हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। यह मुख्यतः उत्तर भारत में प्रचलित व्रत-पर्व है, जिसमें स्त्रियाँ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार इसी दिन माँ पार्वती ने शिव को पति-रूप में पाने के लिए कठोर व्रत किया था। इस लेख में हरतालिका तीज पूजा की विधि, व्रत, कथा-संदर्भ, मंत्र और नियम दिए गए हैं।
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हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज को स्त्री-व्रतों का प्रमुख पर्व माना गया है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा, निर्जल/फलाहार व्रत और रात्रि जागरण का प्रचलन है। लोक-कथा के अनुसार पार्वती ने इसी तिथि पर पिता के विवाह-आदेश से बचकर वन में शिव की तपस्या की थी — इसलिए इस पर्व में शिव-पार्वती पूजन का मुख्य स्थान है। कथा पुराण-ग्रंथों में वर्णित है; क्षेत्रीय संस्करणों में कुछ भिन्नता हो सकती है।
हरतालिका तीज कब मनाई जाती है?
हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है — यह सामान्यतः अगस्त-सितंबर में आती है। यह उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान) में विशेष रूप से प्रचलित है।
हरतालिका तीज पूजा की तैयारी
- शिव-पार्वती (उमा-महेश्वर) की मूर्ति/चित्र,
- पूजा सामग्री — रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प,
- नैवेद्य — फल, मिठाई, मिश्री, नारियल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, आसन।
हरतालिका तीज पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत-पूजन का संकल्प करें:
हरतालिकाव्रतपूजनं करिष्ये।
चरण 2 — शिव-पार्वती का पूजन
उमा-महेश्वर रूप में शिव-पार्वती का पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य। प्रचलित प्रारूप:
ॐ शिवाय नमः [उपचार] समर्पयामि।
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 3 — मंत्र जप
तन्नो गौरी प्रचोदयात्॥
चरण 4 — पार्वती चालीसा पाठ
पूजा के बाद पार्वती चालीसा का पाठ करें।
चरण 5 — रात्रि जागरण एवं आरती
हरतालिका तीज में रात्रि जागरण का प्रचलन है। संध्या में आरती — जय पार्वती माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
हरतालिका तीज के नियम
- हरतालिका तीज का व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें; बीमार, वृद्ध और बच्चों के लिए व्रत अनिवार्य नहीं।
- रात्रि जागरण श्रद्धा का भाव है — स्वास्थ्य के अनुसार ही रखें।
- पूजन में शिव-पार्वती दोनों का स्मरण अनिवार्य भाव है।
- क्षेत्रीय पद्धति में कथा-पाठ और विशेष प्रसाद की रीति भिन्न हो सकती है।