लक्ष्मी अष्टकम — आठ श्लोकों में माँ लक्ष्मी
संस्कृत में अष्टक का अर्थ होता है आठ श्लोकों की रचना। जब किसी देवता या देवी की स्तुति आठ श्लोकों में की जाती है, तो उसे अष्टकम कहा जाता है। लक्ष्मी अष्टकम उन्हीं पवित्र रचनाओं में से एक है, जिसमें माँ लक्ष्मी के रूप, वैभव और कृपा की महिमा आठ श्लोकों में गाई गई है। यह संक्षिप्त होते हुए भी पूर्ण स्तुति है, जिसे सीमित समय में भी श्रद्धापूर्वक पढ़ा जा सकता है।
लक्ष्मी अष्टकम क्या है
लक्ष्मी अष्टकम में माता लक्ष्मी को जगत की महामाया के रूप में वंदना की जाती है। इसमें माँ के उस स्वरूप का ध्यान कराया जाता है, जो पीताम्बर यानी पीले वस्त्र धारण करती हैं और भक्तों के घर वैभव का संचार करती हैं। स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक माँ के किसी न किसी गुण की ओर इंगित करता है — कभी उनके वैभव की ओर, तो कभी उनकी करुणा की ओर। यही कारण है कि धन संबंधी कामनाओं के साथ-साथ सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भी इस अष्टकम का पाठ किया जाता है।
प्रमुख श्लोक
नमस्तेस्तु महामाये पीताम्बरधरे प्रिये। श्रीरूपे श्रीधराराध्ये श्रीधरादिवल्लभे॥
इस श्लोक का भाव यह है — हे महामाया, हे पीले वस्त्र धारण करने वाली प्रिय देवी, आपको नमस्कार है। आप श्री अर्थात लक्ष्मी का स्वरूप हैं, भगवान श्रीधर (विष्णु) द्वारा पूजित हैं और श्रीधर की प्रियतमा हैं। सरल भाषा में यही कहा गया है कि जो माँ लक्ष्मी को ही सब कुछ मानकर नमस्कार करता है, उसे माँ कभी निराश नहीं करतीं।
कब पढ़ें
लक्ष्मी अष्टकम के लिए दीपावली और शुक्रवार का विशेष महत्व माना जाता है। शुक्रवार माँ लक्ष्मी का दिन कहा जाता है, अतः इस दिन प्रातःकाल पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। दीपावली की रात्रि को देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ इस अष्टकम का पाठ विशेष फलदायी कहा गया है। इसके अलावा जो भक्त निरंतर धन-समृद्धि की कामना करता है, वह इसे किसी भी दिन श्रद्धा से पढ़ सकता है।
विधि
पाठ के लिए प्रातः स्नान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। माँ लक्ष्मी का चित्र या मूर्ति सामने रखें। धूप-दीप जलाकर माँ को पीले फूल अर्पित करें। संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग माँ लक्ष्मी को प्रिय है। तत्पश्चात लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करें। पाठ के बाद माँ के चरणों में श्रद्धा से नमस्कार करके प्रसाद ग्रहण करें। पाठ की संख्या पर ध्यान देने की अपेक्षा भाव पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
लक्ष्मी अष्टकम् का पूर्ण पाठ
लाभ
- धन और वैभव की प्राप्ति की मान्यता है।
- घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
- शुक्रवार के पाठ से माँ की विशेष कृपा मानी जाती है।
- मन में स्थिरता आती है और आर्थिक चिंताएँ कम होती हैं।
लक्ष्मी अष्टकम के साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से स्तुति पूर्ण होती है। जो भक्त चाहें वे श्रीसूक्त का पाठ भी कर सकते हैं। पूर्ण विधि के लिए लक्ष्मी पूजा विधि देखें।
ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।