मंगल स्तोत्र — शुभ मंगल की कामना
मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलाय तनोतु मे॥
इन शब्दों के साथ ही मन में शुभता का संचार होता है। मंगल का अर्थ है शुभ, और जब किसी शुभ आरंभ से पहले भगवान का स्मरण उनके मंगलमय स्वरूप में किया जाता है, तो वही श्लोक मंगल स्तोत्र कहलाता है। विष्णु को मंगल रूप में स्मरण करने वाला यह स्तोत्र हर शुभ कार्य के आरंभ में बोला जाता है।
मंगल श्लोक क्या हैं
मंगल श्लोक वे श्लोक हैं, जो किसी कार्य की सफलता, कल्याण और बाधा-निवारण की कामना से बोले जाते हैं। ये स्तुति से पहले या किसी शुभ घटना के उद्घाटन में कहे जाते हैं। संस्कृत की परंपरा में ऐसे श्लोकों को मंगलाचरण कहा जाता है। पाठक जिस देवता को प्रसन्न करना चाहता है, उसी के नाम और स्वरूप को मंगलमय कहकर कल्याण की याचना करता है।
विष्णु और श्रीराम से जुड़ी मंगल परंपरा
मंगल की यह परंपरा विष्णु भक्ति और रामभक्ति दोनों में गहरे तक जुड़ी हुई है। पहले श्लोक में भगवान विष्णु को गरुड़ध्वज और पुण्डरीकाक्ष (कमल नयन) कहकर मंगल रूप में स्मरण किया गया है। दूसरी पंक्ति श्रीराम से जुड़ी है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने ग्रंथों में भी ऐसे ही मंगल भाव व्यक्त किए हैं; राम चालीसा के पाठकों को यह भावना सहज ही समझ आती है। रामचरितमानस का यह प्रसिद्ध मंगलाचरण श्रीराम की लीला-भूमि अयोध्या की ओर संकेत करता है।
मंगल पाठ कब करें
गृह प्रवेश, विवाह, नामकरण, जनेऊ और किसी भी नए कार्य के आरंभ पर मंगल पाठ की परंपरा है। कई घरों में प्रतिदिन सुबह की आरती के साथ भी यह स्तोत्र बोला जाता है। विशेष शुभ दिनों में तो इसका पाठ अवश्य किया जाता है, ताकि सारे कार्य मंगलमय हों।
मंगल स्तोत्र के श्लोक
मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलाय तनोतु मे॥
अर्थ — भगवान विष्णु मंगल हैं, गरुड़ को ध्वजा पर धारण करने वाले भी मंगल हैं, कमल नयन भगवान मंगल हैं; वे मेरे लिए मंगल की वृद्धि करें।
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी।
अर्थ — श्रीराम मंगल (शुभ) के भवन हैं और अमंगल (अशुभ) का नाश करने वाले हैं; दशरथ जी की अजिरा (आंगन) में विचरण करने वाले वे प्रभु हम पर दया बरसाएँ।
मंगल स्तोत्र का पाठ
लाभ
इस स्तोत्र के पाठ से मन में शुभ भाव जागते हैं, और शुभ भाव वाले मन में निराशा के लिए स्थान नहीं बचता। जिन श्रद्धालुओं को विष्णु चालीसा से मानसिक शांति मिलती है, वे इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। मंगल देवता की कृपा चाहने वालों के लिए मंगल चालीसा भी पढ़ी जा सकती है।
ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।