पार्वती पूजा का विशेष महत्व शक्ति, सौभाग्य और दांपत्य सुख की देवी के रूप में है। माता पार्वती भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं और इनकी पूजा विशेषकर सावन सोमवार, हरितालिका तीज एवं शुक्रवार को की जाती है। इस लेख में पार्वती पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, सोलह श्रृंगार एवं नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।
पार्वती पूजा का महत्व
परंपरा में पार्वती को हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी माना गया है। इन्हीं के अन्य नाम गौरी, भवानी, उमा, शैलपुत्री हैं। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। माना जाता है कि इनकी पूजा से सौभाग्य, सुहाग, संतान सुख, दांपत्य सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है।
पार्वती पूजा कब करें?
- हरितालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया — पार्वती-शिव पूजा का प्रमुख दिन।
- सावन सोमवार: श्रावण मास के सोमवार शिव-पार्वती पूजन।
- शुक्रवार: देवी पूजा का प्रचलित दिन।
- नवरात्रि: चैत्र/शारदीय नवरात्रि में देवी पूजन।
पार्वती पूजा की सामग्री
- पार्वती माता की मूर्ति/चित्र (शिव-पार्वती), आसन,
- लाल वस्त्र, चुनरी, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, चंदन,
- पुष्प — करवीर, जपाकुसुम (गुड़हल), गुलाब, कनेर, कमल,
- बिल्वपत्र (शिव पूजन हेतु), मालती फूल,
- श्रृंगार की वस्तुएँ — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, कंघी, महावर, मेहंदी, लाल चुनरी,
- नैवेद्य — घी से बनी मिठाई (लड्डू, बर्फी, पुए), फल, नारियल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, शुद्ध जल, पंचामृत।
पार्वती पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल आसन बिछाकर शिव-पार्वती का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। पूजन का संकल्प करें:
पार्वतीपूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — पार्वती माता का ध्यान-पूजन
माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 4 — माता का आवाहन-मंत्र
पार्वती माता का आवाहन करते समय यह प्रार्थना करें:
सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये॥
चरण 5 — पुष्प-अर्पण एवं अंग-पूजा
माता को प्रिय पुष्प — करवीर, जपाकुसुम, गुलाब, कनेर, कमल, मालती — अर्पण करें। साथ ही माता का अंग-पूजन करते हुए चरणों से मस्तक तक विभिन्न नामों से पुष्प अर्पण करें:
भवान्यै नमः कटिः, कामदेव्यै नमः नाभिः,
पद्मोद्भवायै नमः उदरम्, कामश्रियै नमः वक्षः,
रम्भायै नमः हृदयम्, सौभाग्यवासिन्यै नमः हस्तौ,
शशिमुखश्रियै नमः मुखम्, कान्त्यै नमः केशान्,
पार्वत्यै नमः नासिकाम्, सुनेत्रायै नमः नेत्रे,
कात्यायन्यै नमः मस्तकम्।
चरण 6 — सोलह श्रृंगार अर्पण
माता पार्वती का सोलह श्रृंगार करें — पायल, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, कंघी, तिलक, महावर, मेहंदी, नथनी, कान, काजल, हार, चुनरी, कुंदन, साड़ी एवं इत्र। यह उपचार सुहाग-सुख की कामना से किया जाता है।
चरण 7 — भोग एवं आरती
माता को घी से बनी मिठाई — लड्डू, बर्फी, पुए — और ऋतुफल का भोग लगाएँ। पार्वती चालीसा का पाठ करें और आरती करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
पार्वती पूजा के नियम
- पार्वती पूजा में श्रृंगार-सामग्री अर्पण करना विशेष प्रचलित है।
- माता को करवीर, गुड़हल एवं गुलाब के पुष्प प्रिय माने गए हैं।
- घी से बनी मिठाई (लड्डू, बर्फी, पुए) भोग में अर्पण करें।
- शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
- हरितालिका तीज पर विशेष श्रद्धा से पूजन करें।
- पूजा श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक भाव से करें।