ऋणमोचन मंगल स्तोत्र — कर्ज मुक्ति का स्तोत्र

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥

पाठ की पहली पंक्ति से ही भक्त का नमन आरंभ हो जाता है। धरणी यानी पृथ्वी के गर्भ से जन्मे, बिजली की कांति जैसी प्रभा वाले, हाथ में शक्ति धारण करने वाले मंगल देवता को प्रणाम। इस स्तोत्र को ऋणमोचन मंगल स्तोत्र इसलिए कहा जाता है, क्योंकि लोकपरंपरा में इसे कर्ज से मुक्ति और आर्थिक संकट के निवारण की कामना से पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र छोटा है, पर जो श्रद्धालु इसे भरोसे के साथ जपते हैं, वे इसे बड़ी आस्था का मार्ग मानते हैं।

श्लोक का अर्थ

धरणीगर्भसम्भूतम् अर्थात् पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न; विद्युत्कान्तिसमप्रभम् अर्थात् बिजली के समान तेजस्वी; कुमारं शक्तिहस्तम् अर्थात् वीर कुमार, जिनके हाथ में शक्ति है; और तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम् अर्थात् उसी मंगल देवता को मैं प्रणाम करता हूँ। एक ही पंक्ति में मंगल का जन्म, उनका तेज और उनका शस्त्र — तीनों का स्मरण करके भक्त उनकी शरण माँगता है।

मंगल देवता का संबंध

मंगल नवग्रहों में तीसरे स्थान पर माने जाते हैं और इन्हें पृथ्वी पुत्र कहा जाता है। ज्योतिष में मंगल को साहस, पराक्रम, भूमि और संपत्ति का कारक माना गया है। मान्यता है कि जब कुंडली में मंगल कमजोर हो या कष्टकारी स्थिति में हो, तो व्यक्ति को कर्ज, विवाद और अकारण कष्ट झेलने पड़ते हैं। ऐसे में मंगल की कृपा पाने के लिए यह स्तोत्र पढ़ा जाता है। मंगल को प्रसन्न करने की पूरी परंपरा नवग्रह पूजा विधि से भी जुड़ी हुई है।

ऋण मोचन की मान्यता

ऋण मोचन की मान्यता यह है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से मंगल देवता की शरण में जाता है और यह स्तोत्र नियमित रूप से पढ़ता है, उस पर आर्थिक बाधाओं का प्रभाव हल्का होता है। घर में बढ़ता कर्ज, व्यापार में ठहराव और अचानक आने वाले धन संकट — ऐसे हालातों में श्रद्धालु इसी स्तोत्र की ओर मुड़ते हैं। यह कोई चमत्कार का दावा नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और नियमित प्रयास का मार्ग है।

कब और कैसे पढ़ें

इस स्तोत्र को मंगलवार के दिन विशेष मान्यता प्राप्त है। सुबह स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करके पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। मंगल की प्रतिमा या मंगल यंत्र के सामने घी का दीपक जलाएं और स्तोत्र का पाठ करें। संभव हो तो पाठ के बाद मसूर की दाल का दान करें। एकादशी और संक्रांति के दिन इस पाठ का विशेष लाभ बताया जाता है। जिन पर कर्ज का बोझ अधिक है, वे हर मंगलवार इसका पाठ कर सकते हैं।

विशेष नियम

  • पाठ के दिन मांस-मदिरा का त्याग करें।
  • पाठ का स्थान स्वच्छ रखें और स्नान-ध्यान के बाद ही पाठ करें।
  • मसूर की दाल और लाल वस्त्र का दान इस स्तोत्र के साथ जुड़ा हुआ है।
  • रक्त चंदन का लेप मंगल को अर्पित करने की परंपरा है।
  • पाठ के समय मन में केवल मंगल देवता और उनकी कृपा का ध्यान रखें।

मंगल चालीसा का पाठ भी कई भक्त इसी श्रद्धा से करते हैं। मंगल चालीसा और शनि चालीसा पढ़ने वालों को इस स्तोत्र के साथ जोड़कर भी अच्छे परिणाम मिलते हैं, यह मान्यता प्रचलित है।

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पूर्ण पाठ

मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः । स्थिरासनो महाकायः सर्वकामविरोधकः ॥ १ ॥
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः । धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः ॥ २ ॥
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः । वृष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः ॥ ३ ॥
एतानि कुजनामानि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् । ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥ ४ ॥
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥ ५ ॥
स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः । न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पापि भवति क्वचित् ॥ ६ ॥
अङ्गारक महाभाग भगवन् भक्तवत्सल । त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशयः ॥ ७ ॥
ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये चापमृत्यवः । भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ॥ ८ ॥
अतिवक्र दुरारा भोगमुक्त जितात्मनः । तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥ ९ ॥
विरञ्चि शक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा । तेन त्वं सर्वसत्वेन ग्रहराजो महाबलः ॥ १० ॥
पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः । ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रुणां च भयात्ततः ॥ ११ ॥
एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम् । महतीं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा ॥ १२ ॥

ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।