राधा-कृष्ण पूजा में भगवान कृष्ण और माता राधा के युगल रूप की एक साथ उपासना की जाती है। वृंदावन और ब्रज की परंपरा में राधा-कृष्ण के युगल रूप को प्रेम-भक्ति का परम प्रतीक माना गया है। मंदिरों और कई घरों में युगल मूर्ति के रूप में इनकी पूजा होती है। इस लेख में राधा-कृष्ण पूजा की सामग्री, चरणबद्ध विधि, मंत्र और आरती दी गई है।
सामान्य कृष्ण पूजा की विधि कृष्ण पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।
राधा-कृष्ण पूजा का महत्व
परंपरा में राधा-कृष्ण के युगल रूप को प्रेम, समर्पण और भक्ति का आदर्श माना गया है। ब्रज की भक्ति-परंपरा में राधा को कृष्ण की ह्रदय-रूपा माना जाता है। इस पूजा का मूल भाव — कृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम और भक्ति — जीवन में समर्पण-भाव लाने का साधन माना गया है।
राधा-कृष्ण पूजा कब करें
- गुरुवार और मंगलवार — कई घरों में युगल पूजा के विशेष दिन।
- शरद पूर्णिमा और रास-पूर्णिमा — ब्रज-परंपरा में युगल उपासना के विशेष अवसर।
- जन्माष्टमी (जन्माष्टमी पूजा विधि देखें)।
- होलिका दहन के बाद धुलेंडी/होली — राधा-कृष्ण से जुड़े उत्सवों पर पूजन का प्रचलन।
विशेष अनुष्ठान का मुहूर्त पंचांग या पंडित से देखने का प्रचलन है।
राधा-कृष्ण पूजा की सामग्री
- राधा-कृष्ण (युगल) की मूर्ति या चित्र,
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, मिश्री,
- गंगाजल, शुद्ध जल,
- पुष्प (पीले/श्वेत), तुलसी दल, अक्षत,
- चंदन, कुमकुम, हल्दी,
- वस्त्र-आभूषण (कुछ परंपराओं में श्रृंगार-अर्पण),
- धूप, घी का दीपक, कपूर,
- नैवेद्य — दही, मक्खन, मिश्री, मखाना, पंचमेवा,
- आसन, घंटी, पूजा की थाली।
राधा-कृष्ण पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — शुद्धि, आचमन एवं गणेश स्मरण
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल साफ करें, आचमन करें और गणेश स्मरण करें।
चरण 2 — संकल्प
संकल्प करें ('अमुक' स्थानों पर अपनी जानकारी भरें):
चरण 3 — ध्यान एवं आवाहन
कृष्ण के प्रचलित ध्यान-श्लोक (पूरा कृष्ण पूजा विधि में) का उच्चारण करें, फिर युगल रूप का आवाहन करें:
ॐ राधायै नमः आवाहनं समर्पयामि।
चरण 4 — युगल रूप का षोडशोपचार पूजन
दोनों रूपों का साथ-साथ पूजन करें। क्रम — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (जल/पंचामृत), वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रारूप:
ॐ राधायै नमः [उपचार] समर्पयामि।
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 5 — श्रृंगार-अर्पण (वैकल्पिक)
ब्रज-परंपरा में युगल मूर्ति को वस्त्र, आभूषण और पुष्प-श्रृंगार अर्पित करने का प्रचलन है। यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
चरण 6 — मंत्र जप
पूजा के बाद प्रचलित मंत्रों का जप करें:
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
चरण 7 — आरती
अंत में युगल रूप की आरती करें। प्रचलित आरतियाँ — युगल किशोर आरती और आरती कुंजबिहारी की।
चरण 8 — प्रसाद एवं क्षमा-प्रार्थना
आरती के बाद प्रसाद वितरित करें और क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
राधा-कृष्ण पूजा के नियम
- युगल पूजा में दोनों रूपों का समान भाव से पूजन करें।
- पूजा सात्विक रूप से करें; घर में स्वच्छता और व्यवस्था का ध्यान रखें।
- वृंदावन-परंपरा के मंदिरों की पद्धति अलग होती है; अपनी पारिवारिक पद्धति के अनुसार पूजा करें।
- युगल पूजन के बाद प्रसाद और नाम-संकीर्तन का विशेष प्रचलन है।