नरक चतुर्दशी (काली चौदस) कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर संसार को भय मुक्त किया था। इस दिन यमराज, श्रीकृष्ण और हनुमान जी की पूजा तथा प्रातः अभ्यंग स्नान का विशेष विधान है। इस लेख में नरक चतुर्दशी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र और नियम बताए गए हैं।
नरक चतुर्दशी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस नरकासुर ने देवी की पूजा करने वालों और स्त्रियों को कष्ट दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया और उसके कारावास से सोलह हजार स्त्रियों को मुक्त कराया। इस विजय के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा और अभ्यंग स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और भक्त को यमलोक की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
नरक चतुर्दशी कब मनाई जाती है?
- नरक चतुर्दशी: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (दीपावली के एक दिन पूर्व)।
- पूजा समय: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में अभ्यंग स्नान तथा संध्या के बाद यमराज एवं देवताओं का पूजन।
नरक चतुर्दशी पूजा की सामग्री
- तिल एवं तिल का तेल, नीम की पत्तियाँ,
- गंगाजल, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल,
- दीपक, कपूर, मिट्टी के 13 दीपक,
- गुड़, मूंग, नैवेद्य (मिठाई),
- सिंदूर, काजल, पूजा-थाली, गौरी-गणेश की प्रतिमा (वैकल्पिक)।
नरक चतुर्दशी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — प्रातः अभ्यंग स्नान
नरक चतुर्दशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाकर मालिश करें और गंगाजल मिले जल से स्नान करें। मान्यता है कि सूर्योदय से पूर्व किया गया यह स्नान अकाल मृत्यु के भय से मुक्त करता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
चरण 2 — संकल्प
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके व्रत-पूजन का संकल्प लें:
चरण 3 — गणेश पूजन
सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करें, ताकि पूजा निर्विघ्न संपन्न हो:
चरण 4 — भगवान श्रीकृष्ण का पूजन
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र का पंचोपचार विधि से पूजन करें और उन्हें तुलसी दल, माखन-मिश्री या मिठाई का भोग लगाएँ:
नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जा रही वस्तु का नाम बोलें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि।
चरण 5 — यमराज का पूजन
संध्या काल में यमराज की पूजा करें। यमराज को तिल, गुड़, मूंग, फूल और जल अर्पित करें:
चरण 6 — हनुमान जी का पूजन
नरक चतुर्दशी पर भगवान हनुमान की भी पूजा की जाती है। हनुमान जी को सिंदूर, चोला और प्रसाद अर्पित करें:
चरण 7 — 13 दीपक जलाना
संध्या के बाद मिट्टी के 13 दीपक जलाएँ। परंपरा के अनुसार एक दीपक पूर्व दिशा की ओर नीम के पेड़ के नीचे रखा जाता है और बाकी घर के प्रवेश द्वार, पूजा स्थान तथा आँगन में। यह दीपदान अकाल मृत्यु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए किया जाता है। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें।
चरण 8 — प्रसाद एवं दान
पूजा के बाद मिठाई और भुने चने का प्रसाद वितरण करें। गरीबों एवं जरूरतमंदों को तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
नरक चतुर्दशी पूजा के नियम
- अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पूर्व ही करें।
- व्रत के दिन तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा) का सेवन न करें।
- संध्या काल की पूजा में मन शांत एवं एकाग्र रखें।
- दीपक जलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें और अग्नि की सुरक्षा करें।
- पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।