब करें?

  • नवरात्रि अष्टमी: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर कन्या पूजन।
  • नवरात्रि नवमी: नवमी को भी नौ कन्याओं का पूजन प्रचलित है।
  • चैत्र नवरात्रि: वसंत नवरात्रि में भी कन्या पूजन किया जाता है।
  • किसी भी शुभ दिन: श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।

कन्या पूजन की सामग्री

  • लाल वस्त्र/चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प,
  • नौ कन्याओं हेतु नैवेद्य — पूड़ी, हलवा, चना, फल, मिठाई,
  • दक्षिणा (रुपये), गुड़-चना, मौली,
  • आसन (नौ आसन), पात्र/थाली,
  • धूप, दीप, कपूर, शुद्ध जल।

कन्या पूजन विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर साफ वस्त्र बिछाकर नौ आसन लगाएँ। पूजन का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा दुर्गादेवीप्रीत्यर्थं
नवकन्यापूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — कन्याओं का आसन-स्वागत

नवरात्रि में दो से दस वर्ष तक की नौ कन्याएँ देवी के रूप में पूजी जाती हैं। कन्याओं को आसन पर बिठाकर पाद्य (पैर धोना) प्रक्रिया करें। प्रत्येक कन्या के चरण धोकर पूजन करें। मान्यता के अनुसार दस वर्ष से अधिक आयु की स्त्रियों को पार्वती रूप में भी पूजा जा सकता है।

चरण 4 — कन्याओं का पूजन

प्रत्येक कन्या के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक करें, मौली बाँधें, चंदन और कुमकुम लगाएँ, फूल पहनाएँ। पूजन के समय यह मंत्र बोलें:

कुमारीः पूजयाम्येता देवीरूपं प्रपूजयन्।
प्रीतिमुत्पादयन्ति च मनोवाञ्च्छा सफलं कुरु॥

चरण 5 — भोग अर्पण एवं दक्षिणा

कन्याओं को पूड़ी-हलवा, चना, फल और मिठाई का भोजन कराएँ। भोजन के बाद प्रत्येक कन्या को दक्षिणा (श्रद्धानुसार रुपये) और गुड़-चना अर्पण करें। कन्याओं से आशीर्वाद लें।

चरण 6 — आरती एवं समापन

कन्या पूजन के बाद देवी की आरती करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

कन्या पूजन के नियम

  • नवरात्रि में कन्या पूजन के समय कन्याएँ उपवासी रह सकती हैं — श्रद्धानुसार निर्णय करें।
  • कन्याओं का सम्मान एवं स्नेहपूर्ण व्यवहार करें — उन्हें देवी रूप में समझें।
  • पूड़ी-हलवा-चना का भोग नवरात्रि में प्रचलित है।
  • पूजन के बाद घर के अन्य सदस्य प्रसाद ग्रहण करें।
  • कन्याओं की किसी भी प्रकार की अवहेलना न करें।

कन्या पूजन के लाभ

  • माँ दुर्गा की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • परिवार में धन-समृद्धि एवं सुख-शांति बढ़ती है।
  • संतान-सुख एवं आयुष्य में वृद्धि की मान्यता है।
  • मनोकामनाओं की पूर्ति का फल माना गया है।
  • समाज में कन्या-सम्मान की भावना को बढ़ावा मिलता है।