दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी) नवरात्रि का आठवाँ दिन है। इस दिन प्रचलित क्रम में माँ दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा होती है। अष्टमी का दिन नवरात्रि के सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है — कई स्थानों पर इसी दिन संधि-पूजा, कन्या पूजन और विशेष अनुष्ठान होते हैं। इस लेख में दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि, संधि पूजा, कन्या पूजन और नियम दिए गए हैं।
पूरी नवरात्रि की विधि नवरात्रि पूजा विधि, नवमी की विधि महानवमी पूजा विधि और कन्या पूजन कन्या पूजन विधि पृष्ठ पर देखें।
दुर्गा अष्टमी का महत्व
नवरात्रि में अष्टमी-नवमी को मुख्य पूजन-दिवस माना जाता है। अष्टमी के दिन महागौरी पूजा प्रचलित है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस दिन माँ ने अपने उग्र रूप का संधान किया और कुछ परंपराओं में यह दिन दुर्गा-महिषासुर संघर्ष से जुड़ा माना जाता है। अष्टमी को देवी-शक्ति की विशेष उपासना का दिन माना गया है।
दुर्गा अष्टमी पूजा की तैयारी
- कलश/मूर्ति और नौ दिनों की स्थापना बनी रहती है — घटस्थापना देखें।
- पूजा सामग्री — रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, कपूर।
- हवन-सामग्री (जहाँ हवन हो)।
- कन्या पूजन हेतु भोजन-प्रसाद की व्यवस्था (जहाँ प्रचलन हो)।
दुर्गा अष्टमी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजन-व्रत का संकल्प करें:
दुर्गाष्टमीपूजां करिष्ये।
चरण 2 — महागौरी का ध्यान एवं पूजन
अष्टमी के दिन महागौरी रूप का ध्यान करते हुए सामान्य दुर्गा-उपचार करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 3 — दुर्गा मंत्र जप
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
चरण 4 — संधि-काल पूजा
कुछ परंपराओं में अष्टमी और नवमी के संधि-काल (अष्टमी के अंतिम घंटे तथा नवमी के प्रारंभिक घंटे) में विशेष पूजा होती है — इसे संधि पूजा कहते हैं। यह मुख्यतः पंचांग-निर्धारित काल में की जाती है; सटीक समय पंचांग देखें।
चरण 5 — हवन
कई स्थानों पर अष्टमी-नवमी को हवन किया जाता है। हवन में दुर्गा मंत्रों के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं। हवन के लिए विधि जानने वाले पंडित की सहायता लेना उचित है।
चरण 6 — कन्या पूजन
कई स्थानों पर अष्टमी के दिन ही कन्या पूजन किया जाता है — संपूर्ण विधि कन्या पूजन विधि पृष्ठ पर देखें।
चरण 7 — चालीसा पाठ एवं आरती
शाम को दुर्गा चालीसा पाठ और आरती — जय अम्बे गौरी — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
दुर्गा अष्टमी के नियम
- अष्टमी व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें; बीमार, वृद्ध और बच्चों के लिए व्रत अनिवार्य नहीं।
- अष्टमी-पूजन में शुद्धता और संयम का विशेष ध्यान रखें।
- संधि-पूजा और हवन के लिए पंचांग-समय और विधि-जानकार पंडित का सहयोग लें।
- क्षेत्रीय पद्धति के अनुसार पूजन-क्रम भिन्न हो सकता है।