उच्छपीला शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यहाँ देवी सती का उदर गिरा था। कालिका देवी यहाँ की प्रमुख देवी हैं और तंत्र परंपरा में इस पीठ का विशेष महत्व है।
परिचय
उच्छपीला शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यह पीठ 51 शक्ति पीठों में से एक है, जहाँ देवी सती का उदर गिरा था। कालिका देवी यहाँ प्रमुख देवी के रूप में पूजित हैं।
प्राचीन काल से शक्ति उपासना का यह एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। कालिका देवी शक्ति के भयंकर रूपों में से एक हैं और उनकी उपासना तंत्र परंपरा में विशेष महत्व रखती है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने आप को अग्नि में समर्पित कर दिया, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित होकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया। जो अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे, वे शक्ति पीठ बन गए।
उच्छपीला में सती का उदर गिरा था। इस स्थान पर कालिका देवी का प्राकट्य हुआ। देवी भागवत पुराण में कालिका देवी की महिमा का विस्तृत वर्णन है। कालिका शब्द का अर्थ है काल की शक्ति — वह देवी जो काल पर शासन करती है।
भौगोलिक स्थिति
उच्छपीला शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह वाराणसी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। गंगा नदी इस क्षेत्र से होकर बहती है। गंगा-यमुना के मैदानी क्षेत्र में स्थित यह पीठ अपनी धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
ऐतिहासिक महत्व
वाराणसी क्षेत्र भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है। उच्छपीला भी इस प्राचीन परंपरा का भाग है। वाराणसी क्षेत्र में अनेक प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं।
गंगा-यमुना के मैदानी क्षेत्र में अनेक प्राचीन सभ्यताएँ विकसित हुईं। काशी विश्वनाथ, गंगा आरती और अनेक धार्मिक परंपराएँ इस क्षेत्र की पहचान हैं।
धार्मिक परंपरा
उच्छपीला शक्ति पीठ में कालिका देवी की विधिवत पूजा की जाती है। तंत्र परंपरा में कालिका देवी की उपासना का विशेष महत्व है। वक्ष भैरव को यहाँ का क्षेत्रपाल माना जाता है।
वाराणसी क्षेत्र की तंत्र परंपरा में कालिका उपासना का एक प्राचीन इतिहास है। अघोर संप्रदाय भी इस क्षेत्र में सक्रिय है।
वार्षिक उत्सव
उच्छपीला शक्ति पीठ में नवरात्रि का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। काली पूजा भी यहाँ विशेष रूप से की जाती है।
वाराणसी में गंगा दशहरा, महाशिवरात्रि और देव दीपावली भी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।
यात्रा मार्गदर्शन
उच्छपीला शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश में वाराणसी क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी भारत के प्रमुख धार्मिक नगरों में से एक है। निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वाराणसी में प्रमुख रेलवे स्टेशन है।
दिल्ली, प्रयागराज और लखनऊ से वाराणसी के लिए नियमित बस और ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं। यात्रा का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है।
विभिन्न परंपराओं में मतभेद
सती का उदर इस स्थान पर गिरा
— Pithanirnayaकालिका देवी — काल की शक्ति
— Pithanirnayaवक्ष भैरव — इस पीठ के क्षेत्रपाल
— Pithanirnayaउत्तर प्रदेश, भारत
— Pithanirnayaगंगा नदी के क्षेत्र में स्थित
— Pithanirnayaतंत्र परंपरा में विशेष महत्व
— Pithanirnayaवाराणसी क्षेत्र की प्राचीन परंपरा
— Pithanirnayaमतभेद और टिप्पणी
उच्छपीला शक्ति पीठ के स्थान और शरीर अंग के संबंध में कुछ परंपराओं में मतभेद हैं। कुछ स्रोत उदर के स्थान में भिन्नता रखते हैं।
यह लेख पीठनिर्णय, देवी भागवत पुराण, कुलार्णव तंत्र और वाराणसी की ऐतिहासिक परंपराओं पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उच्छपीला शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश में वाराणसी क्षेत्र में स्थित है।
पीठनिर्णय ग्रंथ के अनुसार देवी सती का उदर इस स्थान पर गिरा था।
यहाँ कालिका देवी की पूजा होती है, जो शक्ति का भयंकर रूप हैं।
कालिका देवी की उपासना तंत्र परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है।
वाराणसी से सड़क मार्ग से उच्छपीला पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
संबंधित शक्तिपीठ
स्रोत और संदर्भ
- उत्तर प्रदेश के शक्ति पीठ , बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
- तंत्र चूड़ामणि
- पीठनिर्णय
- वाराणसी जिला गजेटियर , उत्तर प्रदेश सरकार
- उत्तर प्रदेश पर्यटन , UP Tourism [link]
- देवी भागवत पुराण — वेदव्यास
- कुलार्णव तंत्र
- शिवपुराण — वेदव्यास