रामदेव जी (बाबा रामदेव) को राम-स्वरूप और राम जी का अवतार माना जाता है। राजस्थान के लोक-देवता बाबा रामदेव (रामदेव पीर) की पूजा उत्तर और पश्चिम भारत में प्रचलित है। इस लेख में रामदेव जी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, रामदेव जयंती पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
रामदेव जी का महत्व
परंपरा के अनुसार बाबा रामदेव (1352 ई.) पोकरण (राजस्थान) के राजकुमार थे, जिन्हें लोग पीर और सामाजिक समता के प्रतीक के रूप में मानते हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा से संकट दूर होते हैं। भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (रामदेव जयंती) पर रामदेवरा (राजस्थान) में विशेष मेला और पूजन होता है। रामदेव जी के प्रति भक्ति में झूला उत्सव का भी प्रचलन है।
रामदेव जी पूजा कब करें?
- रामदेव जयंती: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया।
- शुक्रवार एवं रविवार: रामदेव पूजन के लिए प्रचलित दिन।
- रामदेवरा मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से दशमी तक विशेष।
रामदेव जी पूजा की सामग्री
- गेरू/पीले वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत,
- चंदन, गंगाजल,
- पुष्प, तुलसी दल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी,
- नैवेद्य — मीठा, हलवा, फल, नारियल।
रामदेव जी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प करें।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — रामदेव जी का ध्यान-पूजन
रामदेव जी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — रामदेव जी मंत्र जाप एवं चालीसा पाठ
रामदेव जी का प्रचलित मंत्र जाप करें:
रामदेव जी चालीसा का पाठ करें — पूर्ण पाठ रामदेव जी चालीसा लेख में देखें — और आरती — ॐ जय श्री रामदे — करें।
रामदेव जी पूजा के नियम
- रामदेव जी की पूजा में भक्ति-भाव प्रमुख माना गया है।
- भाद्रपद में रामदेवरा में मेला और पूजन प्रचलित है।
- पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
- रामदेव जी के मंदिर में निवेदित चादर/मीठा चढ़ाने का रिवाज है।