यमुना पूजा का विशेष महत्व भाई दूज (यम द्वितीया) पर होता है, जब यमुना माता की पूजा और भाई के लिए दीर्घायु की कामना की जाती है। यमुना को सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन माना गया है। इस लेख में यमुना पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, भाई दूज पर विशेष पूजन और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।

यमुना पूजा का महत्व

परंपरा में यमुना को कालिंदी भी कहा जाता है। ये सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं, इसलिए यमुना स्नान और पूजन को भय-निवारक तथा दीर्घायु प्रदायक माना गया है। वृंदावन-मथुरा क्षेत्र में यमुना के तट पर श्रीकृष्ण की लीलाओं के कारण इनका विशेष महत्व है। भाई दूज के दिन यमुना माता और यमराज दोनों की पूजा कर भाई की लंबी आयु की कामना की जाती है।

यमुना पूजा कब करें?

  • भाई दूज / यम द्वितीया: कार्तिक शुक्ल द्वितीया — यमुना पूजा का प्रमुख अवसर।
  • यमुना जयंती: कार्तिक शुक्ल सप्तमी।
  • कार्तिक मास: यमुना स्नान एवं दीपदान का विशेष महत्व।
  • नित्य/शुभ अवसर: घर में यमुना चित्र या जल-कलश की स्थापना कर पूजन किया जा सकता है।

यमुना पूजा की सामग्री

  • यमुना माता की चित्र/मूर्ति या कलश में जल,
  • रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन, पुष्प,
  • दीपक (चौमुखी/चार बत्ती का दीपक विशेष), तेल/घी, कपूर, धूप,
  • नैवेद्य — मिश्री, फल, नारियल, मिठाई,
  • भाई के लिए तिलक सामग्री — रोली, अक्षत, मौली,
  • शुद्ध जल का पात्र।

यमुना पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो यमुना जल या गंगाजल मिले जल से स्नान करें। यमुना पूजन का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा यमुनामातृप्रीत्यर्थं
यमुनापूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — यमुना माता का ध्यान-पूजन

यमुना माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ श्री यमुनायै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 4 — यमुना आवाहन मंत्र

ॐ यमुनायै नमः आवाहनं समर्पयामि।
यमस्वसर्नमस्तेऽसु यमुने लोकपूजिते।
वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते॥

चरण 5 — दीपदान एवं यमराज पूजन

भाई दूज की संध्या पर चौमुखी दीपक (चार बत्तियों का दीपक) जलाकर यमुना माता के समीप या यमुना तट पर रखें। यमराज का पूजन करते समय यह मंत्र बोलें:

धर्मराज नमस्तुभ्यं नमस्ते यमुनाग्रज।
पाहि मां किंकरैः सार्धं सूर्यपुत्र नमोऽस्तु ते॥

चरण 6 — भाई का तिलक एवं आशीर्वाद

भाई दूज के दिन बहन भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक करके भाई की दीर्घायु की कामना करती है और यह प्रार्थना करती है:

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे श्री कृष्ण को, गंगा-यमुना नीर बहे।
मेरे भाई की आयु बढ़े॥

चरण 7 — यमुना स्तुति एवं आरती

यमुना माता की स्तुति और आरती — ॐ जय यमुना माता — करें। यमुना आरती की शुरुआत में माँ को इस प्रकार पुकारें:

ॐ जय यमुना माता, मैया सबकी दाता।
जो भी ध्यान लगावे, उसका दुखड़ा जाता॥

अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

यमुना पूजा के नियम

  • कार्तिक मास में यमुना के तट पर दीपदान का विशेष महत्व माना गया है।
  • भाई दूज के दिन यमुना स्नान के बाद ही तिलक-पूजन करें।
  • चौमुखी दीपक शुद्ध घी या सरसों के तेल से जलाएँ।
  • पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा बनाए रखें।
  • नदी की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।
  • यमुना पूजन के बाद भाई-बहन एक साथ भोजन करें और प्रसाद ग्रहण करें।