माता लक्ष्मी को धन, वैभव, अन्न और समृद्धि की देवी माना गया है। लक्ष्मी की पूजा भारतीय घरों में सर्वाधिक प्रचलित देवी-पूजाओं में से एक है — विशेषकर दीपावली, धनतेरस, कोजागरी और वरलक्ष्मी जैसे अवसरों पर। इस लेख में लक्ष्मी पूजा की सरल व क्रमबद्ध विधि, सामग्री, ध्यान, मंत्र और नियम दिए गए हैं।

माँ लक्ष्मी से जुड़ी विशेष पूजाओं — दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि, धनतेरस लक्ष्मी पूजा विधि, कोजागरी लक्ष्मी पूजा विधि, वरलक्ष्मी पूजा विधि, महालक्ष्मी पूजा विधि और लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — के अलग-अलग पृष्ठ हैं। ध्यान रखें — क्षेत्रीय पद्धति में विधि का क्रम थोड़ा अलग हो सकता है।

लक्ष्मी पूजा का महत्व

परंपरा में माँ लक्ष्मी को विष्णु की अर्धांगिनी और समृद्धि की देवी माना गया है। लक्ष्मी की पूजा से अन्न, धन और वैभव की वृद्धि की भावना जुड़ी है। साथ ही लक्ष्मी को स्थिरता और नियम-पालन की देवी भी माना गया है — पूजा का मूल श्रद्धा, स्वच्छता और सद्व्यवहार है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ समय

  • दीपावली: कार्तिक अमावस्या की रात्रि — दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि देखें।
  • धनतेरस: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी।
  • कोजागरी: आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा)।
  • वरलक्ष्मी: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष का शुक्रवार।
  • शुक्रवार: लक्ष्मी पूजा का प्रचलित साप्ताहिक दिन।

लक्ष्मी पूजा की सामग्री

  • माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र (कमल पर विराजमान),
  • पीला/लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
  • कमल के फूल (सूखे/कृत्रिम भी चलते हैं), पुष्प,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — खीर, हलवा, मिश्री, फल, नारियल, पंचमेवा,
  • सिक्के, अनाज/जौ, आसन, पूजा की थाली।

लक्ष्मी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान, शुद्धिकरण एवं आचमन

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल और बर्तनों की सफाई करें। प्रचलित आचमन-क्रम:

ॐ केशवाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — संकल्प

पूजा का संकल्प करें। सामान्य प्रारूप: "मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीलक्ष्मीप्रीत्यर्थं … पूजनं करिष्ये।" संकल्प में 'अमुक' स्थानों पर तिथि, नाम आदि की जानकारी भरें।

चरण 4 — लक्ष्मी का ध्यान

प्रचलित लक्ष्मी ध्यान:

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिमकरां लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

यह श्री सूक्त का आरंभिक श्लोक है — पूरा श्री सूक्त का पाठ भी प्रचलित है।

चरण 5 — आवाहन एवं उपचार-अर्पण

ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः आसनं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः गन्धं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः पुष्पं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः प्रदक्षिणा-नमस्कारं समर्पयामि।

चरण 6 — लक्ष्मी मंत्र जप

ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः।
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुपत्न्यै धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

उपर्युक्त लक्ष्मी गायत्री के कुछ क्षेत्रीय संस्करणों में पद-क्रम थोड़ा भिन्न मिलता है।

चरण 7 — लक्ष्मी चालीसा पाठ

पूजा के बाद लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।

चरण 8 — आरती

पूजा के अंत में माँ लक्ष्मी की आरती करें — ॐ जय लक्ष्मी माता

चरण 9 — पुष्पांजलि एवं क्षमा-प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

लक्ष्मी पूजा के नियम

  • लक्ष्मी पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें — स्थान, वस्त्र और नैवेद्य साफ रखें।
  • पूजा स्थल पर पूर्व-दिशा की ओर मुख करके बैठने की परंपरा है।
  • खीर, हलवा, मिश्री और पंचमेवा लक्ष्मी के प्रचलित प्रसाद हैं।
  • लक्ष्मी-पूजा में सिक्के/अन्न का अर्पण भी प्रचलित है — यह समृद्धि का भाव है।
  • पूजा के दिन वाणी में शांति और विनम्रता रखें।

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