भाई दूज (यम द्वितीया/भैया दूज) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को दीपावली के बाद मनाया जाने वाला भाई-बहन के प्रेम और रक्षा का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक कर उसकी दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। इस लेख में भाई दूज पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, तिलक और नियम की विस्तृत जानकारी दी गई है।

भाई दूज का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर आकर भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए इस दिन को यम द्वितीया भी कहा जाता है। यमुना ने यमराज को विदा करते समय यह वरदान मांगा था कि इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक कर उसे भोजन कराएगी, उसके भाई को यमलोक का भय नहीं होगा और वह दीर्घायु होगा। इसी दिन सुभद्रा ने भगवान श्रीकृष्ण का तिलक किया था। मान्यता है कि भाई दूज पर भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाता है और बहन के बनाए भोजन का ग्रहण करता है। बहनों को यह व्रत करने से सौभाग्य, समृद्धि और संतान सुख प्राप्त होता है।

भाई दूज पूजा कब करें?

  • भाई दूज: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया — दीपावली के दो दिन बाद।
  • तिलक काल: प्रातः से मध्याह्न तक (पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त)। अपराह्न काल में भी तिलक शुभ माना गया है।
  • विशेष: राहुकाल में तिलक करने से बचें।

भाई दूज पूजा की सामग्री

  • पूजा की थाली, दीपक, बाती, घी/तेल,
  • रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), सिंदूर, काजल,
  • पुष्प, पुष्पमाला, दूर्वा,
  • सुपारी, पान के पत्ते, नारियल (श्रीफल),
  • मिठाई, फल, बताशे, घर का बना भोजन,
  • मौली (कलावा), साफ रुमाल/वस्त्र,
  • चांदी का सिक्का (यदि हो), कलश/लोटा (जल हेतु),
  • यम देव एवं यमुना जी के पूजन हेतु दीपक, कपूर।

भाई दूज पूजा विधि (संपूर्ण क्रम)

भाई दूज की पूजा और तिलक निम्न क्रम में संपन्न किया जाता है:

चरण 1 — स्नान एवं पूजा की तैयारी

बहन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो यमुना नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा की थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, दीपक, मिठाई, सुपारी, नारियल, मौली और जल का लोटा सजाएं। सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें।

चरण 2 — यम देव एवं यमुना जी का पूजन

भाई दूज पर यम देव और यमुना जी के पूजन का विशेष प्रचलन है। शाम के समय घर के बाहर (बायीं ओर) यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर रखें और यमुना जी का पूजन करें। यम देव का पूजन करते हुए मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ यमाय नमः।
ॐ यमुनायै नमः।

यम देव की पूजा के दौरान घर के सभी सदस्यों की दीर्घायु और आरोग्य की प्रार्थना करें।

चरण 3 — भाई को चौकी पर बिठाना

पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर साफ कपड़ा बिछाएं। भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके चौकी पर बिठाएं। भाई के सिर पर साफ रुमाल रखें। भाई के दोनों हाथों पर सिंदूर और पिसे हुए चावल का लेप लगाएं। हाथों पर पान के पांच पत्ते, सुपारी और चांदी का सिक्का रखें।

चरण 4 — तिलक विधि

बहन अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से भाई के माथे पर रोली/कुमकुम से तिलक लगाएं, फिर तिलक के ऊपर अक्षत लगाएं। चंदन और काजल का टीका भी लगा सकती हैं। तिलक करते समय दीर्घायु की मंगल-कामना करें:

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे श्री कृष्ण को, गंगा-यमुना नीर बहे, मेरे भाई की आयु बढ़े।
यमराजस्य यमी ज्येष्ठा, तेन दत्तं वरं शुभम्।
तस्मात् तव भवेदायुः, आरोग्यं सुखमेव च॥

चरण 5 — आरती एवं कलावा

तिलक के बाद बहन भाई के हाथ में कलावा (मौली) बांधें और भाई को मिठाई खिलाएं। घी/तेल का दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें। आरती के समय दीपक को भाई के सामने पांच, सात या ग्यारह बार गोल घुमाएं:

आयुष्यं दारारोग्यं च, सुखं च परमं तथा।
प्राप्नुयात् सर्वसम्पत्तिं, आयुष्मान् भव सर्वदा॥

चरण 6 — आशीर्वाद एवं भोजन

पूजा के बाद भाई बहन के पैर छूकर उसका आशीर्वाद लें। बहन भाई को घर का बना भोजन कराएं और भाई अपनी क्षमता के अनुसार बहन को उपहार भेंट करे। इस दिन बहन के घर भोजन करना अनिवार्य माना गया है। रुई की माला बनाकर भाई की कलाई या गले में पहनाई जाए तो विशेष शुभ माना जाता है।

भाई दूज पूजा के नियम

  • तिलक हमेशा शुभ मुहूर्त में करें; राहुकाल में तिलक करने से बचें।
  • भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएं।
  • तिलक से पहले भाई और बहन दोनों स्नान कर शुद्ध रहें।
  • भोजन से पहले तिलक करना शुभ माना गया है।
  • इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाकर प्रसाद/भोजन ग्रहण करे।
  • पूजा के बाद प्रसाद सभी परिवारजनों में वितरित करें।
  • यमुना जी के पूजन की विस्तृत विधि यमुना पूजा विधि लेख में देखें।

भाई दूज पर विधिवत पूजा, तिलक और आरती से भाई को यम-भय से मुक्ति, दीर्घायु और समृद्धि प्राप्त होती है तथा भाई-बहन का संबंध और अधिक प्रगाढ़ होता है।