हनुमान भगवान राम के परम भक्त और भारतीय भक्ति-परंपरा के सर्वाधिक लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। बल, बुद्धि और भक्ति के प्रतीक हनुमान को संकटमोचन के नाम से भी पूजा जाता है। मंगलवार और शनिवार को हनुमान की पूजा और चालीसा-पाठ का विशेष प्रचलन है। इस लेख में हनुमान पूजा की सरल व क्रमबद्ध विधि, सामग्री, मंत्र, ध्यान और नियम दिए गए हैं।
हनुमान से जुड़ी अन्य पूजाओं — हनुमान जयंती पूजा विधि, मंगलवार हनुमान पूजा विधि, शनिवार हनुमान पूजा विधि और सुंदरकांड पाठ पूजा विधि — के अलग-अलग पृष्ठ हैं। ध्यान रखें — मंदिरों की पद्धति और पारिवारिक परंपराओं में विधि का क्रम थोड़ा अलग हो सकता है।
हनुमान पूजा का महत्व
हनुमान को संकटमोचन — संकट दूर करने वाले — के रूप में पूजा जाता है। परंपरा में हनुमान की पूजा से धैर्य, बल और भक्ति का भाव बढ़ता है। हनुमान चालीसा का पाठ और 'जय श्रीराम' का स्मरण उनकी भक्ति का सरल साधन माना गया है। पूजा का मूल श्रद्धा, शुद्धता और संयम है।
हनुमान पूजा का शुभ समय
- मंगलवार और शनिवार: हनुमान पूजा के विशेष दिन — मंगलवार और शनिवार की पूजा के अलग पृष्ठ देखें।
- हनुमान जयंती: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा का विशेष पर्व (हनुमान जयंती पूजा विधि देखें)।
- प्रतिदिन: प्रातः स्नान के बाद हनुमान चालीसा पाठ और दर्शन का प्रचलन है।
हनुमान पूजा की सामग्री
- हनुमान की मूर्ति या चित्र,
- सिंदूर (मूर्ति/चोला हेतु),
- पुष्प, अक्षत, तुलसी दल,
- चंदन, कुमकुम, हल्दी,
- धूप, घी का दीपक, कपूर,
- नैवेद्य — चना, गुड़, केला, नारियल, मिश्री,
- आसन, घंटी, पूजा की थाली।
विशेष: मंगलवार/शनिवार और विशेष अवसरों पर हनुमान को सिंदूर-चोला अर्पित करने का प्रचलन है — यह क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर करता है।
हनुमान पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान, शुद्धिकरण एवं आचमन
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल और बर्तनों की सफाई करें। प्रचलित आचमन-क्रम:
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — संकल्प
पूजा का संकल्प करें। सामान्य प्रारूप: "मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीहनुमत्प्रीत्यर्थं … पूजनं करिष्ये।" संकल्प में 'अमुक' स्थानों पर तिथि, नाम आदि की जानकारी भरें।
चरण 4 — हनुमान का ध्यान
प्रचलित हनुमान ध्यान श्लोक:
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
चरण 5 — आवाहन एवं उपचार-अर्पण
मूर्ति/चित्र के समक्ष प्रतिष्ठा का भाव रखते हुए उपचार-अर्पण किया जाता है। सामान्य प्रारूप:
ॐ हनुमते नमः आसनं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः स्नानं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः गन्धं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः पुष्पं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः ताम्बूलं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः दक्षिणां समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः प्रदक्षिणा-नमस्कारं समर्पयामि।
चरण 6 — सिंदूर अर्पण
हनुमान की पूजा में सिंदूर अर्पण का विशेष प्रचलन है। शुद्ध सिंदूर जल में मिलाकर मूर्ति पर/चोला के रूप में अर्पित करें।
चरण 7 — हनुमान मंत्र जप
पूजा के बाद हनुमान मंत्रों का जप करें। प्रचलित मंत्र:
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥
उपर्युक्त हनुमान गायत्री के कुछ क्षेत्रीय संस्करणों में पद-क्रम थोड़ा भिन्न मिलता है।
चरण 8 — हनुमान चालीसा पाठ
पूजा के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। चाहें तो हनुमान अष्टक या हनुमान बाहुक का भी पाठ करें।
चरण 9 — आरती
पूजा के अंत में हनुमान की आरती करें। प्रचलित आरती कीजे हनुमान लला की आरती कीजे हनुमान लला की पृष्ठ पर देखें।
चरण 10 — पुष्पांजलि एवं क्षमा-प्रार्थना
आरती के बाद पुष्पांजलि अर्पित करें। प्रचलित क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
हनुमान पूजा के नियम
- पूजा स्थल स्वच्छ रखें; नियत समय पर पूजा करने की परंपरा है।
- हनुमान पूजन में शुद्धता और सात्विक नैवेद्य का ध्यान रखें।
- चना, गुड़, केला और नारियल हनुमान के प्रचलित प्रसाद हैं।
- हनुमान भक्ति में 'जय श्रीराम' का स्मरण और नित्य चालीसा-पाठ का विशेष महत्व है।
- पूजा का क्रम परिवार की चलती-आती पद्धति के अनुसार ही रखें।
क्षेत्रीय एवं पद्धति-भेद
हनुमान पूजा की पद्धति में उत्तर भारत में मंगलवार-शनिवार का प्रचलन, दक्षिण भारत में शनिवार और विशेष तिथियों का महत्व, तथा मंदिरों की आगम-पद्धति में अंतर मिलता है। सिंदूर-चोला, वस्त्र अर्पण और विशेष प्रसाद की परंपराएँ भी क्षेत्र-विशेष में भिन्न हैं। सभी श्रद्धा के ही भाव हैं — अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें।
हनुमान से जुड़ी अन्य पूजाएँ
- हनुमान जयंती पूजा विधि — हनुमान जन्मोत्सव का पर्व।
- मंगलवार हनुमान पूजा विधि — साप्ताहिक विशेष पूजन।
- शनिवार हनुमान पूजा विधि — साप्ताहिक विशेष पूजन।
- सुंदरकांड पाठ पूजा विधि — सुंदरकांड का पाठ एवं पूजन।