खाटू श्याम बाबा को भगवान श्री कृष्ण के अंश और महाभारत के वीर बर्बरीक का रूप माना जाता है। राजस्थान के खाटू नगर में इनका प्रसिद्ध मंदिर है। इस लेख में खाटू श्याम पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, श्याम बाबा दर्शन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
खाटू श्याम बाबा का महत्व
परंपरा के अनुसार खाटू श्याम महाभारत के पात्र बर्बरीक (गुह्यक वीर) हैं, जिन्होंने दान में अपना शीश दे दिया था। श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएँगे। खाटू के श्याम बाबा को कलियुग के देवता और हारे का सहारा कहा जाता है। शुक्रवार को श्याम बाबा का विशेष दिन माना जाता है।
खाटू श्याम पूजा कब करें?
- शुक्रवार: खाटू श्याम बाबा का प्रमुख दिन।
- कार्तिक मास (श्याम महोत्सव): कार्तिक शुक्ल नवमी से पूर्णिमा तक विशेष उत्सव।
- प्रतिदिन: नियमित श्याम बाबा पूजन किया जा सकता है।
खाटू श्याम पूजा की सामग्री
- पीले/सफेद वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत,
- चंदन, गंगाजल,
- पुष्प, तुलसी दल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी,
- नैवेद्य — मीठा, हलवा, फल, नारियल।
खाटू श्याम पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प करें।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — खाटू श्याम बाबा का ध्यान-पूजन
खाटू श्याम बाबा का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — श्याम मंत्र जाप एवं चालीसा पाठ
खाटू श्याम बाबा का प्रचलित मंत्र जाप करें:
तन्नो श्यामः प्रचोदयात्॥
खाटू श्याम चालीसा का पाठ करें — पूर्ण पाठ खाटू श्याम चालीसा लेख में देखें — और आरती — आरती श्री श्याम प्रभु की — करें।
खाटू श्याम पूजा के नियम
- शुक्रवार को श्याम बाबा की विशेष पूजा प्रचलित है।
- पूजा में श्रद्धा और नाम-स्मरण का विशेष महत्व है।
- खाटू दर्शन के लिए प्रसाद (केसरिया मीठा) ले जाने का रिवाज है।
- पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।