सीता-राम पूजा में भगवान राम और माता सीता के युगल रूप की एक साथ उपासना की जाती है। परंपरा में सीता को भगवान राम की अर्धांगिनी और विष्णु-लक्ष्मी के रूप में माना जाता है। इस युगल रूप की पूजा विवाह-उत्सवों, राम नवमी और गृहस्थ जीवन में प्रेम-सौहार्द के प्रतीक के रूप में विशेष रूप से होती है। इस लेख में सीता-राम पूजा की सामग्री, चरणबद्ध विधि, मंत्र और आरती दी गई है।
सामान्य राम पूजा की विधि राम पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।
सीता-राम पूजा का महत्व
सीता-राम के युगल रूप में आदर्श गृहस्थ जीवन की झलक दिखाई जाती है। परंपरा में राम-सीता का जोड़ा सतीत्व, सेवा और परस्पर प्रेम का प्रतीक माना गया है। विवाह-समारोहों में सीता-राम (कल्याण) पूजा और नवविवाहित घरों में सीता-राम की पूजा का विशेष प्रचलन है। इस पूजा का मूल भाव प्रेम, सेवा और संयम है।
सीता-राम पूजा कब करें
- विवाह-उत्सव: विवाह से पहले कई क्षेत्रों में सीता-राम कल्याण पूजा की जाती है।
- राम नवमी (राम नवमी पूजा विधि देखें)।
- गुरुवार और मंगलवार — कई घरों में विशेष दिन।
- नवविवाहित/नए घर में सीता-राम की पूजा करने का प्रचलन है।
विशेष अनुष्ठान का मुहूर्त पंचांग या पंडित से देखने का प्रचलन है।
सीता-राम पूजा की सामग्री
- सीता-राम (युगल) की मूर्ति या चित्र,
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, मिश्री,
- गंगाजल, शुद्ध जल,
- पुष्प (राम हेतु श्वेत/पीत, सीता हेतु लाल/गुलाबी), तुलसी दल, अक्षत,
- चंदन, कुमकुम, हल्दी,
- धूप, घी का दीपक, कपूर,
- नैवेद्य — खीर, केला, मिश्री, मखाना, नारियल,
- कलश हेतु पात्र, पत्ते, नारियल,
- आसन, घंटी, पूजा की थाली।
सीता-राम पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — शुद्धि, आचमन एवं गणेश स्मरण
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल साफ करें, आचमन करें और गणेश स्मरण करें।
चरण 2 — संकल्प एवं कलश स्थापना
संकल्प करें ('अमुक' स्थानों पर अपनी जानकारी भरें) और कलश स्थापना करें — कलश में गंगाजल, सुपारी, अक्षत, सिक्का रखकर पत्तों और नारियल से पूर्ण करें।
चरण 3 — ध्यान एवं आवाहन
राम के प्रचलित ध्यान-श्लोक (पूरा राम पूजा विधि में) का उच्चारण करें, फिर युगल रूप का आवाहन करें:
ॐ सीतायै नमः आवाहनं समर्पयामि।
चरण 4 — युगल रूप का षोडशोपचार पूजन
दोनों रूपों का साथ-साथ पूजन करें। क्रम — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (जल/पंचामृत), वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रारूप:
ॐ सीतायै नमः [उपचार] समर्पयामि।
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 5 — मंत्र जप
पूजा के बाद प्रचलित मंत्रों का जप करें:
तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
राम गायत्री के कुछ संस्करणों में पद-क्रम भिन्न मिलता है।
चरण 6 — आरती
अंत में राम और सीता की आरती करें। प्रचलित आरतियाँ — आरती श्री रामायण और सीता आरती (जानकी दुलारी)।
चरण 7 — प्रसाद एवं क्षमा-प्रार्थना
आरती के बाद प्रसाद वितरित करें और क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
सीता-राम पूजा के नियम
- युगल पूजा में दोनों रूपों का समान भाव से पूजन करें — किसी एक को कम न समझें।
- विवाह-उत्सव में सीता-राम कल्याण पूजा की शुद्ध विधि पंडित से ही कराएँ।
- पूजा सात्विक रूप से करें; घर में स्वच्छता और व्यवस्था का ध्यान रखें।
- नवविवाहित घरों में सीता-राम पूजन से गृहस्थ जीवन के आदर्श का स्मरण होता है — यह भाव ही पूजा का मूल है।