शिलान्यास पूजा नए भवन के निर्माण कार्य की नींव (शिला) रखने की विधि है। गृह्यसूत्रों में शिलान्यास को गृहारंभ का अनिवार्य संस्कार बताया गया है। इस लेख में शिलान्यास पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, शिला मंत्र, मुहूर्त और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

शिलान्यास का महत्व

शिलान्यास गृह निर्माण की पहली ईंट यानी नींव रखने का शुभ संस्कार है। वास्तु शास्त्र में नींव को भवन की रीढ़ माना गया है — जिस प्रकार नींव मजबूत होती है, उसी प्रकार पूरा भवन मजबूत रहता है। मान्यता है कि शास्त्रोक्त विधि से शिलान्यास करने पर निर्माण कार्य निर्विघ्न पूर्ण होता है, भवन वास्तुदोष से मुक्त रहता है तथा निवासियों को सुख-समृद्धि मिलती है। शिलान्यास में पृथ्वी, वराह, कूर्म और शेष का पूजन किया जाता है — ये चारों भूमि की धारणा करने वाले माने गए हैं।

शिलान्यास पूजा कब करें?

  • भूमि पूजन के बाद — शिलान्यास सदा भूमि पूजन के उपरांत किया जाता है।
  • गृह निर्माण के आरंभ में — नींव की खुदाई के बाद शुभ मुहूर्त में।
  • शुभ मुहूर्त में — पंचांग देखकर उत्तरायण, शुक्ल पक्ष, शुभ वार और शुभ नक्षत्र में।
  • राशि-ग्रह शांति हेतु — ज्योतिषी से परामर्श कर स्वामी ग्रह के अनुकूल समय में।

शिलान्यास पूजा की सामग्री

  • स्वच्छ शिला/पत्थर (नींव रखने योग्य),
  • ताम्र कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली, सुपारी, सिक्का,
  • गंगाजल, पंचामृत, पंचगव्य,
  • जौ, तिल, पीली सरसों, दूर्वा, कुश, सप्तधान्य,
  • रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी,
  • पुष्प, पुष्पमाला, बिल्वपत्र, पंचरत्न,
  • धूप, दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
  • नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, दही-चावल (दध्योदन),
  • हवन सामग्री, वस्त्र, स्वर्ण-रजत (शुभ के लिए)।

शिलान्यास पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गणेश पूजन करें और पुण्याहवाचन करवाएं। फिर संकल्प लें — तिथि, स्थान, नाम, गोत्र का उच्चारण करते हुए गृहारंभ एवं शिलान्यास करने का संकल्प करें।

ॐ शिलायै नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — शिला की शुद्धि

शिला (पत्थर) को पंचगव्य, पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं। शिला को हल्दी-कुमकुम से अलंकृत कर लाल वस्त्र में लपेटें। शिला पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

चरण 3 — शिला का पूजन

शिला को षोडशोपचार से पूजें — आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य आदि। पूजन के समय शिला मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ पूर्णे त्वं तु महाविद्ये सर्वसंदोहलक्षणे। सर्वं संपूर्णमेवात्र कुरुष्वांगिरसः सुते॥
ॐ पूर्णानाम्न्यै शिलायै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जाने वाली वस्तु का नाम बोलें — जैसे “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि”, “… नमः नैवेद्यं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — पृथ्वी, वराह, कूर्म एवं शेष का पूजन

चावल के ढेर (तंडुल पुंज) पर पृथ्वी, वराह, कूर्म और शेष देवताओं का आवाहन कर पूजन करें — ये चारों भूमि की स्थिति के आधार माने गए हैं।

ॐ पृथिव्यै नमः। ॐ वराहाय नमः। ॐ कूर्माय नमः। ॐ शेषाय नमः॥

चरण 5 — गर्त की तैयारी और शिला-न्यास

आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) दिशा में गर्त खोदें। गर्त में शैवाल, पंचरत्न, सप्तधान्य और जल रखें। उसके ऊपर दही-चावल (दध्योदन) रखें। शुभ मुहूर्त में ज्योतिर्विद द्वारा निर्धारित लग्न के समय 'तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराबलं चंद्रबलं तदेव' मंत्र का उच्चारण करते हुए शिला को गर्त में स्थापित करें।

ॐ तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराबलं चंद्रबलं तदेव। विद्याबलं दैवबलं तदेव लक्ष्मीपते तेऽङ्घ्रियुगं स्मरामि॥

चरण 6 — हवन, पूर्णाहुति एवं दान

शिलान्यास के बाद गणेशादि देवताओं का विसर्जन करें, स्वस्तिवाचन करें और हवन करें। ब्राह्मणों को दक्षिणा देकर आशीर्वाद ग्रहण करें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

शिलान्यास पूजा के नियम

  • शिलान्यास सदा शुभ मुहूर्त में करें — ग्रहण, मलमास, अमावस्या और अशुभ वार में वर्जित माना गया है।
  • शिला स्वच्छ और एक सिरे पर चौड़ी, दूसरी ओर संकरी (स्त्रीलक्षण युक्त) होनी चाहिए।
  • शिला का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
  • शिलान्यास पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करें।
  • शिलान्यास योग्य वैदिक आचार्य की देखरेख में करवाएं।
  • पूजा के बाद निर्माण कार्य निर्धारित मुहूर्त में ही आरंभ करें।

शिलान्यास से पहले भूमि पूजन के लिए भूमि पूजन विधि और संपूर्ण गृहारंभ के लिए गृह निर्माण प्रारंभ पूजा विधि भी देखें।