अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला अत्यंत पुण्यदायी पर्व है। इस दिन किए गए पूजन, दान और शुभ कार्य का फल अक्षय (कभी नष्ट न होने वाला) माना गया है। इसीलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस लेख में अक्षय तृतीया पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, दान और नियम की विस्तृत जानकारी दी गई है।

अक्षय तृतीया का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को सत्ययुग का आरंभ और भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इस दिन माता गंगा का पृथ्वी पर अवतरण, माता लक्ष्मी द्वारा कुबेर को धन का स्वामी बनाना तथा द्वापर में सुदामा के मन से भगवान श्रीकृष्ण को अक्षत (चावल) अर्पित करने की घटना का स्मरण होता है। इसी दिन पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति भी हुई थी। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान-पुण्य, पूजन और सोना-चांदी आदि की खरीदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती। शास्त्रों में इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं मानी गई है।

अक्षय तृतीया पूजा कब करें?

  • तिथि: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
  • पूजा काल: प्रातः काल से मध्याह्न तक (पूजा का शुभ समय)।
  • मुहूर्त: पंचांग के अनुसार जिस दिन तृतीया तिथि प्रातःकाल में हो, उस दिन पर्व मनाया जाता है। पूजा-खरीदारी राहुकाल छोड़कर कभी भी की जा सकती है।
  • विशेष: इस दिन त्रिपुष्कर योग, गजकेसरी योग, सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योग बनने पर पूजा का फल और भी अधिक माना जाता है।

अक्षय तृतीया पूजा की सामग्री

  • भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा/चित्र,
  • लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, कुबेर की प्रतिमा,
  • पीला कपड़ा, पीला वस्त्र, चौकी,
  • जल से भरा कलश/मिट्टी का घड़ा, नारियल, आम के पत्ते,
  • गेहूं, जौ, अक्षत (साबुत चावल), कलावा (मौली), जनेऊ,
  • रोली, कुमकुम, चंदन, हल्दी, केसर, सिंदूर,
  • पुष्प (विशेषकर पीले/गुलाबी फूल, कमल), पुष्पमाला,
  • धूप, घी का दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
  • पंचामृत, गंगाजल, गुलाब जल, इत्र,
  • फल, मिठाई, मखाने की खीर, पंच मेवा,
  • पान-सुपारी, लौंग, इलायची, दूर्वा, सत्तू, गुड़,
  • दक्षिणा, दान सामग्री (अन्न, वस्त्र, सोना-चांदी यथाशक्ति)।

अक्षय तृतीया पूजा विधि (संपूर्ण क्रम)

अक्षय तृतीया की पूजा सरल एवं सात्विक रूप से घर पर ही की जा सकती है। संपूर्ण क्रम निम्न है:

चरण 1 — स्नान, संकल्प एवं शुद्धिकरण

प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ (विशेषकर पीले) वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा कुबेर की प्रतिमा स्थापित करें। व्रत-पूजा का संकल्प लें:

मम सकुटुम्बस्य अक्षय-पुण्य-फल-प्राप्त्यर्थं अक्षयतृतीया-पूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश पूजन

हर शुभ कार्य के आरंभ में भगवान गणेश का पूजन करें। गणेश जी का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें:

ॐ गं गणपतये नमः।

गणेश जी को अक्षत, सिंदूर, सुपारी, नारियल, दूर्वा, धूप, दीप, चंदन, पान-पुष्प और मोदक आदि अर्पित करें।

चरण 3 — विष्णु भगवान का पूजन

भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं और तुलसी दल, पीले फूल एवं पुष्पमाला अर्पित करें। गोपी चंदन का तिलक करें और विधिपूर्वक उपचार अर्पण करें:

ॐ विष्णवे नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — माता लक्ष्मी का पूजन

माता लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, कमलगट्टा, हल्दी, धूप, दीप, कमल का फूल या लाल गुलाब अर्पित करें। माता को सिंदूर का तिलक लगाएं और पूजन करते हुए मंत्र का जाप करें:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।

माता लक्ष्मी को मखाने की खीर या केसर वाली खीर का भोग लगाएं।

चरण 5 — कुबेर का पूजन

अक्षय तृतीया पर धन के स्वामी भगवान कुबेर का पूजन करने का विशेष विधान है। कुबेर जी को अक्षत, कमलगट्टा, इत्र, लौंग, चंदन, दूर्वा, इलायची, नैवेद्य, फल, सुपारी और धनिया अर्पित करें:

ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।

सोना-चांदी खरीदी हो तो उसे पूजा स्थल पर रखकर साथ में पूजन करें।

चरण 6 — पाठ एवं आरती

माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए लक्ष्मी चालीसा, विष्णु चालीसा, श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। अंत में घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद परिवार एवं अन्य लोगों में वितरित करें।

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य

अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जौ, गेहूं, चावल, सत्तू, ककड़ी, गुड़, नमक, वस्त्र, जल का घड़ा और सोना-चांदी दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों एवं ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी है। यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और धन का दान अक्षय फल देने वाला माना गया है।

अक्षय तृतीया पूजा के नियम

  • इस दिन स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें — पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है।
  • व्रत रखने वाले निराहार या फलाहारी व्रत करें; पूर्ण व्रत न हो सके तो एक समय बिना नमक का सात्विक भोजन करें।
  • पूजा में माता लक्ष्मी को कमल का फूल एवं विष्णु जी को तुलसी दल अर्पित करें।
  • इस दिन क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन का त्याग करें।
  • राहुकाल में पूजा-खरीदारी से बचें।
  • इस दिन सोना-चांदी, वाहन या भूमि खरीदना शुभ माना गया है; खरीदी गई वस्तु को पूजा में रखें।
  • विस्तृत सामग्री सूची के लिए पूजा सामग्री सूची लेख देखें।

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर की विधिवत पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।