राम दरबार भगवान राम के पारिवारिक रूप को कहा जाता है — जिसमें राम के साथ माता सीता, भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न तथा भक्त श्रेष्ठ हनुमान की मूर्तियाँ एक साथ स्थापित होती हैं। कई घरों और मंदिरों में राम दरबार के रूप में ही राम-परिवार की पूजा होती है। इस लेख में राम दरबार की स्थापना, पूजन की सामग्री, चरणबद्ध विधि और मंत्र दिए गए हैं।

राम दरबार की पूजा का आधार सामान्य राम पूजा ही है; संपूर्ण राम पूजा विधि राम पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।

राम दरबार क्या है?

राम दरबार राम-परिवार का समूह-रूप है। परंपरा में इसे राम राज्य की प्रतीक-व्यवस्था के रूप में देखा जाता है — जहाँ राम सिंहासन पर विराजमान हों, सीता उनके साथ, और चारों भाई तथा हनुमान उनकी सेवा में हों। इस रूप में पूजा करने से परिवार में प्रेम-सौहार्द और आपसी सेवा की भावना बढ़ती है — यह मान्यता पारंपरिक रूप से प्रचलित है।

राम दरबार की स्थापना

  • राम दरबार की मूर्ति/चित्र आमतौर पर मुख्य दरवाज़े के सम्मुख या मंदिर-कोने में स्थापित करने का प्रचलन है — कुछ घरों में प्रवेश-द्वार पर भी रखा जाता है।
  • नई मूर्ति की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा पंडित/पुरोहित से कराने की परंपरा है। पहले से प्रतिष्ठित मूर्ति का नित्य पूजन किया जाता है।
  • स्थापना के दिन शुभ मुहूर्त देखने का प्रचलन है।
  • स्थान की सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखें; प्रतिदिन पूजन का नियम रखें।

राम दरबार पूजा की सामग्री

  • राम दरबार (परिवार) की मूर्ति या चित्र,
  • शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत,
  • श्वेत/लाल पुष्प, अक्षत, तुलसी दल,
  • चंदन, कुमकुम, हल्दी,
  • धूप, घी का दीपक, कपूर,
  • नैवेद्य — केला, मिश्री, खीर/पंचमेवा,
  • आसन, घंटी, पूजा की थाली।

राम दरबार पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — शुद्धि, आचमन एवं गणेश स्मरण

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल साफ करें, आचमन करें और गणेश स्मरण करें।

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 2 — संकल्प

पूजा का संकल्प करें ('अमुक' स्थानों पर अपनी जानकारी भरें):

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीरामचन्द्रस्य परिवार-सहित प्रीत्यर्थं
रामदरबारपूजनं करिष्ये।

चरण 3 — राम का ध्यान एवं आवाहन

राम के प्रचलित ध्यान-श्लोक (पूरा राम पूजा विधि में) का उच्चारण करें, फिर राम दरबार का आवाहन करें:

ॐ रामाय नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ सीतायै नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ लक्ष्मणाय नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ भरताय नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ शत्रुघ्नाय नमः आवाहनं समर्पयामि।
ॐ हनुमते नमः आवाहनं समर्पयामि।

चरण 4 — पूजन (परिवार-सहित उपचार)

राम दरबार के सभी रूपों का समान भाव से पूजन करें। प्रत्येक उपचार के लिए मुख्य मंत्र राम के नाम का प्रयोग करें, और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से उपचार-अर्पण भी कर सकते हैं:

ॐ रामाय नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ रामाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ रामाय नमः पुष्पं समर्पयामि।
ॐ रामाय नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ रामाय नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ रामाय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।

और परिवार के प्रत्येक सदस्य के नाम से, जैसे: ॐ सीतायै नमः पुष्पं समर्पयामि, ॐ हनुमते नमः पुष्पं समर्पयामि। (नाम क्रम में क्षेत्रीय अंतर मिल सकता है।)

चरण 5 — मंत्र जप

पूजा के बाद प्रचलित मंत्रों का जप करें:

ॐ रामाय नमः।
ॐ सीतारामाय नमः।
ॐ हनुमते नमः।

चरण 6 — राम चालीसा एवं हनुमान चालीसा पाठ

राम दरबार की पूजा में राम चालीसा का पाठ मुख्य है; चाहें तो हनुमान चालीसा का भी पाठ करें।

चरण 7 — आरती एवं प्रसाद

अंत में राम की आरती करें — आरती श्री रामायण — और प्रसाद वितरित करें। क्षमा-प्रार्थना:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

राम दरबार पूजा के नियम

  • राम दरबार में किसी एक सदस्य की पूजा कम न करें — सभी रूपों का समान श्रद्धा से पूजन करें।
  • मूर्ति की नियमित सफाई और नित्य पूजन करें।
  • राम दरबार के सम्मुख शांत भाव से पूजा और नाम-जप करें।
  • विशेष अवसरों (राम नवमी, दीपावली, विवाह-उत्सव) पर विस्तृत पूजन करने का प्रचलन है।

संबंधित पृष्ठ