सूर्य देव को सृष्टि का प्रत्यक्ष देवता और आरोग्य, समृद्धि तथा ज्ञान का स्रोत माना गया है। वेदों में सूर्य को आदित्य, भास्कर, दिवाकर जैसे नामों से पुकारा गया है। इस लेख में सूर्य देव पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, सूर्य मंत्र, सूर्य गायत्री और रविवार पूजन के नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

सूर्य देव का महत्व

परंपरा के अनुसार सूर्य ब्रह्मांड की ऊर्जा का आधार और नवग्रहों के राजा माने गए हैं। इन्हें सूर्य नारायण कहा जाता है। आदित्य हृदय स्तोत्र में सूर्य को समस्त देवताओं का जीवन-स्रोत बताया गया है। रविवार सूर्य देव का दिन माना गया है, जब सूर्य अर्घ्य, रविवार व्रत और सूर्य नमस्कार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सूर्य पूजा से आरोग्य, मान-सम्मान, तेज और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सूर्य देव पूजा कब करें?

  • रविवार: प्रत्येक रविवार को सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य का विशेष विधान है।
  • विशेष तिथियाँ: रथ सप्तमी, मकर संक्रांति, कर्क संक्रांति, सूर्य षष्ठी (छठ पूजा) और अर्क सप्तमी पर विशेष पूजन होता है।
  • नित्य: प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से एक लोटा जल अर्घ्य देना भी पर्याप्त और शुभ माना गया है।

सूर्य देव पूजा की सामग्री

  • तांबे का लोटा और थाली (सूर्य को तांबा अत्यंत प्रिय है),
  • लाल चंदन, रोली/कुमकुम, अक्षत,
  • लाल पुष्प — गुड़हल या कमल, लाल वस्त्र,
  • गुड़, गेहूँ, तिल, जल,
  • धूप, दीप, कपूर, मिठाई (प्रसाद),
  • सूर्य देव की प्रतिमा या तांबे का सूर्य यंत्र।

सूर्य देव पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं वस्त्र

रविवार या पूजा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें — ये सूर्य देव के प्रिय रंग माने गए हैं। पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सूर्य प्रतिमा/यंत्र स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:

ॐ आदित्याय नमः सूर्यपूजनं करिष्ये। ॐ गणं गणपतये नमः।

चरण 2 — सूर्य अर्घ्य

तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चंदन, लाल पुष्प, रोली/कुमकुम, अक्षत और थोड़ा गुड़ डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य की ओर देखते हुए जल को पतली धार के साथ अर्घ्य चढ़ाएँ। लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर सिर के ऊपर रखें और जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें। अर्घ्य के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ घृणिः सूर्याय नमः। ॐ सूर्याय नमः।

ध्यान दें: जल की धारा पैरों पर न गिरे — नीचे पात्र रखें। स्टील, प्लास्टिक या काँच के बर्तन से सूर्य को अर्घ्य न दें। दोपहर के समय अर्घ्य देना वर्जित माना गया है।

चरण 3 — ध्यान एवं पूजन

अर्घ्य के बाद सूर्य देव का ध्यान करें। सूर्य प्रतिमा/यंत्र पर लाल चंदन का तिलक लगाएँ, लाल पुष्प अर्पित करें, धूप-दीप दिखाएँ और गुड़-गेहूँ का भोग लगाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ सूर्याय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 4 — सूर्य मंत्र एवं सूर्य गायत्री का जाप

सूर्य देव की कृपा के लिए सूर्य बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। इसके बाद सूर्य गायत्री मंत्र का जप करें:

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥

चरण 5 — सूर्य देव के बारह नाम

रविवार को सूर्य अर्घ्य के समय सूर्य देव के बारह नामों का जप करना विशेष शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आरोग्य, समृद्धि और ग्रह-शांति मिलती है:

ॐ मित्राय नमः। ॐ रवये नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ भानवे नमः। ॐ खगाय नमः। ॐ पूष्णे नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। ॐ मरीचये नमः। ॐ आदित्याय नमः। ॐ सवित्रे नमः। ॐ अर्काय नमः। ॐ भास्कराय नमः॥

चरण 6 — आरती एवं प्रसाद

पूजन के बाद सूर्य देव की आरती करें और गुड़ से बनी मिठाई या फल का प्रसाद परिवार में वितरण करें। संभव हो तो सप्ताह में एक बार आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें, जो सूर्य उपासना का सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। पूजा की समाप्ति पर सूर्य देव को प्रणाम कर अपनी मनोकामना प्रकट करें।

सूर्य देव पूजा के नियम

  • सूर्य को अर्घ्य सदैव सूर्योदय के बाद प्रातःकाल में ही दें, दोपहर में नहीं।
  • अर्घ्य के लिए केवल तांबे का पात्र उपयोग करें; स्टील, प्लास्टिक और काँच वर्जित हैं।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर अर्घ्य दें।
  • सूर्य की ओर जल अर्पित करते समय पैरों पर जल न गिराएँ।
  • पूजा में लाल/नारंगी वस्त्र और लाल पुष्प का उपयोग शुभ माना गया है।
  • सूर्य संबंधी ग्रह-दोष की शांति के लिए प्रत्येक रविवार का अर्घ्य-पूजन नियमित करें।