श्री सूक्त माता लक्ष्मी की महिमा का प्रसिद्ध वैदिक स्तोत्र है, जो ऋग्वेद से जुड़े परिशिष्ट साहित्य (खिल) में माना जाता है। इसमें देवी श्री/लक्ष्मी का गुणगान और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना की गई है। श्री सूक्त को समृद्धि और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। इस लेख में श्री सूक्त का पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ और पाठ-विधि दी गई है।

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श्री सूक्त का परिचय

श्री सूक्त में मूलतः 15 मंत्र माने जाते हैं; कई परंपराओं में सोलहवें मंत्र के रूप में फलश्रुति (पाठ का फल बताने वाला मंत्र) भी जोड़ा जाता है। बाद में इसमें परिशिष्ट मंत्रों के और संस्करण भी प्रचलित हुए हैं। इसमें अग्निदेव (जातवेदा) से देवी श्री को बुलाने की प्रार्थना है तथा सोना, गौ, अश्व, अन्न और परिजनों की प्राप्ति की कामना व्यक्त की गई है। मूल सूक्त लक्ष्मी-उपासना का एक प्रमुख वैदिक पाठ माना जाता है।

श्री सूक्त का महत्व

  • श्री सूक्त में देवी श्री को हिरण्यवर्णा (स्वर्ण-आभा वाली), चंद्रा (चंद्रमा के समान प्रकाशमान), पद्मस्थिता (कमल पर विराजमान) और सर्वभूतों की ईश्वरी कहा गया है।
  • यह सूक्त संपदा, अन्न, पशुधन और कुल की वृद्धि की कामना का पाठ माना जाता है।
  • अलक्ष्मी (दरिद्रता) को दूर करने की प्रार्थना भी इसी सूक्त में है।
  • मूल पाठ के 15 मंत्र वैदिक संस्कृत में हैं; उच्चारण-शुद्धता का ध्यान रखना श्रेयस्कर है।

श्री सूक्त के लाभ

परंपरा में श्री सूक्त के निम्नलिखित लाभ बताए जाते हैं — ये श्रद्धा और परंपरा पर आधारित मान्यताएँ हैं:

  • घर में नित्य श्री सूक्त-पाठ को समृद्धि और सुख-समृद्धि की वृद्धि के भाव से जोड़ा जाता है।
  • माना जाता है कि इसके पाठ से अन्न, धन और कुल-वृद्धि की कामना की जाती है।
  • दीपावली और कोजागरी जैसे अवसरों पर इसका विशेष पाठ प्रचलित है।
  • सूक्त के मंत्रों के अर्थ समझकर भावपूर्वक पाठ करने को अधिक फलदायी माना जाता है।

श्री सूक्त पाठ का समय और विधि

  • समय: प्रातः स्नान के बाद या दीपावली, कोजागरी जैसे शुभ अवसरों पर।
  • आसन: पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके स्वच्छ आसन पर बैठें।
  • संकल्प: पाठ के आरंभ में शुद्धि और श्रद्धा का भाव रखते हुए संकल्प करें।
  • पाठ: उच्चारण-शुद्धता के साथ 15 मंत्रों का पाठ करें; विद्वान/गुरु से उच्चारण सीखना उत्तम है।
  • जप: श्रद्धानुसार 11, 21, 51 या 108 बार जप किया जा सकता है।

श्री सूक्त का पूर्ण पाठ (मूल मंत्र)

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ १॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥ २॥
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मादेवीर्जुषताम्॥ ३॥
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥ ४॥
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥ ५॥
आदित्यवर्णे तपसोधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥ ६॥
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥ ७॥
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥ ८॥
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥ ९॥
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥ १०॥
कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥ ११॥
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥ १२॥
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ १३॥
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ १४॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥ १५॥
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
श्रीसूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥ १६॥

नोट: श्री सूक्त के पाठ में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार स्वर और पद-क्रम में थोड़ा अंतर मिल सकता है; कुछ संस्करणों में परिशिष्ट मंत्र भी जोड़े जाते हैं। उपर्युक्त पाठ प्रचलित 15 मंत्रों एवं फलश्रुति पर आधारित है।

श्री सूक्त से जुड़ी कुछ मान्यताएँ

  • श्री सूक्त को वैदिक लक्ष्मी-स्तुति के रूप में देखा जाता है; इसका भावपूर्ण पाठ श्रद्धा की साधना है।
  • परंपरा में इसे धन-धान्य और कुल-वृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
  • यह पाठ किसी विशेष व्रत की अनिवार्यता नहीं रखता; श्रद्धा के अनुसार नित्य या अवसर-विशेष पर किया जा सकता है।

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