विजयादशमी (दशहरा) आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजय का पर्व है। इस दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाया जाता है। विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता, शमी वृक्ष एवं शस्त्रों की पूजा का विशेष विधान है। इस लेख में विजयादशमी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र और नियम की विस्तृत जानकारी दी गई है।
विजयादशमी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी और माता दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। युद्ध में जाने से पूर्व भगवान श्रीराम ने विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता की पूजा की थी, जिससे उन्हें विजय का आशीर्वाद मिला। नवरात्रि की समाप्ति पर माता दुर्गा अपनी मूल शक्ति आदिशक्ति के रूप में अपराजिता बनकर हिमालय में अंतर्ध्यान हो गईं। इसी कारण इस दिन अपराजिता देवी की आराधना, शमी पूजन और शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन की पूजा से वर्ष भर कार्यों में विजय मिलती है।
विजयादशमी पूजा कब करें?
- विजयादशमी: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी।
- पूजा काल: अपराह्न काल (दोपहर बाद) — विजय मुहूर्त में पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
- स्थान: अपराजिता पूजा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में करें।
विजयादशमी पूजा की सामग्री
- देवी अपराजिता की प्रतिमा या चित्र,
- अपराजिता के पुष्प (नीले फूल) या कोई भी पुष्प,
- शमी के पत्ते, शमी वृक्ष की टहनी,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी, सिंदूर,
- पुष्प, पुष्पमाला, धूप, दीपक, कपूर, घंटी,
- कलश, गंगाजल, पंचामृत,
- फल, मिठाई, नैवेद्य, नारियल,
- लाल वस्त्र/चुनरी, दूर्वा, मौली (कलावा),
- हल्दी में रंगा वस्त्र और सरसों (डोरा बनाने हेतु),
- शस्त्र/हथियार या प्रतीक (शस्त्र पूजन हेतु), पुस्तक (विद्या प्रारंभ हेतु)।
विजयादशमी पूजा विधि (संपूर्ण क्रम)
विजयादशमी की पूजा में मुख्य रूप से अपराजिता देवी, शमी वृक्ष और शस्त्रों का पूजन किया जाता है। संपूर्ण क्रम निम्न है:
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर गोबर या चंदन से लीपें। चंदन से आठ पत्तियों वाले कमल का चिह्न बनाएं और उसके मध्य में अपराजिता का पौधा या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:
चरण 2 — अपराजिता, जया एवं विजया का आवाहन-पूजन
अक्षत से बने अष्टदल (आठ पंखुड़ियों) के चिह्न पर देवी अपराजिता की प्रतिमा स्थापित करें। देवी अपराजिता के दाहिनी ओर जया और बायीं ओर विजया शक्ति का आवाहन करें। तीनों का पूजन क्रमशः इन मंत्रों से करें:
ॐ जयायै नमः।
ॐ विजयायै नमः।
देवी अपराजिता का पूजन करते हुए सभी उपचार अर्पित करें:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
अपराजिता, जया और विजया देवी से विजय की प्रार्थना करें:
चरण 3 — विजय-डोरा (रक्षा-सूत्र) बनाना
हल्दी से रंगे हुए वस्त्र में दूर्वा और सरसों रखकर डोरा बनाएं। इस डोरे को 'सदापराजिते' मंत्र से अभिमंत्रित करें:
सर्वकामार्थसिद्ध्यर्थं तस्मात्त्वां धारयाम्यहम्।
अभिमंत्रित डोरे को निम्न मंत्र पढ़ते हुए दाहिने हाथ में धारण करें:
धारयामि भुजे दक्षे जयलाभाभिवृद्धये।
चरण 4 — शमी पूजन
शमी वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर विधिवत पूजन करें। शमी पूजन से यात्रा में विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और कार्य में सफलता मिलती है। शमी पूजन करते हुए मंत्र का उच्चारण करें:
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी।
शमी के पत्तों को स्वर्ण-प्रतीक मानकर लोग एक-दूसरे को देते-लेते हैं। शमी पूजन के बाद सीमा उल्लंघन (अपने गांव/शहर की सीमा लांघकर बाहर जाना) शुभ माना गया है।
चरण 5 — शस्त्र पूजन
विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का विशेष विधान है। शस्त्रों को शुद्ध कर उन पर रोली-अक्षत और पुष्प चढ़ाएं, चंदन का तिलक करें और धूप-दीप अर्पित करें। शस्त्र पूजन से वीरता और रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चरण 6 — विद्या प्रारंभ एवं आरती
इस दिन बच्चों का विद्यारंभ (अक्षराभ्यास) कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। माता सरस्वती की पूजा कर पुस्तकों को पूजन करें। अंत में माता दुर्गा/अपराजिता देवी की आरती करें, नारियल अर्पित करें और प्रसाद वितरण करें।
विजयादशमी पूजा के नियम
- अपराजिता पूजा विजय मुहूर्त में (अपराह्न काल) करें।
- पूजा स्थल की स्वच्छता और दिशा (ईशान कोण) का विशेष ध्यान रखें।
- पूजा के समय शुद्ध मन और सात्विक आचरण रखें; किसी का अपमान या क्रोध न करें।
- इस दिन नए कार्य, व्यापार, यात्रा और शुभ आरंभ करना शुभ माना जाता है।
- शमी पूजन के बाद शमी के पत्तों को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
- रावण दहन के पश्चात सभी परिवारजन विजय का उत्सव मनाएं।
- नवरात्रि की घटस्थापना एवं कन्या पूजन की विधि के लिए घटस्थापना विधि एवं कन्या पूजन विधि लेख देखें।
विजयादशमी के दिन अपराजिता देवी, शमी और शस्त्रों की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी कार्यों में विजय, उन्नति और सफलता प्राप्त होती है।