गृह निर्माण प्रारंभ पूजा (गृहारंभ संस्कार) नए घर के निर्माण कार्य की शुरुआत में भगवान गणेश, भूमि देवी, वास्तुदेव और नवग्रह का पूजन करने की वैदिक विधि है। इस लेख में गृह निर्माण प्रारंभ पूजा की संपूर्ण विधि, मुहूर्त, सामग्री, मंत्र और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

गृह निर्माण प्रारंभ पूजा का महत्व

हिंदू परंपरा में घर के निर्माण से पूर्व गृहारंभ (गृह निर्माण प्रारंभ) संस्कार करने का विधान है। गृह्यसूत्रों में वास्तु-पूजन को गृहारंभ का अनिवार्य अंग बताया गया है। मान्यता है कि गृहारंभ पूजा करने से भूमि शुद्ध होती है, निर्माण कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। यह पूजा गृह निर्माण की शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

गृह निर्माण प्रारंभ पूजा कब करें?

  • निर्माण कार्य आरंभ करने से पूर्व — भूमि पूजन और शिलान्यास से पहले या साथ।
  • शुभ मुहूर्त में — पंचांग देखकर उत्तरायण काल, शुक्ल पक्ष और शुभ नक्षत्र में।
  • राशि-कुंडली अनुसार — ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ समय में।
  • मलमास, ग्रहण एवं अमावस्या में गृहारंभ वर्जित माना गया है।

गृह निर्माण प्रारंभ पूजा की सामग्री

  • ताम्र/मिट्टी का कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली, सुपारी, सिक्का,
  • गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर),
  • जौ, तिल, पीली सरसों, दूर्वा, कुश, सप्तधान्य,
  • रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी,
  • पुष्प, पुष्पमाला, बिल्वपत्र,
  • धूप, दीपक, कपूर, घंटी, शंख,
  • गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र,
  • नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, गुड़,
  • हवन सामग्री — आम की समिधा, जौ, तिल, घी।

गृह निर्माण प्रारंभ पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके गंगाजल का छिड़काव करें। हाथ में जल-अक्षत-पुष्प लेकर तिथि, स्थान, नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए गृह निर्माण प्रारंभ पूजा का संकल्प लें।

ॐ गृहारंभपूजनं करिष्ये निर्विघ्नतासिद्ध्यर्थं गणपतिपूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश पूजन

सभी विघ्नों की निवृत्ति के लिए सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करें। गणेश प्रतिमा पर तिलक करें, अक्षत-पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएं।

ॐ गं गणपतये नमः। ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्। ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीदसादनम्॥

चरण 3 — कलश स्थापना

कलश में गंगाजल भरें, मुख पर सुपारी-सिक्का रखें, मौली बांधकर आम के पत्ते लगाएं और नारियल रखें। सप्तधान्य के ऊपर कलश स्थापित कर कलश का पूजन करें।

ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दवः। पुनरूर्जा निवर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद् रयिः॥

चरण 4 — भूमि देवी एवं वास्तुदेव का पूजन

भूमि देवी का आवाहन कर पूजन करें, फिर वास्तुदेव का आवाहन कर पूजन करें। वास्तु आवाहन के समय वास्तोष्पति सूक्त का उच्चारण करें:

ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवानः। यत्त्वेमहे प्रतितन्नो जुषस्व शन्नो भव द्विपदेश्चतुष्पदे॥

भूमि और वास्तुदेव का षोडशोपचार से पूजन करें। प्रत्येक उपचार अर्पित करते समय संबंधित देवता के नाम से मंत्र बोलें:

ॐ भूर्भुवः स्वः वास्तोष्पतये नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जाने वाली वस्तु का नाम बोलें — जैसे “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि”, “… नमः नैवेद्यं समर्पयामि” आदि।

चरण 5 — नवग्रह पूजन

ग्रहों के शुभ प्रभाव के लिए नवग्रहों का स्मरण कर पूजन करें। नवग्रह (सामूहिक) शांति मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥

चरण 6 — हवन एवं पूर्णाहुति

हवन कुंड में गायत्री मंत्र से आहुतियां दें। उसके बाद जौ, तिल और पीली सरसों की आहुति दें। पूर्णाहुति के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

गृह निर्माण प्रारंभ पूजा के नियम

  • गृह निर्माण प्रारंभ पूजा शुभ मुहूर्त में ही करें।
  • पूजन के दिन सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
  • पूजा पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करें।
  • निर्माण कार्य का शुभारंभ पूजा के बाद निर्धारित मुहूर्त में करें।
  • यदि संभव हो तो पूजा किसी योग्य वैदिक आचार्य से करवाएं।
  • भूमि पूजन और शिलान्यास क्रमशः करें — क्रम पलटना शुभ नहीं माना जाता।

गृह निर्माण के क्रम में भूमि पूजन के लिए भूमि पूजन विधि, नींव रखने के लिए शिलान्यास पूजा विधि और घर में प्रवेश के लिए गृह प्रवेश पूजा विधि भी देखें।