बालाजी को भगवान हनुमान का रूप माना जाता है। उत्तर भारत में बालाजी के नाम से हनुमान जी की पूजा प्रचलित है — राजस्थान के सालासर और उत्तर प्रदेश के मीरजापुर (विंध्याचल क्षेत्र) में इनके प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस लेख में बालाजी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, बालाजी दर्शन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

बालाजी का महत्व

परंपरा के अनुसार बालाजी (हनुमान जी) राम-भक्त और बल-बुद्धि के देवता हैं। बालाजी को संकट-निवारक और भूत-प्रेत आदि से रक्षक माना गया है। मंगलवार और शनिवार बालाजी की पूजा के प्रमुख दिन हैं। सालासर बालाजी (राजस्थान) और मीरजापुर बालाजी के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।

बालाजी पूजा कब करें?

  • मंगलवार एवं शनिवार: बालाजी पूजन के प्रमुख दिन।
  • हनुमान जयंती: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा।
  • संकट मोचन अमावस्या: विशेष पूजन का दिन।

बालाजी पूजा की सामग्री

  • सिंदूर, रोली, कुमकुम, अक्षत,
  • चंदन, गंगाजल,
  • लाल पुष्प, गुड़,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — गुड़, मीठा, फल, नारियल।

बालाजी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा का संकल्प करें।

ॐ हनुमते नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — बालाजी का ध्यान-पूजन

बालाजी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ हनुमते नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — बालाजी मंत्र जाप एवं चालीसा पाठ

बालाजी का प्रचलित मंत्र जाप करें:

ॐ हं हनुमते नमः।

बालाजी चालीसा का पाठ करें — पूर्ण पाठ बालाजी चालीसा लेख में देखें — और आरती — ॐ जय हनुमत वीरा — करें। सालासर बालाजी की विशेष चालीसा सालासर बालाजी चालीसा लेख में देखें।

बालाजी पूजा के नियम

  • मंगलवार/शनिवार को बालाजी पूजन का विशेष महत्व है।
  • हनुमान जी को सिंदूर, गुड़ और मीठा अर्पण प्रचलित है।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
  • बालाजी का नाम-स्मरण — जय श्री राम, जय बजरंगबली — नियमित करें।