भूमि पूजन किसी भी निर्माण कार्य — घर, भवन या व्यावसायिक परिसर — के आरंभ से पहले धरती माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान है। इसे भूम्यारंभ संस्कार भी कहा जाता है। इस लेख में भूमि पूजन की संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त, सामग्री, भूमि मंत्र और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
भूमि पूजन का महत्व
गृह्यसूत्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार निर्माण कार्य से पहले भूमि पूजन अनिवार्य विधि मानी गई है। भूमि के अधिष्ठात्री देवी पृथ्वी माता हैं — अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में भूमि देवी की स्तुति वर्णित है। मान्यता है कि विधिपूर्वक भूमि पूजन करने से भूमि शुद्ध होती है, वास्तुदोष शांत होते हैं तथा निर्माण कार्य में सफलता मिलती है। भूमि को देवी के रूप में पूजने की परंपरा हिंदू संस्कृति की प्राचीन विशेषता है — भूमि का दोहन करने से पूर्व उससे क्षमा याचना की जाती है।
भूमि पूजन कब करें?
- गृह निर्माण के आरंभ में — नींव खोदने से पहले।
- शिलान्यास (नींव) से पूर्व — भूमि पूजन के बाद ही शिलान्यास किया जाता है।
- शुभ मुहूर्त में — पंचांग देखकर उत्तरायण काल, शुक्ल पक्ष और शुभ नक्षत्र में।
- वाणिज्यिक/सरकारी भवन निर्माण में भी भूमि पूजन की परंपरा है।
भूमि पूजन की सामग्री
- ताम्र/मिट्टी का कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली, सुपारी, सिक्का,
- गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर),
- जौ, तिल, पीली सरसों, दूर्वा, कुश, सप्तधान्य,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी,
- पुष्प, पुष्पमाला, बिल्वपत्र,
- धूप, दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
- नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, गुड़,
- हवन सामग्री — आम की समिधा, घी,
- दधि-उड़द (बलि के लिए), पंचरत्न, स्वर्ण-रजत (शुभ के लिए)।
भूमि पूजन विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — भूमि की शुद्धि
भूमि पूजन के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके गोबर से लीपें और गंगाजल का छिड़काव करें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से भूमि पूजन का आरंभ करना शुभ माना गया है।
चरण 2 — संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर तिथि, स्थान, नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए भूमि पूजन का संकल्प लें।
चरण 3 — गणेश पूजन
विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन करें ताकि निर्माण कार्य निर्विघ्न संपन्न हो।
चरण 4 — कलश स्थापना
कलश में गंगाजल भरकर मौली से लपेटें, आम के पत्ते लगाकर नारियल रखें और कलश का पूजन करें। कलश को सप्तधान्य (सात अनाज) के ऊपर स्थापित करें।
चरण 5 — भूमि देवी का आवाहन एवं पूजन
भूमि की अधिष्ठात्री देवी का आवाहन करें:
आवाहन के बाद भूमि देवी को षोडशोपचार अर्पित करें — आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि। प्रत्येक उपचार के समय मंत्र का उच्चारण करें:
नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जाने वाली वस्तु का नाम बोलें — जैसे “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि”, “… नमः नैवेद्यं समर्पयामि” आदि।
चरण 6 — भूमि को अर्घ्य
जानु (घुटने) के बल बैठकर भूमि को अर्घ्य अर्पित करें:
चरण 7 — भूमि से क्षमा याचना
भूमि खनन से पूर्व धरती माता से क्षमा याचना करें:
चरण 8 — भूमि खनन एवं पूर्णाहुति
क्षमा याचना के बाद ईशान कोण से शुभ मुहूर्त में भूमि खनन आरंभ करें। हवन करते हुए जौ, तिल और घी की आहुतियां दें। अंत में पूर्णाहुति करके आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। खोदी गई भूमि में पंचरत्न, स्वर्ण आदि रखना शुभ माना गया है।
भूमि पूजन के नियम
- भूमि पूजन सदा शुभ मुहूर्त में करें — मलमास, ग्रहण और अमावस्या में वर्जित माना गया है।
- पूजन के दिन सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
- भूमि पूजन पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करें।
- खनन ईशान कोण से शुरू करें और बाद में पूर्व से आगे बढ़ें।
- यदि संभव हो तो भूमि पूजन किसी योग्य वैदिक आचार्य से करवाएं।
- भूमि पूजन के बाद निर्माण कार्य का आरंभ निर्धारित मुहूर्त में करें।
भूमि पूजन के बाद नींव रखने की विधि के लिए शिलान्यास पूजा विधि और निर्माण के शुभारंभ के लिए गृह निर्माण प्रारंभ पूजा विधि भी देखें।