गोरखनाथ जी (गुरु गोरखनाथ) को नाथ परंपरा के महान सिद्ध-योगी और गुरु मच्छेंद्रनाथ के शिष्य माना जाता है। इन्हें शिव का अवतार भी कहा जाता है। इस लेख में गोरखनाथ जी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, गोरखनाथ जयंती (पूर्णिमा) पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

गोरखनाथ जी का महत्व

परंपरा के अनुसार गोरखनाथ नाथ सम्प्रदाय के आचार्य और योग का ज्ञान देने वाले सिद्ध माने जाते हैं। गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में इनका प्रसिद्ध मंदिर है। गोरखनाथ जी को गुरु और योगी-संत के रूप में पूजा जाता है। गोरखनाथ जयंती (कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा — प्रयागराज कुंभ के प्रथम स्नान दिवस के निकट) पर विशेष पूजन होता है।

गोरखनाथ जी पूजा कब करें?

  • गोरखनाथ जयंती: कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा।
  • गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा — गुरु के रूप में स्मरण।
  • नवरात्रि एवं महाशिवरात्रि: क्षेत्रीय परंपराओं में विशेष पूजन।

गोरखनाथ जी पूजा की सामग्री

  • रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
  • गंगाजल, पंचामृत,
  • पुष्प, तुलसी दल,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — मीठा, हलवा, फल, नारियल।

गोरखनाथ जी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प करें।

ॐ गोरक्षनाथाय नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — गोरखनाथ जी का ध्यान-पूजन

गोरखनाथ जी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ गोरक्षनाथाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — गोरखनाथ जी मंत्र जाप एवं चालीसा पाठ

गोरखनाथ जी का प्रचलित मंत्र जाप करें:

ॐ गोरक्षाय विद्महे सिद्धनाथाय धीमहि।
तन्नो गोरखः प्रचोदयात्॥

गोरखनाथ चालीसा का पाठ करें — पूर्ण पाठ गोरखनाथ चालीसा लेख में देखें — और आरती — जय गोरखनाथ महाराज — करें।

गोरखनाथ जी पूजा के नियम

  • गोरखनाथ जी की पूजा में गुरु-भक्ति का विशेष महत्व है।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
  • योग और साधना के प्रति श्रद्धा बनाए रखें।
  • मंदिर/मूर्ति के समक्ष ध्यान-पूजन करें।