भगवान कार्तिकेय भगवान शिव के पुत्र और देवताओं की सेना के अधिपति माने जाते हैं। इन्हें मुरुगन, स्कंद, षण्मुख और तारकासुर-संहारक भी कहा जाता है। इस लेख में कार्तिकेय जी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, स्कंद षष्ठी पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
भगवान कार्तिकेय का महत्व
परंपरा के अनुसार कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। कृतिका नक्षत्र से उनका संबंध होने के कारण इन्हें कार्तिकेय कहा गया। इन्होंने तारकासुर का वध किया, इसलिए इन्हें देवसेनापति और युद्ध के देवता माना गया है। इनका वाहन मोर माना जाता है। स्कंद षष्ठी (प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी) पर विशेष पूजन होता है। मान्यता है कि कार्तिकेय जी की पूजा से बल, विजय, साहस और संतान की प्राप्ति होती है।
भगवान कार्तिकेय पूजा कब करें?
- स्कंद षष्ठी: प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को स्कंद/कार्तिकेय पूजन का विधान है।
- कार्तिक मास: कार्तिक मास में कार्तिकेय जी की पूजा का विशेष महत्व है।
- तारकासुर वध तिथि: कार्तिक शुक्ल षष्ठी को स्कंद षष्ठी के रूप में विशेष पूजन होता है।
- मंगलवार: मंगलवार को कार्तिकेय पूजा भी शुभ मानी गई है।
भगवान कार्तिकेय पूजा की सामग्री
- कार्तिकेय जी की प्रतिमा/चित्र, लाल वस्त्र,
- चंपा के फूल, गुड़हल, लाल फूल,
- रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत,
- घी का दीपक, धूप, कपूर,
- नैवेद्य: मिष्ठान (मिठाई), फल, खीर,
- तुलसी दल।
भगवान कार्तिकेय पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
स्कंद षष्ठी के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और कार्तिकेय प्रतिमा/चित्र को लाल कपड़े की चौकी पर स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:
चरण 2 — पूजन एवं तिलक
कार्तिकेय प्रतिमा पर रोली/चंदन का तिलक लगाएँ, अक्षत-पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर धूप-दीप दिखाएँ। चंपा के फूल कार्तिकेय जी को विशेष प्रिय माने गए हैं। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 3 — कार्तिकेय मंत्रों का जाप
पूजन के बाद कार्तिकेय जी के मंत्रों का जाप करें:
ॐ शरवणभवाय नमः। ॐ कुमाराय नमः।
चरण 4 — व्रत कथा एवं आरती
नैवेद्य (मिठाई, खीर) अर्पित करें और आरती करें। स्कंद षष्ठी के दिन व्रत कथा का श्रवण करना शुभ माना गया है। प्रसाद परिवार में वितरण करें। संतान की कामना रखने वाले भक्त इस दिन विशेष रूप से पूजन करते हैं।
भगवान कार्तिकेय पूजा के नियम
- स्कंद षष्ठी के दिन उपवास या फलाहार रखें।
- पूजा में चंपा के फूल का उपयोग विशेष शुभ माना गया है।
- पूजा में सात्विक नैवेद्य ही चढ़ाएँ; मांस-मदिरा वर्जित है।
- कार्तिकेय जी की पूजा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना शुभ माना गया है।
- लाल वस्त्र और लाल फूल कार्तिकेय जी को प्रिय हैं।
- व्रत कथा का श्रवण पूर्ण श्रद्धा से करें — व्रत का फल कथा-श्रवण से पूर्ण माना जाता है।