वास्तु शांति पूजा घर, दुकान या भवन में वास्तु दोष को दूर करने और सुख-शांति बनाए रखने के लिए की जाने वाली वैदिक पूजा है। इसमें वास्तुदेव, भूमि देवी और नवग्रहों का पूजन तथा वास्तु शांति हवन किया जाता है। इस लेख में वास्तु शांति पूजा की संपूर्ण विधि, मुहूर्त, सामग्री, मंत्र और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
वास्तु शांति पूजा का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या भवन में वास्तु दोष होने पर परिवार में अशांति, कलह, स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं और आर्थिक कष्ट आते हैं — ऐसी मान्यता है। वास्तु शांति पूजा का उद्देश्य वास्तुदेव को प्रसन्न कर वास्तु दोषों को शांत करना है। गृह प्रवेश से पूर्व या घर में लगातार बाधाओं की स्थिति में वास्तु शांति पूजा करने का विधान है। ऋग्वेद के वास्तोष्पति सूक्त में वास्तुदेव को गृह-रक्षक बताया गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक वास्तु शांति पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
वास्तु शांति पूजा कब करें?
- गृह प्रवेश से पहले — नए घर में प्रवेश से पूर्व वास्तु शांति का विशेष विधान है।
- घर में लगातार अशांति, कलह या बाधाएं होने पर।
- वास्तु दोष निवारण के लिए।
- नवरात्रि, ग्रहण, संक्रांति जैसे पर्वों पर वास्तु शांति के लिए।
- शुभ मुहूर्त में — पंचांग देखकर।
वास्तु शांति पूजा की सामग्री
- वास्तुदेव की प्रतिमा/चित्र या वास्तु पुरुष मंडल,
- ताम्र कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली,
- गंगाजल, पंचामृत,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी,
- पुष्प, पुष्पमाला, दूर्वा, बिल्वपत्र,
- जौ, तिल, गुड़, पीली सरसों,
- धूप, दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
- नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, दही-चावल,
- हवन सामग्री — आम की समिधा, घी, सप्तधान्य।
वास्तु शांति पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — घर की सफाई एवं संकल्प
पूजा से पहले संपूर्ण घर की सफाई करें। गंगाजल का छिड़काव करें और यथासंभव गोबर-लेपन से भूमि को पवित्र करें। मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधें। हाथ में जल-अक्षत-पुष्प लेकर वास्तु शांति पूजा का संकल्प लें:
चरण 2 — गणेश पूजन
विघ्नों की निवृत्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन करें।
चरण 3 — कलश स्थापना
कलश में गंगाजल भरकर मौली से लपेटें, आम के पत्ते लगाएं और नारियल रखें। सप्तधान्य के ऊपर कलश स्थापित कर कलश का पूजन करें।
चरण 4 — वास्तुदेव का आवाहन एवं पूजन
वास्तु प्रतिमा/वास्तु पुरुष मंडल के सम्मुख वास्तुदेव का आवाहन करें। आवाहन के समय वास्तोष्पति सूक्त का उच्चारण करें:
आवाहन के बाद वास्तुदेव का षोडशोपचार से पूजन करें। उपचार अर्पित करते समय मंत्र का उच्चारण करें:
नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जाने वाली वस्तु का नाम बोलें — जैसे “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि”, “… नमः नैवेद्यं समर्पयामि” आदि।
चरण 5 — नवग्रह पूजन
ग्रहों की शांति के लिए नवग्रहों का स्मरण कर पूजन करें:
चरण 6 — वास्तु शांति हवन
हवन कुंड में गायत्री मंत्र से आहुतियां दें। उसके बाद आम की समिधा, जौ, तिल और पीली सरसों की आहुति दें। वास्तु शांति हेतु वास्तोष्पति सूक्त से आहुति दें:
चरण 7 — बलि, क्षमा प्रार्थना एवं पूर्णाहुति
वास्तु के निमित्त दधि-उड़द (दही और माष) की बलि अर्पित करें। वास्तुदेव की क्षमा प्रार्थना करें:
पूर्णाहुति के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें। गंगाजल का छिड़काव कर घर को पवित्र करें।
वास्तु शांति पूजा के नियम
- वास्तु शांति पूजा शुभ मुहूर्त में ही करें।
- पूजा से पहले संपूर्ण घर की सफाई करें।
- पूजा पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करें।
- पूजा के दौरान संयम रखें और वर्जित वचन न बोलें।
- वास्तु दोष गंभीर हो तो योग्य वैदिक आचार्य से पूजा करवाएं।
- पूजा के बाद घर की नियमित सफाई और गंगाजल का छिड़काव करते रहें।
वास्तु शांति पूजा से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए वास्तु पूजा विधि और गृह प्रवेश पूजा विधि भी देखें।