देवगिरि शक्ति पीठ, महाराष्ट्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ माँ भवानी को समर्पित है, जो देवी के शरीर के दाएँ ठोड़ी पर गिरे भाग पर स्थापित है। यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ भवानी हैं। भैरव महा गणेश हैं। देवगिरि किला और यहाँ का शक्ति पीठ महाराष्ट्र के धार्मिक और ऐतिहासिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहाँ माँ भवानी की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस और विजय की प्राप्ति होती है।
परिचय
देवगिरि शक्ति पीठ, महाराष्ट्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ सती देवी के शरीर के दाएँ ठोड़ी पर गिरे भाग पर स्थापित है। यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ भवानी हैं, जो शक्ति और साहस की प्रतिमूर्ति हैं। भैरव महा गणेश हैं। देवगिरि, जिसे दौलताबाद के नाम से भी जाना जाता है, अपने प्रसिद्ध किले के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह स्थान दक्कन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
पौराणिक कथा
शाक्त पीठ निर्णय टीका और मार्कंडेय पुराण के अनुसार, जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राणों का त्याग किया, तो भगवान शिव क्रोधित होकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के विभिन्न भागों को काटा। महाराष्ट्र के इस क्षेत्र में माँ सती का दायाँ ठोड़ी गिरा। जब सती का ठोड़ी का भाग यहाँ गिरा, तो यहाँ एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई जो भवानी स्वरूप थी। भैरव महा गणेश के रूप में यहाँ विराजमान हुए।
भौगोलिक स्थिति
देवगिरि शक्ति पीठ महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में दौलताबाद किले के निकट स्थित है। यह स्थान दक्कन पठार पर स्थित है। औरंगाबाद शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। निकटतम हवाई अड्डा औरंगाबाद का छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डा है।
ऐतिहासिक महत्व
देवगिरि का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहन है। यह यादव वंश की राजधानी रहा है। 13वीं शताब्दी में महादेव यादव और रामचंद्र यादव ने यहाँ से शासन किया। देवगिरि का किला अपनी अभेद्य संरचना के लिए प्रसिद्ध है। 14वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने इस पर आक्रमण किया। मुगल सम्राट औरंगजेब ने इसका नाम दौलताबाद रखा। आज यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।
धार्मिक परंपरा
देवगिरि शक्ति पीठ की धार्मिक परंपरा अत्यंत समृद्ध है। यहाँ माँ भवानी की पूजा शाक्त परंपरा के अनुसार की जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज भी माँ भवानी के अत्यंत बड़े भक्त थे। नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा होती है। मंदिर में दिन में तीन बार आरती होती है।
वार्षिक उत्सव
नवरात्रि यहाँ का प्रमुख उत्सव है। अश्विन नवरात्रि के दौरान दशहरा बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जो मराठी संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। शिवरात्रि और गणेश चतुर्थी भी धूमधाम से मनाई जाती है।
यात्रा मार्गदर्शन
निकटतम हवाई अड्डा औरंगाबाद का छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डा है। रेल मार्ग से औरंगाबाद रेलवे स्टेशन निकटतम है। सड़क मार्ग से मुंबई, पुणे, हैदराबाद और नागपुर से बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से फरवरी तक है।
विभिन्न परंपराओं में मतभेद
दायाँ ठोड़ी - Right chin
— शाक्त परंपराभवानी - Bhavani
— शाक्त परंपरामहा गणेश - Maha Ganesh
— शाक्त परंपरादेवगिरि, औरंगाबाद, महाराष्ट्र
— शाक्त परंपराशाक्त परंपरा - 51 शक्ति पीठ
— शाक्त परंपरामतभेद और टिप्पणी
देवगिरि शक्ति पीठ की पहचान को लेकर कुछ विवाद रहे हैं। प्रमुख विवाद यह है कि कुछ स्रोतों में इसे दाएँ ठोड़ी का पीठ बताया गया है। दूसरा विवाद भवानी और तुलजा भवानी की पहचान को लेकर है। तीसरा विवाद भैरव महा गणेश की अद्वितीय पहचान को लेकर है।
यह लेख विभिन्न पौराणिक ग्रंथों, शाक्त पीठ निर्णय टीका, महाभागवत पुराण और स्थानीय परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे दर्शन और पूजा के संबंध में स्थानीय पुजारियों से परामर्श करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देवगिरि शक्ति पीठ महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में दौलताबाद किले के निकट स्थित है।
यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ भवानी हैं।
इस पीठ के भैरव महा गणेश हैं।
यह पीठ माँ सती के दाएँ ठोड़ी पर गिरे भाग पर स्थापित है।
देवगिरि किला यादव वंश की राजधानी रहा है और इसकी अभेद्य संरचना के लिए प्रसिद्ध है।
निकटतम हवाई अड्डा औरंगाबाद और रेलवे स्टेशन भी औरंगाबाद है।
संबंधित शक्तिपीठ
स्रोत और संदर्भ
- महाराष्ट्र के शक्ति पीठ — डॉ. सुरेश गाडगीळ , पुणे विश्वविद्यालय
- दक्कन का इतिहास — डॉ. आर.एस. शर्मा , ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस
- अर्धकोश — मुंशी रामनाथ सुकुल
- शाक्त पीठ निर्णय टीका — कलिका पुराण की टीका
- मार्कंडेय पुराण — ऋषि मार्कंडेय , आदि पराशर
- भारतीय तीर्थ स्थल निर्देशिका — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- भवानी अष्टक — स्थानीय परंपरा