भगवान जगन्नाथ को विश्व के स्वामी और भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। ये श्री कृष्ण के रूप में पुरी में विराजमान माने जाते हैं। इस लेख में जगन्नाथ जी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, रथ यात्रा और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
भगवान जगन्नाथ का महत्व
परंपरा के अनुसार जगन्नाथ (जगत के नाथ) भगवान विष्णु/श्री कृष्ण का स्वरूप हैं। पुरी (उड़ीसा) का श्री जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक माना जाता है। यहाँ जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की त्रिमूर्ति की पूजा होती है। रथ यात्रा (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) पर तीनों रथों की यात्रा का विशेष महत्व है।
जगन्नाथ जी पूजा कब करें?
- रथ यात्रा: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया।
- देवस्नान पूर्णिमा: ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा — जगन्नाथ स्नान पर्व।
- नवरात्रि एवं विष्णु पर्व: एकादशी, जन्माष्टमी आदि पर विशेष पूजन।
जगन्नाथ जी पूजा की सामग्री
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
- गंगाजल, पंचामृत,
- तुलसी दल, पुष्प,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी,
- नैवेद्य — खीर, मीठा, फल, नारियल।
जगन्नाथ जी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व दिशा की ओर मुख कर पूजा का संकल्प करें।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — जगन्नाथ जी का ध्यान-पूजन
जगन्नाथ जी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — जगन्नाथ मंत्र जाप
जगन्नाथ जी का प्रचलित मंत्र जाप करें:
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
रथ यात्रा और जगन्नाथ दर्शन का भाव — हरे कृष्ण हरे कृष्ण के नाम-स्मरण से जोड़ा जाता है।
जगन्नाथ जी पूजा के नियम
- जगन्नाथ मंदिर में दर्शन से पहले स्नान करें।
- रथ यात्रा के दिन रथ के दर्शन-स्पर्श का विशेष महत्व है।
- पूजा में श्रद्धा और नाम-स्मरण को विशेष महत्व दिया गया है।
- पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।