जय संतोषी माता माँ संतोषी की प्रसिद्ध आरती है, जो शुक्रवार व्रत के साथ विशेष रूप से की जाती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।
जय संतोषी माता — आरती का महत्व
माँ संतोषी को गुड़ और चना अत्यंत प्रिय हैं। संतोषी माता व्रत (शुक्रवार) के साथ इस आरती का विशेष प्रचलन है। इसमें माता के सिंहासन, गेरू लाल छटा और सेवकों को सुख-संपत्ति देने वाले स्वरूप का वर्णन है।
आरती
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता ।अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता ।। 1 ।। जय संतोषी माता ||
सुन्दर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो ।हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ।। 2 ।। जय संतोषी माता ||
गेरू लाल छटा छबि, बदन कमल सोहे ।मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे ।। 3 ।। जय संतोषी माता ||
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर दुरे प्यारे ।धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे ।। 4 ।। जय संतोषी माता ||
गुड़ अरु चना परम प्रिय, तामें संतोष कियो ।संतोषी केहलाई, भक्तन विभव दियो ।। 5 ।। जय संतोषी माता ||
शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही ।भक्त मंडली छाई, कथा सुनत मोही ।। 6 ।। जय संतोषी माता ||
मंदिर जग मग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई ।विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ।। 7 ।। जय संतोषी माता ||
भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै ।जो मन बसे हमारे, इच्छित फल दीजै ।। 8 ।। जय संतोषी माता ||
दुखी दारिद्री रोगी, संकट मुक्त किए ।बहु धन धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ।। 9 ।। जय संतोषी माता ||
ध्यान धरे जो तेरा, वांछित फल पायो ।पूजा कथा श्रवण कर, घर आनन्द आयो ।। 10 ।। जय संतोषी माता ||
शरण गहे की लज्जा, रखियो जगदम्बे ।संकट तूही निवारे, दयामयी अम्बे ।। 11 ।। जय संतोषी माता ||
सन्तोषी माँ की आरती, जो कोई जन गावे ।रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति, जी भर के पावे ।। 12 ।। जय संतोषी माता ||
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता ।अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता ।। जय जय संतोषी माता ||
सुन्दर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो ।हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ।। 2 ।। जय संतोषी माता ||
गेरू लाल छटा छबि, बदन कमल सोहे ।मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे ।। 3 ।। जय संतोषी माता ||
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर दुरे प्यारे ।धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे ।। 4 ।। जय संतोषी माता ||
गुड़ अरु चना परम प्रिय, तामें संतोष कियो ।संतोषी केहलाई, भक्तन विभव दियो ।। 5 ।। जय संतोषी माता ||
शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही ।भक्त मंडली छाई, कथा सुनत मोही ।। 6 ।। जय संतोषी माता ||
मंदिर जग मग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई ।विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ।। 7 ।। जय संतोषी माता ||
भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै ।जो मन बसे हमारे, इच्छित फल दीजै ।। 8 ।। जय संतोषी माता ||
दुखी दारिद्री रोगी, संकट मुक्त किए ।बहु धन धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ।। 9 ।। जय संतोषी माता ||
ध्यान धरे जो तेरा, वांछित फल पायो ।पूजा कथा श्रवण कर, घर आनन्द आयो ।। 10 ।। जय संतोषी माता ||
शरण गहे की लज्जा, रखियो जगदम्बे ।संकट तूही निवारे, दयामयी अम्बे ।। 11 ।। जय संतोषी माता ||
सन्तोषी माँ की आरती, जो कोई जन गावे ।रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति, जी भर के पावे ।। 12 ।। जय संतोषी माता ||
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता ।अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता ।। जय जय संतोषी माता ||
आरती का समय
प्रतिदिन, विशेषतः शुक्रवार को
आरती विधि
शुक्रवार को व्रत रखकर संतोषी माता की मूर्ति के समक्ष गुड़ और चने का भोग लगाकर दीपक जलाकर आरती करें।
संदर्भ: भक्ति निधि — bhaktinidhi.com
लाभ
मनोकामना पूर्ति।
संकट से मुक्ति।
घर में सुख-समृद्धि।