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भीमाशंकर शक्तिपीठ

Bhimashankar — दक्षिण हस्त अंगुली से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

Bhimashankar Temple
Bhimashankar Temple, Pune, Maharashtra — Wikimedia Commons (CC BY-SA)

भीमाशंकर शक्ति पीठ महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। यहाँ देवी सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ गिरी थीं। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक भी है।

परिचय

भीमाशंकर शक्ति पीठ महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। यह पीठ 51 शक्ति पीठों में से एक है, जहाँ देवी सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ गिरी थीं। यह स्थान सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है और भीमा नदी के उद्गम स्थान के निकट है।

भीमाशंकर मंदिर शैव और शाक्त दोनों परंपराओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग और देवी महिषासुर मर्दिनी दोनों की पूजा होती है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने आप को अग्नि में समर्पित कर दिया, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित होकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया। जो अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे, वे शक्ति पीठ बन गए।

भीमाशंकर में सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ गिरी थीं। एक अन्य कथा के अनुसार भीमा नदी के तट पर भगवान शिव का तपस्या करने का स्थान भी यहीं है। मार्कण्डेय पुराण में इस स्थान की महिमा का वर्णन है।

भौगोलिक स्थिति

भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यह पुणे शहर से लगभग 110 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई लगभग 1035 मीटर है। भीमा नदी इस क्षेत्र से होकर बहती है। सह्याद्रि पर्वत की हरी-भरी घाटियाँ और घने वन इस क्षेत्र की विशेषता हैं।

ऐतिहासिक महत्व

भीमाशंकर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस मंदिर की देखरेख और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिवाजी महाराज ने इस मंदिर को अनेक भूमिदान प्रदान किए। मराठा साम्राज्य के काल में यह मंदिर एक प्रमुख धार्मिक केंद्र था।

पुरातत्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि यह स्थान कम से कम 10वीं शताब्दी से एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा है। यहाँ के शिलालेख मराठा और चालुक्य वंश के शासनकाल का संदर्भ देते हैं।

धार्मिक परंपरा

भीमाशंकर मंदिर में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग और देवी महिषासुर मर्दिनी दोनों की पूजा होती है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। साथ ही यह 51 शक्ति पीठों में से एक भी है। शैव और शाक्त परंपराओं का यहाँ अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

देवी महिषासुर मर्दिनी की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के अवसर पर की जाती है। खैरव भैरव को यहाँ का क्षेत्रपाल माना जाता है। श्रद्धालु शिव और शक्ति दोनों की पूजा करते हैं।

वार्षिक उत्सव

भीमाशंकर मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि के अवसर पर भी विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रावण मास में भी यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता है।

गणेश चतुर्थी भी यहाँ बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिर परिसर में विशेष भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यात्रा मार्गदर्शन

भीमाशंकर पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है। पुणे से भीमाशंकर सड़क मार्ग से लगभग 110 किलोमीटर दूर है। निकटतम हवाई अड्डा पुणे का लोहगाँव हवाई अड्डा है। निकटतम रेलवे स्टेशन पुणे है।

पुणे से बस और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं। भीमाशंकर तक सड़क अच्छी है लेकिन पहाड़ी रास्ते हैं। यात्रा का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मई है। मानसून में यहाँ भारी वर्षा होती है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

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सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ यहाँ गिरीं

— Pithanirnaya
Devi

महिषासुर मर्दिनी — दुष्टों का संहार करने वाली

— Pithanirnaya
Bhairava

खैरव भैरव — इस पीठ के क्षेत्रपाल

— Pithanirnaya
Location

पुणे जिला, सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला, महाराष्ट्र

— Pithanirnaya
Jyotirlinga

यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है

— Pithanirnaya
River

भीमा नदी का उद्गम स्थान निकट है

— Pithanirnaya
Historical

छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस मंदिर का विकास किया

— Pithanirnaya

मतभेद और टिप्पणी

भीमाशंकर के स्थान के संबंध में कुछ मतभेद हैं। गुजरात में भी एक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग है। कुछ परंपराएँ दाहिने हाथ की उंगलियों के स्थान में भिन्नता रखती हैं।

संपादकीय टिप्पणी:

यह लेख पीठनिर्णय, शिवपुराण, देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यह पुणे से लगभग 110 किलोमीटर दूर है।

हाँ, भीमाशंकर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और साथ ही 51 शक्ति पीठों में से एक भी है।

पीठनिर्णय ग्रंथ के अनुसार देवी सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ यहाँ गिरी थीं।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस मंदिर को अनेक भूमिदान प्रदान किए और इसके विकास में योगदान दिया।

अक्टूबर से मई का समय सबसे उपयुक्त है। मानसून में भारी वर्षा होती है।

पुणे से बस या टैक्सी द्वारा भीमाशंकर पहुँचा जा सकता है। सड़क अच्छी है लेकिन पहाड़ी रास्ते हैं।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • महाराष्ट्र के शक्ति पीठ , पुणे विश्वविद्यालय
  • छत्रपति शिवाजी महाराज के अभिलेख
  • पीठनिर्णय
  • पुणे जिला गजेटियर , महाराष्ट्र सरकार
  • महाराष्ट्र पर्यटन , Maharashtra Tourism [link]
  • शिवपुराण — वेदव्यास
  • देवी भागवत पुराण — वेदव्यास
  • मार्कण्डेय पुराण