भुवनेश्वर शक्तिपीठ ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर नगरी में स्थित एक प्राचीन शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, जब देवी सती की नाभि इस पवित्र स्थान पर गिरी, तब यहाँ विरजा देवी का प्राकट्य हुआ। जगन्नाथ भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं।
परिचय
भुवनेश्वर शक्तिपीठ ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर नगरी में स्थित एक प्राचीन और पूजनीय शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार यहाँ देवी सती की नाभि गिरी थी, जिससे विरजा देवी का प्राकट्य हुआ। विरजा का अर्थ है शुद्ध और पवित्र।
भुवनेश्वर को काल का मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ 700 से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित हैं। भुवनेश्वर शक्तिपीठ इन अनेक मंदिरों में से एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह क्षेत्र शैव, शाक्त और वैष्णव तीनों परंपराओं का संगम स्थल है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में देवी सती ने अग्नि में स्वयं को समर्पित किया, तब भगवान शिव अत्यंत व्याकुल हो गए। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंगों को काटकर पृथ्वी पर गिराया।
पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार, देवी सती की नाभि भुवनेश्वर के इस स्थान पर गिरी। नाभि जीवन शक्ति का केंद्र मानी जाती है। विरजा देवी को सम्पूर्ण जीवन शक्ति की स्वामिनी माना जाता है। ओडिशा के प्राचीन ग्रंथों में विरजा देवी की महिमा का विस्तृत वर्णन है।
शिवपुराण और देवी भागवत पुराण में भी शक्तिपीठों की महिमा का वर्णन मिलता है। ओडिशा के स्थानीय ग्रंथों में भी विरजा देवी की स्तुति मिलती है।
भौगोलिक स्थिति
भुवनेश्वर शक्तिपीठ ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर नगरी में स्थित है। भुवनेश्वर समुद्र तल से लगभग 45 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह नगर उत्तरी ओडिशा में महानदी के तट पर बसा है।
भुवनेश्वर हवाई अड्डा भारत के अनेक प्रमुख नगरों से जुड़ा है। भुवनेश्वर और कटक रेलवे स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और दिल्ली से सीधी ट्रेनें और उड़ानें उपलब्ध हैं।
ऐतिहासिक महत्व
भुवनेश्वर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यह शहर कलिंग साम्राज्य की राजधानी था। कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और इस क्षेत्र में अनेक बौद्ध स्मारकों का निर्माण करवाया। उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएँ इसके प्रमाण हैं।
सोमवंशी राजाओं ने 7वीं से 13वीं शताब्दी तक भुवनेश्वर में अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया। लिंगराज मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर और राजारानी मंदिर इसी काल की देन हैं। भुवनेश्वर शक्तिपीठ भी इसी प्राचीन परंपरा का एक हिस्सा है।
धार्मिक परंपरा
भुवनेश्वर शक्तिपीठ में मां विरजा देवी की पूजा होती है। जगन्नाथ भैरव यहाँ रक्षक के रूप में विराजमान हैं। ओडिशा की प्राचीन शक्ति उपासना परंपरा में यह मंदिर अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। ओडिशा की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा यहाँ बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। जगन्नाथ पुरी के साथ भी इस पीठ का धार्मिक संबंध है।
वार्षिक उत्सव
भुवनेश्वर शक्तिपीठ में नवरात्रि सबसे प्रमुख उत्सव है। दुर्गा पूजा ओडिशा का सबसे बड़ा उत्सव है और भुवनेश्वर में इसका विशेष महत्व है। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष पूजा और हवन किया जाता है।
महाशिवरात्रि, रथ यात्रा, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा भी भुवनेश्वर के प्रमुख उत्सव हैं। ओडिशा की प्रसिद्ध रथ यात्रा भी यहाँ से जुड़ी है।
यात्रा मार्गदर्शन
भुवनेश्वर शक्तिपीठ पहुँचने के लिए भुवनेश्वर हवाई अड्डा प्रमुख हवाई अड्डा है। भुवनेश्वर और कटक रेलवे स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद से सीधी ट्रेनें और उड़ानें उपलब्ध हैं।
भुवनेश्वर शहर के भीतर ऑटो रिक्शा और टैक्सी के माध्यम से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। भुवनेश्वर में ठहरने के लिए अनेक होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। जगन्नाथ पुरी भी भुवनेश्वर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है।
विभिन्न परंपराओं में मतभेद
नाभि
— Pithanirnayaविरजा
— Pithanirnayaजगन्नाथ
— Pithanirnayaभुवनेश्वर, ओडिशा
— Pithanirnayaकाल का मंदिर, 700+ प्राचीन मंदिर
— Historicalशैव-शाक्त-वैष्णव संयुक्त परंपरा
— Pithanirnayaमतभेद और टिप्पणी
भुवनेश्वर शक्तिपीठ के संबंध में कुछ ग्रंथों में नाभि के स्थान पर अन्य शरीर अंगों का उल्लेख भी मिलता है। ओडिशा में अन्य शक्तिपीठों के साथ इसकी पहचान को लेकर भी कुछ भिन्नताएँ हैं।
यह लेख पीठनिर्णय स्थानमाला, शिवपुराण, देवी भागवत पुराण और ओडिशा की स्थानीय परंपराओं पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भुवनेश्वर शक्तिपीठ ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर नगरी में स्थित है। यह नगर 700 से अधिक प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।
विरजा देवी का अर्थ है शुद्ध और पवित्र देवी। उन्हें सम्पूर्ण जीवन शक्ति की स्वामिनी माना जाता है।
पीठनिर्णय स्थानमाला के अनुसार यहाँ देवी सती की नाभि गिरी थी।
भुवनेश्वर में 700 से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, इसलिए इसे काल का मंदिर कहा जाता है।
भुवनेश्वर हवाई अड्डा भारत के प्रमुख नगरों से जुड़ा है। भुवनेश्वर और कटक रेलवे स्टेशन प्रमुख हैं।
नवरात्रि, दुर्गा पूजा, महाशिवरात्रि और रथ यात्रा प्रमुख उत्सव हैं।
स्रोत और संदर्भ
- भुवनेश्वर: मंदिर नगरी , उत्कल विश्वविद्यालय
- सोमवंशी अभिलेख , भारतीय पुरातत्व विभाग
- पीठनिर्णय स्थानमाला — अत्रि
- शिवपुराण — वेद व्यास
- ओडिशा पर्यटन
- देवी भागवत पुराण — वेद व्यास
- मार्कण्डेय पुराण