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प्रयागराज शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Prayagraj Shakti Peeth — दक्षिण स्कन्ध से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

Triveni Sangam, Prayagraj
Triveni Sangam, Prayagraj, Uttar Pradesh — Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

प्रयागराज शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ दायें कंधे के गिरने से संबंधित है और यहाँ माँ ललिता देवी की पूजा की जाती है। ललिता देवी को सौंदर्य और कृपा की देवी माना जाता है। प्रयागराज संगम नगरी है जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। भैरव भद्र यहाँ देवी के साथ विराजमान हैं।

परिचय

प्रयागराज शक्ति पीठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज में स्थित एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहाँ माँ ललिता देवी की पूजा की जाती है, जो सौंदर्य और कृपा की देवी हैं। प्रयागराज का संगम इस पीठ को और भी पवित्र बनाता है।

प्रयागराज पवित्र नगरी है जहाँ तीन पवित्र नदियों का संगम होता है। यह स्थान कुंभ मेले के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ललिता देवी को त्रिपुरसुंदरी भी कहा जाता है।

पौराणिक कथा

शक्ति पीठों की कथा सती और शिव से जुड़ी है। जब सती ने आत्मदाह किया, तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। सती के शरीर के 51 टुकड़े भारत के विभिन्न स्थानों पर गिरे।

प्रयागराज शक्ति पीठ वह स्थान है जहाँ सती का दायाँ कंधा गिरा था। ललिता देवी ने यहाँ अपनी कृपा की वर्षा की। संगम के पवित्र जल में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

भौगोलिक स्थिति

प्रयागराज शक्ति पीठ उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले में स्थित है। यह स्थान गंगा-यमुना के मैदान में आता है। निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है। रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन है।

सड़क मार्ग से दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी से अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है।

ऐतिहासिक महत्व

प्रयागराज का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है। वेदों में भी प्रयाग का उल्लेख मिलता है। महाकुंभ यहाँ हर 12 वर्षों में आयोजित होता है।

मुगल काल और ब्रिटिश काल में भी यह मंदिर अपनी पहचान बनाए रखा। स्वतंत्रता आंदोलन में भी प्रयागराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

धार्मिक परंपरा

प्रयागराज शक्ति पीठ में ललिता देवी की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। देवी की मूर्ति सोने से मढ़ी है और वह अष्टभुजाओं वाली हैं।

संगम पर दान और स्नान का विशेष महत्व है। पिंडदान और तर्पण भी यहाँ किया जाता है।

वार्षिक उत्सव

सबसे प्रमुख उत्सव महाकुंभ है जो 12 वर्षों में एक बार आयोजित होता है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा भी यहाँ मनाई जाती है।

मकर संक्रांति पर संगम में स्नान का विशेष महत्व है।

यात्रा मार्गदर्शन

निकटतम हवाई अड्डा बमरौली है। निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन है। मंदिर सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।

मंदिर के आसपास कई धर्मशालाएँ और होटल उपलब्ध हैं।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

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दायाँ कंधा यहाँ गिरा था

— शैव परंपरा
Devi_name

ललिता देवी - सौंदर्य और कृपा की देवी, त्रिपुरसुंदरी

— शाक्त परंपरा
Bhairava_name

भद्र भैरव - इस पीठ के रक्षक भैरव

— शैव परंपरा
Location

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश - संगम नगरी

— ऐतिहासिक परंपरा
Tradition

ललिता परंपरा - त्रिपुरसुंदरी पूजा

— तांत्रिक परंपरा

मतभेद और टिप्पणी

प्रयागराज शक्ति पीठ की पहचान को लेकर कुछ विवाद हैं। कुछ विद्वान इसे अन्य शक्ति पीठों से भ्रमित करते हैं।

संपादकीय टिप्पणी:

प्रयागराज शक्ति पीठ संगम नगरी की पवित्रता और ललिता देवी की कृपा का प्रतीक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रयागराज शक्ति पीठ में माँ ललिता देवी की पूजा की जाती है।

यह पीठ सती के दायें कंधे के गिरने से संबंधित है।

यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है।

महाकुंभ हर 12 वर्षों में एक बार आयोजित होता है।

निकटतम हवाई अड्डा बमरौली है और रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन है।

संगम में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

मंदिर सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • प्रयागराज का इतिहास — डॉ. राम नाथ त्रिपाठी , बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
  • कुंभ मेले का इतिहास — डॉ. कुमुद शर्मा , प्रकाशन विभाग
  • अर्थशास्त्र — कौटिल्य , प्राचीन ग्रंथ
  • मार्कंडेय पुराण — वेदव्यास , भारतीय धर्म ग्रंथ
  • देवी माहात्म्य — वेदव्यास , भारतीय धर्म ग्रंथ
  • भारतीय मंदिर वास्तुकला — माइकल मीस्टर , ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस
  • प्रयागराज जिला प्रशासन — प्रयागराज जिला प्रशासन , उत्तर प्रदेश सरकार [link]
  • पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश — पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश , उत्तर प्रदेश सरकार [link]
  • ललिता सहस्रनाम — विद्वान परंपरा , स्तोत्र ग्रंथ
  • दुर्गा सप्तशती — मार्कंडेय ऋषि , भारतीय धर्म ग्रंथ