ॐ जय यमुना माता यमुना मैया की प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।

ॐ जय यमुना माता — यमुना आरती का महत्व

यमुना जी को भगवान कृष्ण की बहन और कालिंदी माना जाता है। इसमें यमुना स्नान के फल, यम के त्रास से रक्षा और कंस-वध तक की महिमा का वर्णन है। यम द्वितीया और प्रतिदिन स्नान के समय इस आरती का प्रचलन है।

आरती

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।जो नहावे फल पावे, सुख सम्पत्ति की दाता॥ ॐ जय यमुना माता...
पावन श्रीयमुना जल, शीतल अगम बहै धारा।जो जन शरण में आया, कर दिया निस्तारा॥ ॐ जय यमुना माता...
जो जन प्रातः ही उठकर, नित्य स्नान करे।यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे॥ ॐ जय यमुना माता...
कलिकाल में महिमा, तुम्हारी अटल रही।तुम्हारा बड़ा माहात्म्य, चारों वेद कही॥ ॐ जय यमुना माता...
आन तुम्हारे माता, प्रभु अवतार लियो।नित्य निर्मल जल पीकर, कंस को मार दियो॥ ॐ जय यमुना माता...
नमो मात भय हरणी, शुभ मंगल करणी।मन बेचैन भया है, तुम बिन वैतरणी॥ ॐ जय यमुना माता...
ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।जो नहावे फल पावे, सुख सम्पत्ति की दाता॥ ॐ जय यमुना माता...
आरती का समय
प्रतिदिन, विशेषतः यम द्वितीया पर

आरती विधि

यमुना घाट पर या घर में यमुना जल रखकर कपूर जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें।

संदर्भ: भक्त वत्सल — bhaktvatsal.com

लाभ

यम के त्रास से रक्षा।
पापों का नाश।
सुख-संपत्ति की प्राप्ति।