महालक्ष्मी माता लक्ष्मी का विशाल/विश्व स्वरूप माना गया है — जिनके रूप में धन, वैभव, अन्न और समृद्धि के साथ कल्याणकारी शक्ति का भाव है। महालक्ष्मी की पूजा विशेषकर दीपावली, कोजागरी और लक्ष्मी-संबंधी विशेष अवसरों पर की जाती है। इस लेख में महालक्ष्मी पूजा की विधि, श्री सूक्त-पाठ, मंत्र और नियम दिए गए हैं।

सामान्य लक्ष्मी पूजा लक्ष्मी पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।

महालक्ष्मी का महत्व

परंपरा में महालक्ष्मी को देवी का समृद्धि-स्वरूप माना गया है। श्री सूक्त और लक्ष्मी-स्तोत्रों में माता लक्ष्मी की महिमा का वर्णन है। महालक्ष्मी पूजा से अन्न-धन-वैभव के साथ सुख और सौभाग्य की कामना की जाती है। यह पूजा सामान्य लक्ष्मी पूजा का ही विस्तृत स्वरूप है।

महालक्ष्मी पूजा कब करें?

  • दीपावली: कार्तिक अमावस्या की रात्रि।
  • कोजागरी: आश्विन शुक्ल पूर्णिमा।
  • शुक्रवार: साप्ताहिक लक्ष्मी-पूजा का प्रचलित दिन।
  • मंगलवार/पूर्णिमा: क्षेत्रीय प्रथा के अनुसार।

महालक्ष्मी पूजा की सामग्री

  • महालक्ष्मी की मूर्ति/चित्र, कलश,
  • लाल/पीला वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
  • कमल के फूल, पुष्प, धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — खीर, हलवा, मिश्री, फल, नारियल, पंचमेवा,
  • सिक्के, अनाज, आसन।

महालक्ष्मी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थं
महालक्ष्मीपूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — महालक्ष्मी का ध्यान-पूजन

महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रचलित प्रारूप:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — श्री सूक्त का पाठ

महालक्ष्मी पूजा में श्री सूक्त का पाठ प्रचलित है। श्री सूक्त का आरंभिक श्लोक:

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिमकरां लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

श्री सूक्त का पूर्ण पाठ, महत्व और लाभ श्री सूक्त — पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ और विधि पृष्ठ पर देखें; पाठ विधि-जानकार के मार्गदर्शन में करना उचित है।

चरण 5 — लक्ष्मी मंत्र जप

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुपत्न्यै धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

चरण 6 — चालीसा पाठ एवं आरती

लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

महालक्ष्मी पूजा के नियम

  • महालक्ष्मी पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • श्री सूक्त-पाठ उच्चारण-शुद्धता के साथ करें; संदेह हो तो विद्वान से सहायता लें।
  • लक्ष्मी-पूजन में सिक्के/अन्न अर्पण का प्रचलन समृद्धि का भाव है।
  • पूजा के दिन वाणी और व्यवहार में विनम्रता रखें।

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