राम नवमी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है और इसे भगवान राम के जन्म-उत्सव के रूप में माना जाता है। इस दिन भगवान राम की विशेष पूजा, व्रत और रामायण-पाठ का प्रचलन है। इस लेख में राम नवमी की पूजा विधि, व्रत, राम पूजन, पाठ और पारण का संपूर्ण क्रम दिया गया है।

सामान्य नित्य राम पूजा की विधि राम पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।

राम नवमी का महत्व

परंपरा में चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम के जन्म का दिन माना जाता है। राम नवमी भगवान विष्णु के अवतारों में से एक राम के उत्सव के रूप में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ने के कारण कई स्थानों पर माँ दुर्गा की पूजा का समापन भी इसी दिन होता है। यह दिन व्रत, पूजा और राम-भक्ति के लिए विशेष माना गया है।

राम नवमी कब मनाई जाती है?

राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि सामान्यतः मार्च-अप्रैल में आती है। तिथि और मुहूर्त सदैव स्थानीय पंचांग से देखें, क्योंकि तिथि की अवधि कभी-कभी पूर्व दिन रात या अगले दिन प्रातः तक होती है।

राम नवमी की तैयारी

  • एक दिन पहले घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था करें।
  • राम की नई मूर्ति/चित्र अथवा पूर्व-स्थापित मूर्ति की पूजा करें।
  • सामग्री — पंचामृत, फूल, अक्षत, तुलसी, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (केला, मिश्री, खीर/पंचमेवा), आसन, घंटी।
  • राम चालीसा, रामायण/सुन्दरकाण्ड की पुस्तक या प्रति रखें।

राम नवमी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — प्रातः स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत-पूजन का संकल्प करें। संकल्प में 'अमुक' स्थानों पर अपनी जानकारी भरें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थं
रामनवमीव्रतपूजां करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण एवं राम ध्यान

ॐ गं गणपतये नमः।
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं,
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्।
वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं,
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥

चरण 3 — राम पूजन

राम की मूर्ति/चित्र का पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (जल/पंचामृत), वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रचलित प्रारूप:

ॐ रामाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — मंत्र जप

दिन भर प्रचलित राम मंत्रों का जप करें:

ॐ रामाय नमः।
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि।
तन्नो रामः प्रचोदयात्॥

चरण 5 — रामायण/चालीसा पाठ

राम नवमी पर राम चालीसा का पाठ और रामायण/सुन्दरकाण्ड पाठ करने का विशेष प्रचलन है। कई स्थानों पर सामूहिक रामायण-पाठ और भजन-संकीर्तन होता है।

चरण 6 — आरती एवं प्रसाद

संध्या में राम की आरती करें — आरती श्री रामायण — और प्रसाद वितरण करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

चरण 7 — पारण

राम नवमी का व्रत दशमी के दिन प्रातः स्नान के बाद पारण द्वारा पूर्ण होता है। पारण का सटीक समय पंचांग देखें।

राम नवमी के नियम

  • व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें — पूर्ण उपवास, फलाहार या एक समय का भोजन, जैसा उचित लगे।
  • बीमार, वृद्ध, गर्भवती और बच्चों के लिए अनिवार्य नहीं; अपनी क्षमता के अनुसार करें।
  • दिन में राम नाम का स्मरण और राम-भजन करें; किसी का अपमान न करें।
  • राम नवमी के दिन दान-दक्षिणा और प्रसाद वितरण का भी प्रचलन है।

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तिथि
चैत्र शुक्ल नवमी
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