नवग्रह पूजा नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) की शांति और शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए की जाने वाली पूजा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये नौ ग्रह मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं। इस लेख में नवग्रह पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, नौ ग्रहों के मंत्र और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

नवग्रह पूजा का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जीवन पर नौ ग्रहों का प्रभाव माना जाता है। मान्यता है कि नवग्रह पूजा करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव (ग्रह दोष) शांत होते हैं और ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है। शुभ कार्यों — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि — से पहले ग्रह शांति के लिए नवग्रह पूजा करने का विधान है। नवग्रह पूजा से जीवन में सुख, शांति, सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है — ऐसी मान्यता है। राहु-केतु को छाया ग्रह कहा गया है और इनके प्रभाव से बचने के लिए भी नवग्रह पूजा का उल्लेख मिलता है।

नवग्रह पूजा कब करें?

  • शुभ कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश आदि) से पहले ग्रह शांति हेतु।
  • ग्रह दोष निवारण के लिए — कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति पर।
  • शनि, राहु, केतु आदि की महादशा/अंतर्दशा में।
  • नवग्रह शांति यज्ञ के रूप में विशेष मुहूर्त में।
  • संक्रांति, विशेष पर्व पर भी नवग्रह पूजा का प्रचलन है।

नवग्रह पूजा की सामग्री

  • नवग्रह की प्रतिमाएं या चित्र (नौ ग्रहों का),
  • ताम्र कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली,
  • गंगाजल, पंचामृत,
  • रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी,
  • पुष्प — प्रत्येक ग्रह के अनुसार वस्त्र/पुष्प,
  • जौ, तिल, गुड़, पीली सरसों, दूर्वा, कुश,
  • धूप, दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
  • नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, दही-चावल,
  • हवन सामग्री — आम की समिधा, घी।

नवग्रह पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की सफाई करें। हाथ में जल-अक्षत-पुष्प लेकर संकल्प लें — तिथि, स्थान, नाम, गोत्र का उच्चारण करते हुए नवग्रह शांति के लिए पूजन करने का संकल्प करें।

ॐ नवग्रहेभ्यो नमः नवग्रहशान्त्यर्थं पूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश पूजन

विघ्नों की निवृत्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन करें।

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — नवग्रह स्मरण (सामूहिक)

सभी नौ ग्रहों का सामूहिक स्मरण करते हुए नवग्रह शांति मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥

सरल नवग्रह स्मरण मंत्र:

ॐ आदित्याय सोमाय मङ्गलाय बुधाय च। गुरुशुक्रशनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः॥

चरण 4 — प्रत्येक ग्रह का पूजन एवं मंत्र

नवग्रह प्रतिमाओं/चित्रों का पूर्व से आरंभ कर क्रमशः पूजन करें। प्रत्येक ग्रह का ध्यान करते हुए संबंधित बीज/तांत्रिक मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥ (सूर्य)
ॐ सों सोमाय नमः॥ (चंद्र)
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥ (मंगल)
ॐ बुं बुधाय नमः॥ (बुध)
ॐ बृं बृहस्पतये नमः॥ (गुरु)
ॐ शुं शुक्राय नमः॥ (शुक्र)
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥ (शनि)
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥ (राहु)
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥ (केतु)

प्रत्येक ग्रह का षोडशोपचार से पूजन करें — पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि। उपचार अर्पित करते समय संबंधित ग्रह के नाम से मंत्र बोलें:

ॐ नवग्रहेभ्यो नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जाने वाली वस्तु का नाम बोलें — जैसे “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 5 — हवन

नवग्रह शांति के लिए हवन करें। हवन में जौ, तिल, गुड़ और पीली सरसों की आहुति दें। नवग्रह शांति मंत्र से आहुतियां दें:

ॐ आदित्याय सोमाय मङ्गलाय बुधाय च। गुरुशुक्रशनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः स्वाहा॥

चरण 6 — दान एवं प्रसाद

नवग्रह पूजा के बाद ग्रहों की विशेष वस्तुओं (जैसे सूर्य के लिए लाल वस्त्र/गुड़, चंद्र के लिए दूध/चावल, शनि के लिए तिल/लोहा) का दान करना शुभ माना गया है। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

नवग्रह पूजा के नियम

  • नवग्रह पूजा शुभ मुहूर्त में करें।
  • पूजा के दौरान संयम और सात्विक आहार का पालन करें।
  • नवग्रह पूजन पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करें।
  • प्रत्येक ग्रह का मंत्र संबंधित वार (जैसे सूर्य — रविवार, शनि — शनिवार) पर जपना विशेष फलदायी माना गया है।
  • ग्रह मंत्रों का जप चंदन या रुद्राक्ष की माला से करें।
  • पूजा के बाद ग्रहों की विशेष वस्तुओं का दान करें।
  • जटिल ग्रह दोषों में योग्य ज्योतिषी/आचार्य से परामर्श करें।

नवग्रह पूजा से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए शनि पूजा विधि और शनि चालीसा भी देखें।