दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है और इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। संध्या काल में घरों और मंदिरों में दीप जलाकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है। इस लेख में दीपावली की लक्ष्मी पूजा की विधि, मुहूर्त, सामग्री, मंत्र और नियम दिए गए हैं।
सामान्य लक्ष्मी पूजा की विधि लक्ष्मी पूजा विधि और लक्ष्मी-गणेश युगल पूजन लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।
दीपावली का महत्व
दीपावली को प्रकाश और समृद्धि का पर्व माना गया है। परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान राम अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया। इसी दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लक्ष्मी पूजा का मुख्य काल प्रदोष (संध्या) काल माना गया है।
दीपावली लक्ष्मी पूजा कब करें?
दीपावली लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या की संध्या (प्रदोष काल) में की जाती है। सटीक मुहूर्त पंचांग में दिया जाता है — मुहूर्त से पहले पूजा की सभी तैयारियाँ पूरी रखें। अमावस्या की रात्रि को लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
दीपावली लक्ष्मी पूजा की सामग्री
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति/चित्र,
- कलश, जल, मौली, आम के पत्ते, नारियल,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प (कमल विशेष),
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, अगरबत्ती,
- नैवेद्य — खीर, हलवा, मिश्री, फल, नारियल, पंचमेवा,
- सिक्के, अनाज/चावल, मोली, आसन।
दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — घर की सफाई एवं दीप सजावट
पूजा से पहले घर की साफ-सफाई करें और घर के मुख्य द्वार तथा पूजा स्थल पर दीपों की व्यवस्था करें। दीपावली में दीप जलाना ही प्रमुख कर्म माना गया है।
चरण 2 — स्नान एवं संकल्प
पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प करें:
दीपावलीपूजनं करिष्ये।
चरण 3 — गणेश एवं लक्ष्मी का ध्यान-पूजन
मुहूर्त में गणेश-पूजन और लक्ष्मी-पूजन किया जाता है। प्रचलित प्रारूप:
ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः [उपचार] समर्पयामि।
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
पूर्ण उपचार-क्रम लक्ष्मी पूजा विधि और लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि में देखें।
चरण 4 — लक्ष्मी मंत्र जप
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
चरण 5 — चालीसा पाठ एवं आरती
लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
दीपावली के नियम
- दीपावली लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त में करें — पंचांग देखें।
- रात्रि में पूरे घर में दीप जलाने की परंपरा है — इसे प्रकाश-पर्व का मूल भाव माना गया है।
- पूजा के बाद प्रसाद और मिष्ठान वितरित करें।
- पटाखे जलाना पर्यावरण और सुरक्षा की दृष्टि से सीमित रखें।
- स्वच्छता और अहिंसा का ध्यान रखते हुए पर्व मनाएँ।
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