द्वारकाधीश अर्थात द्वारका नगरी के स्वामी — भगवान श्री कृष्ण। द्वारका को श्री कृष्ण की नगरी और चार धामों में से एक माना जाता है। इस लेख में द्वारकाधीश पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, जन्माष्टमी पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

द्वारकाधीश का महत्व

परंपरा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने द्वारका नगरी बसाई और वहाँ के अधिपति हुए। इसलिए इन्हें द्वारकाधीश कहा जाता है। द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण के प्रमुख मंदिरों में है। जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) पर यहाँ विशेष पूजन और उत्सव होता है।

द्वारकाधीश पूजा कब करें?

  • जन्माष्टमी: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी।
  • नंद महोत्सव: जन्माष्टमी का अगला दिन।
  • होली एवं नवरात्रि: क्षेत्रीय परंपराओं में विशेष पूजन।

द्वारकाधीश पूजा की सामग्री

  • पीले वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
  • गंगाजल, पंचामृत,
  • तुलसी दल, पुष्प,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर, फल, नारियल।

द्वारकाधीश पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व दिशा की ओर मुख कर पूजा का संकल्प करें।

ॐ द्वारकाधीशाय नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — द्वारकाधीश का ध्यान-पूजन

द्वारकाधीश का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ श्री कृष्णाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — द्वारकाधीश मंत्र जाप

द्वारकाधीश का प्रचलित मंत्र जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

जन्माष्टमी पर अष्टयाम (8 पहर का पूजन) का प्रचलन है। श्री कृष्ण के युगल रूप की पूजा राधा-कृष्ण पूजा विधि लेख में देखें।

द्वारकाधीश पूजा के नियम

  • पूजा में माखन-मिश्री का भोग प्रचलित है।
  • जन्माष्टमी पर रात्रि पूजन (मध्यरात्रि जन्मकाल) का विशेष महत्व है।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
  • श्री कृष्ण का नाम-स्मरण — हरे कृष्ण — नियमित करें।