कोजागरी पूर्णिमा — आश्विन शुक्ल पूर्णिमा — को माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का प्रचलन है। इस दिन को शरद पूर्णिमा और कौमुदी महोत्सव भी कहते हैं। रात्रि में जागरण कर, दूध-चावल की खीर का भोग लगाकर लक्ष्मी पूजा की जाती है। इस लेख में कोजागरी लक्ष्मी पूजा की विधि, रात्रि-जागरण, मंत्र और नियम दिए गए हैं।
सामान्य लक्ष्मी पूजा लक्ष्मी पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।
कोजागरी पूर्णिमा का महत्व
कोजागरी को धन-समृद्धि की रात्रि माना गया है। परंपरा के अनुसार इस रात्रि माता लक्ष्मी का विचरण होता है और जागकर पूजा करने वालों को कृपा का भाव जुड़ा है। इस रात्रि को कौमुदी महोत्सव — चाँदनी और उल्लास का पर्व — भी कहा जाता है। दूध और खीर का भोग इस पर्व का प्रमुख प्रचलन है।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा कब करें?
कोजागरी आश्विन मास की शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। पूजा रात्रि में की जाती है — रात्रि जागरण के साथ। सटीक समय पंचांग देखें।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा की सामग्री
- लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र,
- दूध, चावल (खीर हेतु), मिश्री, फल,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी,
- सिक्के, अनाज, आसन।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
दिन में स्नान कर पूजा की तैयारी करें और रात्रि में पूजन का संकल्प करें:
कोजागरीपूजनं करिष्ये।
चरण 2 — रात्रि में लक्ष्मी पूजन
रात्रि में माता लक्ष्मी का पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 3 — खीर का भोग
कोजागरी में दूध-चावल की खीर का भोग प्रमुख प्रचलन है। खीर बनाकर देवी को भोग लगाएँ और फिर वितरित करें।
चरण 4 — लक्ष्मी मंत्र जप
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
चरण 5 — चालीसा पाठ एवं आरती
लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
कोजागरी के नियम
- रात्रि जागरण स्वास्थ्य के अनुसार रखें — यह श्रद्धा का भाव है, अनिवार्य नहीं।
- खीर का भोग सात्विक और स्वच्छता से बनाएँ।
- कोजागरी का प्रचलन बंगाल, मध्य भारत और नेपाल में विशेष है।
- शरद पूर्णिमा की रात्रि को चाँदनी में खीर रखने की क्षेत्रीय परंपरा भी है।